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काहे की शराबबंदी..? एक्साइज के इंस्पेक्टर-दारोगा 'अपहरणकर्ता’ और 'सुपरिटेंडेंट' बने संरक्षण दाता ! 2.10 लाख की वसूली के खुलासे के बाद शपथ पत्र का खेल, इससे 'वसूली गैंग' के पाप धूल जाएंगे ?

जहानाबाद में उत्पाद विभाग के अधिकारियों पर दो युवकों से 2.10 लाख रुपये की अवैध वसूली का गंभीर आरोप लगा है। पीड़ितों की शिकायत के बाद पूरी राशि वापस...शपथ पत्र देकर शिकायत वापस लेने से मामले पर कई सवाल खड़े हो गए हैं।

1st Bihar Published by: Viveka Nand Updated Jun 16, 2026, 2:20:53 PM

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- फ़ोटो self

Bihar News: बिहार में शराब वाले विभाग की हालत बेहद खराब है. उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग के अधिकारी आमलोगों को प्रताड़ित कर वसूली कर रहे. वसूली गैंग में सिपाही से लेकर दारोगा-इंस्पेक्टर और अधीक्षक तक शामिल हैं. बक्सर के बाद अब जहानाबाद के उत्पाद अधिकारियों की पोल खुली है. हालांकि मैनेज करने के खेल में जहानाबाद उत्पाद के दारोगा-इंस्पेक्टर और अधीक्षक बेनकाब हो गए हैं। 

टॉर्चर के बाद 2.10 लाख की हुई थी वसूली

घटना 9 मार्च 2026 की है. जहानाबाद उत्पाद अफसरों ने दो लोगों को पकड़कर टॉर्चर किया, इसके बाद 2.10 लाख की वसूली की. पीड़ित ने जहानाबाद के जिलाधिकारी से शिकायत कर दी. साथ ही पीड़ित के पिता ने बयान जारी कर उत्पाद विभाग के अफसरों के कारनामों को सामने ला दिया. उन्होंने बताया कि हमने जहानाबाद के उत्पाद अधीक्षक दिलीप पाठक से शिकायत की. इसके बाद जिलाधिकारी के पास पहुंचे. जिलाधिकारी ने अधीक्षक को इस मामले में या तो पैसा वापस करे या फिर आगे की कार्रवाई करने को कहा. बताया जाता है कि शिकायत के बाद अधीक्षक जहानाबाद ने मैनेज करने का काम शुरू किया. खुद पीड़ित अम्पू कुमार के पिता मिथिलेश सिंह ने बयान दिया था कि, मैडम के आदेश पर पहले 1.50 लाख वापस किया गया इसके बाकी का 60 हजार. इस तरह से रिहाई के बदले वसूली गई राशि कुल 2 लाख 10 हजार रू वापस किया गया. 

शपथ पत्र देने से वसूली गैंग का पाप धूल जाएगा ? 

इसके बाद शिकायत वापस लेने का खेल रचा गया. लिहाजा शिकायतकर्ता दोनों पीड़ितों ने कार्यपालक दंडाधिकारी के समक्ष शपथ पत्र कर शिकायत वापस लेने की गुहार लगाई. शपथ पत्र में पीड़ित अम्पू कुमार और श्यामसुंदर शर्मा ने बयान दिया कि हम लोगों ने उत्पाद विभाग के निरीक्षक मुकेश कुमार, अवर निरीक्षक रणजीत सिंह, सहायक अवर निरीक्षक संतोष कुमार एवं सहायक अवर निरीक्षक नरदीप सिंह पर मारपीट करने एवं 2 लाख 10 हजार रुपया लेने के संबंध में शिकायत किया था . यह सत्य नहीं है. दरअसल, हम लोग सख्त जांच के कारण आवेश में आकर उक्त आवेदन को दिया था. उक्त आवेदक को हम लोग स्वेच्छा से बिना किसी दबाव में वापस ले रहे हैं.

खेल में दारोगा से लेकर अधीक्षक तक शामिल 

सवाल है कि एक बार आवेदन देकर उसे वापस लिया जा सकता है ? जब आपने और आपके पिता ने स्पष्ट तौर पर कहा कि 2.10 लाख की जबरन वसूली की गई. जब हमने शिकायत तो उत्पाद अधीक्षक के हस्तक्षेप से पैसा वापस हुआ। ऐसे में शपथ पत्र देने से उत्पाद विभाग के अधिकारियों का पाप धूलता नहीं.  इस पूरे खेल में एक बात स्पष्ट तौर पर दिख रहा, जहानाबाद उत्पाद के वरीय अधिकारी अधीक्षक भी खेल में शामिल हैं. क्या वसूली का पैसा वापस कराने से जुर्म माफ हो जाएगा ? सरकारी सेवकों ने जो कृत्य किया है, उन पर सख्त कानूनी कार्रवाई नहीं होनी चाहिए ? पैसा की वसूली करने वालों को बचाने वाले क्या कम जिम्मेदार हैं ? 

