DELHI: लोकसभा में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने इमिग्रेशन और विदेशी विधेयक, 2025 पर चर्चा करते हुए कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार का उद्धेश्य केवल उन लोगों को भारत आने से रोकना है, जिनके इरादे देश के प्रति दुर्भावनापूर्ण हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत कोई "धर्मशाला" नहीं है, और जो लोग राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बने, उन्हें देश में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा।
अमित शाह ने यह भी कहा कि सरकार ऐसे लोगों का स्वागत करती है जो पर्यटक के रूप में, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, या व्यापार के लिए भारत आते हैं, लेकिन जो लोग देश के लिए खतरा बने, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने इस विधेयक को देश की सुरक्षा को मजबूत करने, अर्थव्यवस्था और व्यापार को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण बताया। इसके साथ ही, यह विधेयक यह सुनिश्चित करेगा कि भारत में आने वाले सभी विदेशी नागरिकों के बारे में नवीनतम जानकारी उपलब्ध हो।
म्यांमार और बांग्लादेश से आने वाले रोहिंग्या घुसपैठियों के मुद्दे पर अमित शाह ने कहा कि इन घुसपैठियों की संख्या बढ़ने से देश की सुरक्षा को खतरा हुआ है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ये लोग अशांति फैलाने की कोशिश करते हैं, तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। शाह ने कहा कि यह विधेयक देश की सुरक्षा को मजबूत करेगा और भारत को 2047 तक दुनिया का सबसे विकसित देश बनाने में मदद करेगा।
पश्चिम बंगाल की ममता सरकार पर आरोप लगाते हुए अमित शाह ने कहा कि राज्य सरकार अवैध घुसपैठ के खिलाफ कोई सख्त कदम नहीं उठा रही है। उन्होंने बताया कि भारत-बांग्लादेश सीमा पर 450 किलोमीटर लंबी बाड़ लगाने का कार्य अभी तक अधूरा है, क्योंकि पश्चिम बंगाल सरकार ने इसके लिए जमीन उपलब्ध नहीं कराई है। शाह ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार घुसपैठियों के लिए आधार कार्ड सुनिश्चित कर रही है, जिससे वे देश के अन्य हिस्सों में फैल रहे हैं।
उन्होंने कहा कि अगले साल पश्चिम बंगाल में भाजपा सरकार बनने के बाद बाड़ का काम पूरा किया जाएगा। अमित शाह ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार ने पश्चिम बंगाल सरकार को 11 पत्र लिखे हैं और इस मामले पर राज्य अधिकारियों से सात बार बैठकें की हैं, लेकिन बावजूद इसके बाड़ लगाने का कार्य अटका हुआ है।



