Bihar Election 2025 : बिहार विधानसभा चुनाव 2025 का माहौल अब पूरी तरह गर्म हो चुका है। एनडीए और महागठबंधन दोनों ही मोर्चों पर अब चुनावी गतिविधियां तेज़ हो गई हैं। आज से बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह दोनों ही चुनाव प्रचार में उतर रहे हैं, जिससे प्रदेश की राजनीति और भी रोचक होती जा रही है।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आज सरायरंजन और बहादुरपुर में चुनावी सभाएं करेंगे। जेडीयू की ओर से यह नीतीश कुमार का पहला बड़ा प्रचार कार्यक्रम होगा। पार्टी ने पहले ही उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी है और अब नीतीश कुमार खुद मैदान में उतरकर अपने उम्मीदवारों के पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश करेंगे। जेडीयू ने इस बार सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए टिकट वितरण किया है, जिसमें लव-कुश, यादव, और दलित समाज को खास तरजीह दी गई है।
वहीं दूसरी ओर, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह आज से तीन दिनों (16 से 18 अक्टूबर) के लिए बिहार के दौरे पर रहेंगे। शाह के इस दौरे को भाजपा के चुनावी अभियान की रीढ़ माना जा रहा है। बिहार बीजेपी ने उनके आगमन से पहले ही अपने सभी 101 उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। पार्टी ने एक के बाद एक तीन लिस्ट जारी कर सभी प्रत्याशियों के नामों पर मुहर लगा दी।
बिहार बीजेपी अध्यक्ष दिलीप जायसवाल ने बताया कि 15 से 18 अक्टूबर तक एनडीए के सभी प्रत्याशी नामांकन दाखिल करेंगे। इस दौरान केंद्र सरकार के कई मंत्री, बिहार सरकार के वरिष्ठ नेता और एनडीए के घटक दलों के शीर्ष नेता नामांकन कार्यक्रमों में शामिल होंगे। अमित शाह इस दौरे में न केवल रैलियों को संबोधित करेंगे, बल्कि संगठनात्मक बैठकों के जरिए एनडीए की चुनावी रणनीति को भी मजबूती देंगे।
सूत्रों के मुताबिक, अमित शाह का फोकस इस बार भाजपा के मजबूत बूथ नेटवर्क पर रहेगा। वे हर जिले में कार्यकर्ताओं को यह संदेश देंगे कि भाजपा का लक्ष्य सिर्फ सीट जीतना नहीं, बल्कि वोट शेयर बढ़ाना है। शाह के भाषणों में केंद्र सरकार की योजनाओं और मोदी सरकार की उपलब्धियों का उल्लेख प्रमुख रूप से रहेगा।
पहले चरण के नामांकन की आखिरी तारीख 17 अक्टूबर है, ऐसे में अमित शाह का यह दौरा बेहद अहम माना जा रहा है। शाह की रैलियों के बाद माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी बिहार में कई चुनावी सभाएं करेंगे। साथ ही भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री भी बिहार में एनडीए के प्रत्याशियों के समर्थन में रैलियां करेंगे।
बिहार की राजनीतिक जमीन पर अब दोनों ही गठबंधन – एनडीए और महागठबंधन – पूरी ताकत के साथ उतर चुके हैं। एक ओर नीतीश कुमार की “सुशासन” की छवि को भुनाने की कोशिश हो रही है, वहीं अमित शाह भाजपा की चुनावी मशीनरी को गति देने में जुट गए हैं। आने वाले कुछ दिन बिहार की सियासत के लिए निर्णायक साबित हो सकते हैं।






