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‘नो आईडी, नो एंट्री’ से बदला बॉर्डर का माहौल, भारत-नेपाल के ‘रोटी-बेटी’ रिश्ते पर बढ़ी मुश्किलें

भारत-नेपाल सीमा पर इन दिनों आवाजाही को लेकर सख्ती बढ़ गई है, जिसका असर सीमावर्ती इलाकों में साफ देखने को मिल रहा है। नए नियम लागू होने के बाद लोगों को बॉर्डर पार करने में पहले के मुकाबले ज्यादा जांच का सामना करना पड़ रहा है। इससे व्यापार, रिश्तेदारी.

1st Bihar Published by: First Bihar Updated May 20, 2026, 4:06:57 PM

‘नो आईडी, नो एंट्री’ से बदला बॉर्डर का माहौल, भारत-नेपाल के ‘रोटी-बेटी’ रिश्ते पर बढ़ी मुश्किलें

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भारत-नेपाल सीमा पर इन दिनों माहौल पहले जैसा नहीं रहा। कभी बिना रोक-टोक आने-जाने वाले लोगों को अब बॉर्डर पर कड़ी जांच से गुजरना पड़ रहा है। नेपाल सरकार की ओर से सीमा प्रवेश और कस्टम नियमों में सख्ती किए जाने के बाद सीमावर्ती इलाकों में इसका असर साफ दिखाई देने लगा है। हालात ऐसे हो गए हैं कि अब वैध पहचान पत्र नहीं होने पर लोगों को बॉर्डर से ही वापस लौटाया जा रहा है। इससे दोनों देशों के बीच वर्षों पुराने ‘रोटी-बेटी’ के रिश्ते पर भी असर पड़ता दिख रहा है।


नेपाल सरकार ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए सीमा पर जांच बढ़ा दी है। अब नेपाल में प्रवेश के लिए आधार कार्ड, वोटर आईडी या अन्य वैध पहचान पत्र दिखाना जरूरी कर दिया गया है। कई मामलों में डिजिटल कॉपी या मोबाइल में मौजूद दस्तावेज भी मान्य नहीं किए जा रहे। ऐसे में रोजमर्रा के काम से नेपाल जाने वाले लोगों को काफी परेशानी झेलनी पड़ रही है।


सीमावर्ती बाजारों पर भी इसका सीधा असर पड़ा है। पहले नेपाल से बड़ी संख्या में लोग भारतीय बाजारों में खरीदारी करने आते थे, लेकिन अब आवाजाही कम होने से बाजारों में सन्नाटा नजर आने लगा है। दुकानदारों का कहना है कि पहले की तुलना में ग्राहकों की संख्या काफी घट गई है। वहीं नेपाल की ओर भी भारतीय लोगों की आवाजाही कम हो गई है।


स्थानीय लोगों का कहना है कि भारत और नेपाल के बीच सिर्फ व्यापारिक नहीं, बल्कि पारिवारिक रिश्ते भी हैं। सीमा के दोनों ओर बड़ी संख्या में ऐसे परिवार रहते हैं, जिनके रिश्तेदार दूसरे देश में बसे हुए हैं। शादी-ब्याह, रिश्तेदारी और सामाजिक कार्यक्रमों के लिए लोग आसानी से सीमा पार करते रहे हैं। लेकिन अब पहचान पत्र की सख्ती के कारण लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है।


सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले गीता कार्की, भुवन थापा, श्याम नारायण और बबिता देवी जैसे लोगों का कहना है कि सुरक्षा जांच जरूरी है, लेकिन रोजमर्रा की जिंदगी को मुश्किल बना देना सही नहीं है। उनका कहना है कि छोटे-छोटे सामानों पर भी कस्टम ड्यूटी और कड़ी जांच से व्यापार प्रभावित हो रहा है। इससे दोनों देशों के सीमावर्ती बाजारों की दुकानदारी पर असर पड़ रहा है।


सबसे ज्यादा परेशानी मरीजों और मजदूरों को हो रही है। बिहार के सीमावर्ती जिलों से रोजाना बड़ी संख्या में लोग नेपाल के बिराटनगर, धरान और लहान जैसे शहरों में इलाज के लिए जाते हैं। वहां आंख और अन्य बीमारियों के अच्छे अस्पताल मौजूद हैं। लेकिन अब पहचान पत्र की अनिवार्यता के कारण कई मरीजों को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।


नेपाल सरकार ने बच्चों के लिए भी नए नियम लागू कर दिए हैं। 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए जन्म प्रमाण पत्र या स्कूल आईडी दिखाना जरूरी कर दिया गया है। जिन लोगों के पास कोई दस्तावेज नहीं होता, उन्हें सीमा से ही लौटा दिया जाता है। इससे परिवारों की परेशानियां और बढ़ गई हैं।


सीमा पर तैनात नेपाल पुलिस और एपीएफ के अधिकारियों का कहना है कि यह अभियान सुरक्षा को ध्यान में रखकर चलाया जा रहा है। नेपाल के एपीएफ डीएसपी शीतल श्रेष्ठ ने कहा कि सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि सभी देशों से आने वाले लोगों के लिए पहचान सत्यापन जरूरी किया गया है। वहीं एसएसबी के अधिकारियों का कहना है कि दोनों देशों की सुरक्षा एजेंसियां आपसी समन्वय के साथ काम कर रही हैं और हर व्यक्ति की जांच के बाद ही प्रवेश की अनुमति दी जा रही है।