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Bihar assembly elections 2025 : एनडीए विरोधी गतिविधियों और भीतरघात की पड़ताल, जिलों से मिली रिपोर्ट पर जदयू करने जा रही सख्त कार्रवाई

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में जदयू 16 सीटों पर मिली हार की समीक्षा में जुट गई है। जिलों से रिपोर्ट मांगी गई है और भीतरघात, जातीय समीकरण व प्रत्याशी चयन की खामियों की जांच के लिए 6 दिसंबर को अहम बैठक होगी।

Bihar assembly elections 2025 : एनडीए विरोधी गतिविधियों और भीतरघात की पड़ताल, जिलों से मिली रिपोर्ट पर जदयू करने जा रही सख्त कार्रवाई
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Bihar assembly elections 2025 : बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में एनडीए गठबंधन के अहम सहयोगी दल जनता दल (यूनाइटेड) ने जिन 16 विधानसभा क्षेत्रों में निराशाजनक परिणाम दर्ज किए, अब उन क्षेत्रों की हार की विस्तृत समीक्षा प्रक्रिया शुरू कर दी है। पार्टी मुख्यालय ने सभी संबंधित जिलों से लिखित रूप में रिपोर्ट मांगी है, जिसमें हार के कारणों, स्थानीय मुद्दों, जातीय समीकरणों, प्रत्याशी चयन और भीतरघात जैसे पहलुओं को स्पष्ट तौर पर बताने को कहा गया है। जिलों से मिलने वाली यह रिपोर्ट आवेदन स्वरूप में पार्टी कार्यालय को सौंपी गई है, जिसे अब शीर्ष स्तर पर जांचा जा रहा है।


हार की वजहों में ‘भीतरघात’ और ‘जातीय असंतुलन’ प्रमुख

पार्टी को मिले कई रिपोर्ट के अनुसार, कुछ सीटों पर जातीय समीकरण ठीक तरह से साधे नहीं जा सके। कई जगहों से यह भी कहा गया है कि उम्मीदवार को स्थानीय जातीय आधार का पर्याप्त समर्थन नहीं मिल सका, जिसका सीधा असर चुनाव परिणामों पर पड़ा। रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि कई प्रत्याशी ‘भीतरघात’ का शिकार हुए। पार्टी कार्यकर्ताओं में सामंजस्य की कमी और समूहबाजी जैसी स्थितियां कई सीटों पर निर्णायक साबित हुईं।


कुछ जिलों से मिली जानकारी के अनुसार, कई सीटों पर पार्टी के आधिकारिक प्रत्याशियों के खिलाफ गठबंधन विरोधी गतिविधियां भी देखने को मिलीं। ऐसे मामलों में स्थानीय नेताओं पर आरोप लगे हैं कि उन्होंने चुनाव के दौरान सक्रिय भूमिका नहीं निभाई या विरोधी उम्मीदवारों को मौन सहयोग किया। इसके कारण कई सीटों पर जदयू को बेहद कम अंतर से हार झेलनी पड़ी।


कुछ सीटों पर प्रत्याशी चयन भी रहा विवादित

जिलों से आए फीडबैक में यह बात भी सामने आई है कि कई स्थानों पर प्रत्याशियों का चयन स्थानीय समीकरणों के अनुकूल नहीं था। कई पुराने कार्यकर्ताओं और क्षेत्रीय नेताओं ने यह दावा किया है कि योग्य, लोकप्रिय और जमीन से जुड़े नेताओं को टिकट नहीं मिला, जबकि बाहरी या कम लोकप्रिय चेहरों को मौका दिया गया। इससे कार्यकर्ताओं में असंतोष बढ़ा और इसका सीधा असर वोटिंग पैटर्न पर देखा गया।


