1st Bihar Published by: First Bihar Updated Jul 12, 2026, 5:41:47 PM
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कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में सरकारी बसों की व्यवस्था का औचक निरीक्षण करने निकले परिवहन मंत्री बायराथी सुरेश के साथ एक दिलचस्प घटना सामने आई. आम यात्री बनकर बस सेवा का जायजा लेने पहुंचे मंत्री को एक बस कंडक्टर ने छुट्टे पैसे नहीं होने पर बस से उतर जाने के लिए कह दिया. कंडक्टर को इस बात की बिल्कुल भी जानकारी नहीं थी कि जिस यात्री से वह बात कर रहा है, वह राज्य का परिवहन मंत्री है.
जानकारी के अनुसार, परिवहन मंत्री बायराथी सुरेश शनिवार रात करीब दो घंटे तक मास्क पहनकर आम यात्री की तरह बेंगलुरु महानगर परिवहन निगम (BMTC) की 10 से अधिक बसों में सफर करते रहे. इस दौरान उन्होंने बस सेवाओं, यात्रियों से व्यवहार और कर्मचारियों की कार्यशैली का जमीनी स्तर पर निरीक्षण किया.
निरीक्षण के दौरान मंत्री हेब्बल से नागाशेट्टीहल्ली जाने वाली एक बीएमटीसी बस में सवार हुए. उन्होंने कंडक्टर से दो टिकट मांगे और भुगतान के लिए 100 रुपये का नोट दिया. नोट देखकर कंडक्टर ने उनसे छुट्टे पैसे मांगे. जब मंत्री ने कहा कि उनके पास खुले पैसे नहीं हैं, तो कंडक्टर ने अपना कैश बैग दिखाते हुए कहा कि उसके पास भी छुट्टे नहीं हैं. इसके बाद उसने साफ शब्दों में कहा कि यदि छुट्टे पैसे नहीं हैं तो बस से उतर जाइए.
मंत्री ने बिना किसी बहस के शांतिपूर्वक बस से उतरना ही उचित समझा. उन्होंने अपनी पहचान भी उजागर नहीं की. बाद में निरीक्षण पूरा होने के बाद इस घटना की जानकारी सामने आई, जिसने सभी को हैरान कर दिया.
इसी निरीक्षण के दौरान मंत्री ने एक अन्य बस का भी जायजा लिया, जहां चालक और कंडक्टर ने बस स्टॉप पर खड़े यात्रियों को बिना रोके बस आगे बढ़ा दी. इसे यात्रियों के प्रति लापरवाही मानते हुए मंत्री ने दोनों कर्मचारियों को तत्काल निलंबित करने का निर्देश दिया.
बस सेवा के अलावा मंत्री ने नागाशेट्टीहल्ली से ऑटो रिक्शा से भी यात्रा की. ऑटो के मीटर में किराया 30 रुपये दिख रहा था, लेकिन चालक ने उनसे 36 रुपये की मांग की. जब मंत्री ने अतिरिक्त किराए की वजह पूछी तो चालक ने बताया कि मीटर का दोबारा कैलिब्रेशन कराया जाएगा. इसके बाद मंत्री ने चालक को 40 रुपये का भुगतान किया और पूरे मामले को भी अपने निरीक्षण में दर्ज किया.
परिवहन मंत्री का यह औचक निरीक्षण अब पूरे देश में चर्चा का विषय बना हुआ है. इस घटना ने एक ओर जहां सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था की वास्तविक स्थिति को उजागर किया, वहीं कर्मचारियों के यात्रियों के प्रति व्यवहार और किराया व्यवस्था पर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं.