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Bihar Election 2025 : तेजस्वी और राहुल से आगे निकले CM नीतीश कुमार, बढ़ सकती है महागठबंधन की टेंशन; आधी आबादी को लेकर तैयार हुआ ख़ास प्लान

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में एनडीए ने महिलाओं को महागठबंधन से ज्यादा तवज्जो दी है। एनडीए के पांच दलों ने कुल 34 महिलाओं को टिकट दिया है, जबकि महागठबंधन के सात दलों ने मिलकर केवल 31 महिलाओं को मैदान में उतारा है।

Bihar Election 2025 : तेजस्वी और राहुल से आगे निकले CM नीतीश कुमार, बढ़ सकती है महागठबंधन की टेंशन; आधी आबादी को लेकर तैयार हुआ ख़ास प्लान
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Bihar Election 2025 : बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में महिलाओं की भागीदारी को लेकर दिलचस्प आंकड़े सामने आए हैं। आबादी के अनुपात में महिलाओं को भले ही पर्याप्त टिकट न मिले हों, लेकिन एनडीए ने इस बार महागठबंधन की तुलना में महिलाओं को ज्यादा तवज्जो दी है। एनडीए के पांच घटक दलों ने कुल 34 महिलाओं को चुनावी मैदान में उतारा है, जबकि महागठबंधन के सात दलों ने मिलकर मात्र 31 महिलाओं को ही टिकट दिया है।


गौर करने वाली बात यह है कि महागठबंधन 254 सीटों पर चुनाव लड़ रहा है, जबकि एनडीए 243 सीटों पर। इसके बावजूद एनडीए में महिलाओं को टिकट देने का अनुपात बेहतर है। संख्या के लिहाज से हालांकि राजद ने सबसे ज्यादा 23 महिला उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है।


भाजपा और जदयू ने बराबर उतारीं 13-13 महिलाएं

एनडीए की बात करें तो भाजपा और जदयू दोनों 101-101 सीटों पर चुनाव लड़ रही हैं। दोनों ही दलों ने समान संख्या में यानी 13-13 महिलाओं को चुनावी मैदान में उतारा है। इसके अलावा लोजपा (रामविलास) ने 29 सीटों में से पांच महिलाओं को टिकट दिया है। वहीं हम (हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा) के हिस्से में आई छह सीटों में से दो पर महिलाएं मैदान में हैं। खास बात यह है कि ये दोनों उम्मीदवार पार्टी के संरक्षक और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी के परिवार से हैं।Nरालोमो (राष्ट्रीय लोकमत मोर्चा) को भी छह सीटें मिली हैं, जिनमें से एक पर महिला उम्मीदवार को मौका दिया गया है, जो पार्टी सुप्रीमो उपेंद्र कुशवाहा की पत्नी हैं।


महागठबंधन में राजद सबसे आगे, पर कुल संख्या कम

महागठबंधन की बात करें तो राजद ने सबसे अधिक 24 महिलाओं को टिकट दिया था, लेकिन मोहनियां सीट से प्रत्याशी श्वेता सुमन का नामांकन रद्द होने के बाद अब 23 महिलाएं ही राजद के सिम्बल पर चुनाव लड़ रही हैं। कांग्रेस, जो 61 सीटों पर चुनाव लड़ रही है, ने केवल पांच महिलाओं को मैदान में उतारा है। वहीं सीपीआई (एमएल) ने 20 सीटों में से एक सीट दीघा से महिला प्रत्याशी उतारी है। भाकपा और माकपा ने इस बार किसी महिला को टिकट नहीं दिया है। इसके अलावा वीआईपी और आईआईपी ने एक-एक महिला को टिकट दिया है।

सीटों का ब्योरा

एनडीए में महिलाओं की स्थिति:

जदयू – 101 सीटों में से 13 महिलाएं

भाजपा – 101 सीटों में से 13 महिलाएं

लोजपा (आर) – 29 सीटों में से 5 महिलाएं

हम – 6 सीटों में से 2 महिलाएं

रालोमो – 6 सीटों में से 1 महिला

➡️ कुल: 243 सीटों में 34 महिलाएं


महागठबंधन में महिलाओं की स्थिति:

राजद – 143 में 23 महिलाएं

कांग्रेस – 61 में 5 महिलाएं

सीपीआई (एमएल) – 20 में 1 महिला

वीआईपी – 14 में 1 महिला

सीपीआई – 9 में 0

माकपा – 4 में 0

आईआईपी – 3 में 1 महिला

➡️ कुल: 254 सीटों में 31 महिलाएं


अब तक के चुनावों में महिलाओं की स्थिति

आजादी से लेकर अब तक बिहार विधानसभा चुनावों में महिलाओं की स्थिति बहुत मजबूत नहीं रही है। अब तक मात्र 285 महिलाएं ही चुनाव जीतकर सदन तक पहुंच पाई हैं। 1972 में 45 महिलाएं मैदान में थीं, लेकिन कोई नहीं जीती। 1977 में 96 में से 13, 1980 में 77 में से 11,1985 में 103 में से 15, 1990 में 147 में से 10 महिलाएं जीतीं। 1995 में 263 में से 11, 2000 में 189 में से 19, फरवरी 2005 में 234 में से केवल 3, अक्टूबर 2005 में 138 में से 25 महिलाएं विजयी हुईं। 2010 में 307 में से 34, 2015 में 273 में से 28,और 2020 के चुनाव में रिकॉर्ड 370 महिलाएं मैदान में थीं, जिनमें से 26 जीतकर विधानसभा पहुंचीं।


बिहार में महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी लगातार बढ़ रही है, लेकिन टिकट वितरण में अभी भी बड़ा लैंगिक अंतर दिखता है। इस बार भी एनडीए ने महिलाओं को महागठबंधन से कुछ बेहतर अवसर दिया है, फिर भी यह अनुपात “आधी आबादी” के अनुरूप नहीं कहा जा सकता। महिलाओं की वास्तविक राजनीतिक सशक्तिकरण के लिए दलों को सिर्फ प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि वास्तविक प्रतिनिधित्व की दिशा में ठोस कदम उठाने की जरूरत है।

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Tejpratap

FirstBihar न्यूज़ डेस्क

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