कुछ विधानसभा क्षेत्रों में यह भी कहा गया है कि उम्मीदवारों की व्यक्तिगत छवि चुनाव जीतने लायक नहीं थी और इसका नुकसान पार्टी को उठाना पड़ा। कई रिपोर्टों में यह भी उल्लेख किया गया है कि प्रत्याशियों ने चुनाव अभियान के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों या बूथ स्तर पर पर्याप्त पकड़ नहीं बनाई, जिससे वोटों का बिखराव हुआ।


मुख्यालय ने बुलाई समीक्षा बैठक, 6 दिसंबर को संभावित

इन सभी मुद्दों की गहन समीक्षा के लिए जदयू प्रदेश मुख्यालय में बड़ी बैठक बुलाने की तैयारी चल रही है। सूत्रों के अनुसार, यह बैठक अगले महीने की 6 तारीख को होने की संभावना है। इसमें विधानसभा प्रभारी, जिला अध्यक्ष, संगठन के प्रमुख पदाधिकारी और संबंधित क्षेत्रों के प्रतिनिधि शामिल होंगे।


इस बैठक में प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र की रिपोर्ट बारीकी से पढ़ी जाएगी और जिम्मेदारियों का निर्धारण भी किया जाएगा। पार्टी नेतृत्व यह समझना चाहता है कि एनडीए के मजबूत माहौल के बावजूद जदयू कुछ सीटों पर जीत दर्ज क्यों नहीं कर सकी। यह भी तय माना जा रहा है कि भीतरघात या अनुशासनहीनता से जुड़े मामलों में सख्त कार्रवाई की जा सकती है।


एनडीए के भीतर ‘एंटी-इंकम्बेंसी’ और स्थानीय मुद्दे भी सामने आए

कई जगहों पर जनता में एंटी-इंकम्बेंसी फैक्टर भी देखने को मिला। जदयू की रिपोर्ट में कहा गया है कि कुछ सरकारी योजनाओं का लाभ समय पर नहीं पहुंचने या स्थानीय समस्याओं के समाधान में देरी ने भी विरोधी लहर को बढ़ावा दिया। सड़क, पानी, स्वास्थ्य और रोजगार से जुड़े मुद्दे कई इलाकों में बड़े चुनावी फैक्टर बने।


कुछ जिलों से मिली जानकारी के अनुसार, गठबंधन साझेदारों के बीच भी समन्वय कमजोर रहा। कई स्थानों पर भाजपा, जदयू और अन्य घटक दलों की संयुक्त रणनीति ठीक से नहीं बन पाई, जिसका फायदा विपक्ष ने उठाया।


गठबंधन विरोधी गतिविधियों पर विशेष समीक्षा

जदयू कार्यालय में आयोजित समीक्षा बैठक का मकसद सिर्फ हार की वजहें जानना नहीं, बल्कि उन शिकायतों की जांच करना भी है जिनमें गठबंधन विरोधी गतिविधियों के आरोप लगे हैं। विधानसभा चुनाव के दौरान कई जगहों से शिकायतें आई थीं कि पार्टी के अंदर ही कुछ नेता विरोधियों के समर्थन में सक्रिय थे या उन्होंने आधिकारिक उम्मीदवार की उपेक्षा की।


चुनावी प्रक्रिया से जुड़ी इन शिकायतों का रिकॉर्ड प्रदेश कार्यालय में मौजूद है और समीक्षा बैठक के दौरान इन्हें सबूतों के साथ रखा जाएगा। इस आधार पर दोषियों के खिलाफ कार्यवाही का फैसला लिया जा सकता है।


अगले चुनावों की रणनीति का होगा खाका तैयार

जदयू नेतृत्व का मानना है कि 2025 के चुनाव परिणाम आने वाले वर्षों की राजनीतिक दिशा तय करेंगे। इसलिए हार के कारणों को समझना और दूर करना पार्टी के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। आगामी बैठक में पार्टी अगले चुनावों के लिए नई रणनीति, संगठनात्मक सुधार और बूथ स्तर पर मजबूत नेटवर्क बनाने पर चर्चा करेगी।

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Tejpratap

FirstBihar न्यूज़ डेस्क

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