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Mokama Vidhan Sabha : जानिए मोकामा में कैसी शुरू हुई खुनी संघर्ष की कहानी, पियूष और अनंत की भिडंत में दुलारचंद की हत्या से कितना बदल सकता है समीकरण

Mokama Vidhan Sabha : बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण की वोटिंग से पहले मोकामा में बाहुबली टकराव ने माहौल गर्मा दिया है। अनंत सिंह और पीयूष प्रियदर्शी के समर्थकों की झड़प में दुलारचंद यादव की गोली लगने से मौत हो गई।

Mokama Vidhan Sabha : जानिए मोकामा में कैसी शुरू हुई खुनी संघर्ष की कहानी, पियूष और अनंत की भिडंत में दुलारचंद की हत्या से कितना बदल सकता है समीकरण
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Mokama Vidhan Sabha : बिहार में विधानसभा चुनाव का ऐलान हो चुका है और राज्य में दो चरणों में वोटिंग कराई जाएगी। पहले चरण का मतदान 6 नवंबर को होना है। इसी चरण में आने वाली मोकामा विधानसभा सीट एक बार फिर सुर्खियों में है। यह सीट पहले से ही बाहुबली नेताओं की वजह से चर्चा में रहती है, लेकिन इस बार मामला और गंभीर हो गया है क्योंकि यहां चुनावी प्रचार के दौरान फायरिंग और हत्या की घटना सामने आई है।


चुनावी प्रचार के बीच मची अफरातफरी

जानकारी के अनुसार, मोकामा के तारतार इलाके में जदयू प्रत्याशी एवं बाहुबली पूर्व विधायक अनंत सिंह और जन सुराज पार्टी के प्रत्याशी पीयूष प्रियदर्शी का काफिला आमने-सामने आ गया। बताया जाता है कि अनंत सिंह का काफिला तारतार से समयागढ़ की ओर जा रहा था, जहां वे एक कार्यक्रम में शामिल होने वाले थे। इसी दौरान सामने से पीयूष प्रियदर्शी अपने समर्थकों के साथ रोड शो कर रहे थे। दोनों काफिले आमने-सामने हो गए और गाड़ियां रुक गईं।


स्थानीय लोगों के मुताबिक, जब अनंत सिंह ने पीयूष प्रियदर्शी से गाड़ी पीछे लेने को कहा, तो उनके समर्थक अड़ गए। दोनों पक्षों में बहसबाजी हुई, जिसके बाद स्थिति बिगड़ गई। जातिसूचक शब्दों और गाली-गलौज के बीच मारपीट शुरू हो गई और एक समर्थक को थप्पड़ भी जड़ दिया गया। इसके बाद पीयूष प्रियदर्शी के समर्थकों ने पत्थरबाजी शुरू कर दी। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि गोलियां चलने लगीं।


गोलीबारी और दुलारचंद यादव की मौत

फायरिंग के दौरान जन सुराज समर्थक और कुख्यात हिस्ट्रीशीटर दुलारचंद यादव को गोली लग गई। बताया जा रहा है कि गोली उनके पैर में लगी, लेकिन इसी दौरान वे नीचे गिर गए और उन पर एक गाड़ी चढ़ गई। इसके बाद उनकी मौत हो गई। हालांकि, पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत का असली कारण स्पष्ट हो सकेगा।


दुलारचंद के परिजनों का आरोप है कि उनकी हत्या अनंत सिंह के इशारे पर हुई। मृतक के पोते ने पुलिस को दिए बयान में कहा कि गोली अनंत सिंह के समर्थकों ने चलाई थी। इस आधार पर पुलिस ने अनंत सिंह समेत पांच लोगों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज की है। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में तनाव फैल गया, और पुलिस बल की भारी तैनाती की गई है।


अनंत सिंह और पीयूष प्रियदर्शी के अलग-अलग दावे

अनंत सिंह का कहना है कि जब यह बवाल हुआ, तब वे लगभग 30 गाड़ियां आगे थे। उनके काफिले की 10 गाड़ियां पीछे रह गई थीं, जिन पर हमला हुआ। उन्होंने दावा किया कि दुलारचंद यादव ने पहले झगड़ा शुरू किया और उनके लोगों पर रोड़ेबाजी की। अनंत सिंह ने आरजेडी प्रत्याशी वीणा देवी के पति और बाहुबली सूरजभान सिंह पर भी साजिश का आरोप लगाया। हालांकि सूरजभान सिंह ने इस विवाद पर कुछ भी कहने से इनकार कर दिया।


समीकरणों पर असर

मोकामा में यह सवाल उठ रहा है कि दुलारचंद हत्याकांड से चुनावी समीकरण किस हद तक बदलेंगे। टाल क्षेत्र के लोगों के मुताबिक, दुलारचंद यादव का प्रभाव एक सीमित जाति वर्ग, यानी यादव समाज में था। जबकि यादव वोट पहले से ही आरजेडी के समर्थन में रहे हैं। अनंत सिंह के लिए बड़ा खतरा धानुक समाज के वोट में सेंध लगना है। माना जा रहा है कि धानुक वोटर, जो अब तक अनंत सिंह के साथ थे, इस घटना के बाद पीयूष प्रियदर्शी या सूरजभान सिंह के खेमे में जा सकते हैं। अनुमान है कि यह वोट बैंक लगभग 10 से 15 हजार तक का है।


मोकामा का बाहुबली राजनीति से गहरा रिश्ता

मोकामा विधानसभा और उसके आसपास का क्षेत्र बाहुबलियों का गढ़ माना जाता है। अनंत सिंह का यहां दशकों से दबदबा रहा है। वे लगातार पांच बार विधायक रह चुके हैं। उनके जेल जाने के बाद उनकी पत्नी नीलम देवी ने यह सीट संभाली। अब अनंत सिंह खुद जदयू के टिकट पर फिर मैदान में हैं। दूसरी ओर, आरजेडी के सूरजभान सिंह भी बड़े बाहुबली माने जाते हैं। अनंत सिंह के भाई दिलीप सिंह और सूरजभान के बीच 90 के दशक में खूनी संघर्ष हुआ था।


दुलारचंद यादव भी इसी बाहुबली राजनीति का हिस्सा रहे हैं। वे आरजेडी से लंबे समय तक जुड़े रहे और लालू प्रसाद यादव के करीबी माने जाते थे। उन पर हत्या, अपहरण, रंगदारी, और जमीन कब्जे जैसे कई गंभीर मामले दर्ज थे।


माहौल तनावपूर्ण, जांच जारी

घटना के बाद मोकामा और उसके आसपास का माहौल बेहद तनावपूर्ण है। पुलिस ने इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी है और वरिष्ठ अधिकारी लगातार स्थिति पर नजर रखे हुए हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही यह साफ होगा कि दुलारचंद यादव की मौत गोली लगने से हुई या गाड़ी चढ़ने से।


फिलहाल, इस घटना ने चुनावी माहौल को पूरी तरह बदल दिया है। एक तरफ कानून-व्यवस्था पर सवाल उठे हैं, तो दूसरी तरफ जातिगत और बाहुबली समीकरण भी नए सिरे से बनते दिख रहे हैं। मोकामा की यह लड़ाई अब सिर्फ वोटों की नहीं, बल्कि साख और शक्ति की लड़ाई बन गई है।

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Tejpratap

रिपोर्टर / लेखक

Tejpratap

FirstBihar न्यूज़ डेस्क

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