1st Bihar Published by: First Bihar Updated May 19, 2026, 2:38:48 PM
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उत्तराखंड की राजनीति के सबसे सख्त, ईमानदार और अनुशासित चेहरों में शुमार रहे मेजर जनरल (सेनि) भुवन चंद्र खंडूड़ी के निधन से पूरे देश में शोक की लहर है। सेना की वर्दी से लेकर मुख्यमंत्री की कुर्सी तक का उनका सफर भारतीय राजनीति में एक आदर्श उदाहरण माना जाता है। लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे खंडूड़ी ने मैक्स अस्पताल में अंतिम सांस ली। उनके निधन के साथ ही उत्तराखंड की राजनीति का एक युग समाप्त हो गया है।
इस दुखद खबर के बाद देशभर के राजनीतिक और सामाजिक नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि दी है। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं वरिष्ठ भाजपा नेता मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूड़ी जी के निधन का समाचार अत्यंत दुखद है। उन्होंने अपने पूरे जीवन को राष्ट्रसेवा, सुशासन और जनकल्याण के लिए समर्पित किया। उनका सादगीपूर्ण व्यक्तित्व और सार्वजनिक जीवन में दिया गया योगदान हमेशा प्रेरणा देता रहेगा।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने आगे कहा कि खंडूड़ी जी जैसे नेता विरले ही होते हैं, जिन्होंने सत्ता को सेवा का माध्यम बनाया। उन्होंने ईश्वर से प्रार्थना की कि दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें और शोक संतप्त परिवार को इस अपूरणीय क्षति को सहने की शक्ति दें। उन्होंने अपने संदेश का समापन “ॐ शांति” के साथ किया।
एक अक्टूबर 1934 को देहरादून में जन्मे भुवन चंद्र खंडूड़ी ने अपने जीवन की शुरुआत भारतीय सेना से की थी। वे इंजीनियरिंग कोर में अधिकारी रहे और अपनी उत्कृष्ट कार्यकुशलता, अनुशासन और नेतृत्व क्षमता के लिए जाने जाते थे। सेना में रहते हुए उन्होंने कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं और 1982 में उन्हें ‘अति विशिष्ट सेवा मेडल’ से सम्मानित किया गया।
मेजर जनरल के पद से सेवानिवृत्त होने के बाद खंडूड़ी ने सक्रिय राजनीति में कदम रखा। उनका राजनीतिक सफर भी उतना ही प्रभावशाली रहा जितना उनका सैन्य जीवन। वे 1991 में पहली बार गढ़वाल लोकसभा सीट से सांसद चुने गए। इसके बाद वे कई बार संसद पहुंचे और भारतीय जनता पार्टी के मजबूत पहाड़ी चेहरों में उनकी पहचान स्थापित हुई।
अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के दौरान उन्हें सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई। इस दौरान देश में सड़क निर्माण और बुनियादी ढांचे के विस्तार को नई दिशा मिली। उनके कार्यकाल को भारतीय सड़क नेटवर्क के विस्तार के महत्वपूर्ण दौर के रूप में याद किया जाता है।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के रूप में भी खंडूड़ी ने अपनी ईमानदार और सख्त कार्यशैली से प्रशासनिक सुधारों पर जोर दिया। उन्हें “ईमानदार नेता” और “सुशासन का प्रतीक” कहा जाता था। भ्रष्टाचार के खिलाफ उनके सख्त रुख और पारदर्शी प्रशासनिक शैली ने उन्हें जनता के बीच एक अलग पहचान दिलाई।
उनके निधन की खबर के बाद राजनीतिक, सामाजिक और सैन्य जगत में शोक की भावना है। लोग उन्हें एक ऐसे नेता के रूप में याद कर रहे हैं, जिन्होंने न केवल सत्ता संभाली बल्कि उसे जनसेवा का माध्यम बनाया। उत्तराखंड और देश की राजनीति में उनका योगदान लंबे समय तक याद रखा जाएगा। भुवन चंद्र खंडूड़ी का जीवन अनुशासन, ईमानदारी और राष्ट्रसेवा की एक प्रेरणादायक कहानी है, जो आने वाली पीढ़ियों को हमेशा मार्गदर्शन देती रहेगी।