Election 2025 : पटना के वीआईपी (प्रतिबंधित) इलाके में धरना देने को लेकर भागलपुर जिले के गोपालपुर विधानसभा के जदयू विधायक गोपाल मंडल और मुजफ्फरपुर जिले के गायघाट विधानसभा के पूर्व विधायक महेश्वर प्रसाद यादव के खिलाफ सचिवालय पुलिस ने केस दर्ज किया है। जानकारी के अनुसार, दोनों नेताओं ने एक संवेदनशील और प्रतिबंधित क्षेत्र में धरना देकर कानून की अवहेलना की, जिसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए प्राथमिकी दर्ज की।
सिटी एसपी मध्य दीक्षा ने बताया कि मजिस्ट्रेट की शिकायत के आधार पर केस दर्ज किया गया है और मामले की छानबीन जारी है। अधिकारी ने कहा कि धरने की वजह से इलाके में शांति भंग होने की संभावना बन गई थी, इसलिए पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया।
सूत्रों के अनुसार, टिकट कटने के डर से गोपाल मंडल अचानक सचिवालय थाना क्षेत्र के वीआईपी इलाके में धरने पर बैठ गए थे। उन्होंने पत्रकारों से कहा था कि वे मुख्यमंत्री से मिलने आए हैं और बिना टिकट की स्थिति साफ किए बिना लौटने का कोई इरादा नहीं है। उनके साथ पूर्व विधायक महेश्वर प्रसाद यादव भी मौजूद थे।
धरने के दौरान पुलिस और सुरक्षा कर्मियों ने उन्हें समझाने की कोशिश की, लेकिन वे नहीं माने। इसके बाद पुलिस ने उन्हें वहां से हटाया। इस बीच खबर फैली कि गोपाल मंडल को गिरफ्तार कर लिया गया है, लेकिन वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने इसे खारिज किया।
यह घटना जदयू में टिकट कटने और उपेक्षा को लेकर नाराज नेताओं की बगावत के बीच सामने आई है। मंगलवार को पार्टी के कुछ नेताओं ने अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए विरोध का स्वर उठाया। भागलपुर के सांसद अजय मंडल ने भी अपनी नाराजगी जताई और पार्टी नेतृत्व को चेतावनी देते हुए इस्तीफा देने की पेशकश की।
अजय मंडल ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को दो पृष्ठों का पत्र लिखा, जिसमें उन्होंने कहा कि उन्हें पार्टी में उपेक्षित किया जा रहा है और स्थानीय स्तर पर उम्मीदवारों के चयन में उन्हें नजरअंदाज किया जा रहा है। सांसद ने यह भी आरोप लगाया कि उन्होंने कई बार मुख्यमंत्री से मिलने की कोशिश की, लेकिन उन्हें मिलने नहीं दिया गया। उन्होंने पार्टी में बाहरी लोगों को प्राथमिकता दिए जाने का भी आरोप लगाया।
इस बीच, जदयू में टिकट को लेकर बढ़ रही नाराजगी और असंतोष को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। पार्टी में टिकट वितरण और उम्मीदवार चयन को लेकर अंदरूनी तनाव की खबरें लगातार सामने आ रही हैं। वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि पार्टी को अंदरूनी गुटबंदी और नाराज नेताओं के विरोध का सामना करना पड़ रहा है, जो आगामी विधानसभा चुनावों में चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि टिकट कटने से नाराज नेता अपनी अलग रणनीति पर काम कर सकते हैं, जिससे पार्टी की छवि प्रभावित हो सकती है। उन्होंने बताया कि ऐसे मामलों में पार्टी को तत्काल स्थिति नियंत्रण में लाने और नेताओं की नाराजगी कम करने के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।
इस घटना ने बिहार की राजनीति में एक नया मोड़ ला दिया है। जबकि पार्टी नेतृत्व ने इसे शांतिपूर्वक हल करने का प्रयास किया है, नेताओं के धरने और विरोध ने पार्टी के अंदर असंतोष को उजागर कर दिया है। विधानसभा चुनाव 2025 से पहले यह घटना जदयू के लिए बड़ी चुनौती बन गई है।
पार्टी के अंदर से मिली जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने नाराज नेताओं के साथ संवाद स्थापित करने और उनके मुद्दों को सुलझाने के लिए उच्चस्तरीय बैठकें शुरू कर दी हैं। हालांकि, जमीन पर नाराज नेताओं का विरोध जारी है और पार्टी को इसे लेकर सतर्क रहना होगा।
पटना सचिवालय में धरने जैसी घटनाएं सुरक्षा के लिहाज से गंभीर मानी जाती हैं, और इसलिए पुलिस ने तुरंत हस्तक्षेप किया। अधिकारियों ने कहा कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए निगरानी बढ़ाई जाएगी और संवेदनशील क्षेत्रों में सख्ती बरती जाएगी।
इस पूरे घटनाक्रम ने स्पष्ट कर दिया है कि जदयू में टिकट को लेकर नेताओं की नाराजगी और असंतोष अब सार्वजनिक स्तर पर सामने आ चुका है। यह देखना होगा कि पार्टी नेतृत्व किस प्रकार से इस असंतोष को शांत करता है और आगामी चुनावों में इसे सकारात्मक दिशा में बदलता है।