जानें पूरा मामला.....

नालंदा के इस्लामपुर थाना क्षेत्र के मनीचक के रहने वाले अम्पू कुमार और श्याम सुंदर शर्मा द्वारा जिलाधिकारी जहानाबाद से  लिखित शिकायत की गई थी. जिसमें आरोप लगाया था कि उत्पाद विभाग की टीम ने 2 लाख 10 हजार रू लेकर हमलोगों को छोड़ा है. आवेदन में कहा गया कि 9 मार्च को अम्पू कुमार और श्याम सुंदर शर्मा दोनों गया से इस्लामपुर की तरफ जा रहे थे. जहानाबाद के हुलासगंज के चौहरमल चौक के पास उत्पाद विभाग के अधिकारी वाहन की जांच कर रहे थे. जब उनकी गाड़ी वहां पहुंची तो इन लोगों ने गाड़ी रोका और चाबी छीन लिया. साथ ही दोनों का मोबाइल भी ले लिया. इसके बाद सहायक अवर निरीक्षक संतोष कुमार एवं निरीक्षक मुकेश कुमार गाली गलौज और मारपीट करने लगे. श्याम सुंदर शर्मा के पैकेट में रखे ₹60000 निकाल लिया गया. इसके बाद मारपीट करते हुए साहू बीघा नहर पर ले जाकर अम्पू कुमार से ₹100000 की मांग की गई. अम्पू ने मोबाइल नंबर 77620 ##### से 82921 ##### पर कॉल कर ₹100000 अपने पिता को लाने को कहा. अम्पू के पिताजी द्वारा साहू बीघा नहर पर लाकर मद्य निषेध विभाग के निरीक्षक मुकेश कुमार को उक्त राशि दी गई। अवर निरीक्षक रणजीत सिंह के द्वारा वीडियो बनाया गया जिसमें हमको कहा गया कि जैसा बोलेंगे वैसा ही बोलना है. इसके बाद हमने (अम्पू) उस वीडियो में कहा कि मारपीट नहीं किया गया है, न हीं पैसे का लेनदेन किया गया है. यह कहवाकर गाड़ी की चाबी और मोबाइल दे दिया गया.

जब तक 2.10 वसूला नहीं एक को बिठाये रखा

आवेदन में आगे लिखा गया है कि इसके बाद भी श्याम सुंदर शर्मा को गिरफ्तार कर रखा गया था. इनके छोड़ने की एवज में ₹50000 की मांग की गई. अम्पू ने अपने घर से ₹50000 लाकर सिहीं पेट्रोल पंप से आगे सहायक अवर निरीक्षक नवदीप सिंह को दिया. इस तरह से कुल मिलाकर 2 लाख 10 हजार रुपए दिया गया, तब जाकर श्याम सुंदर शर्मा को छोड़ा गया.

पीड़ित के पिता बोले- शिकायत के बाद पूरा पैसा वापस किया गया

पीड़ित अम्पू कुमार के पिता मिथिलेश सिंह ने इस घटना के बाद जहानाबाद के उत्पाद अधीक्षक के पास 12 मार्च को शिकायत लेकर पहुंच गए। उन्होंने कहा कि 9 मार्च को मेरे बेटे के साथ उत्पाद थाना के थानाध्यक्ष व अन्य कर्मियों ने जबरन 2 लाख 10 हजार रू लिए हैं. इसके बाद अधीक्षक दिलीप पाठक ने कहा कि आप लिखित में दीजिए। अगले दिन ये आवेदन लेकर डीएम के पास पहुंच गए। आवेदक अम्पू के पिता ने बताया कि 13 तारीख को मैडम को आवेदन दिए। तब मैडम ने अधीक्षक को कहा कि इनका पैसा वापस लौटवाइए, नहीं तो कार्रवाई करें. इशके बाद डेढ़ लाख रू लौटाया गया, फिर पूरा पैसा 2 लाख 10 हजार रू लौटाया गया.

क्या कहते हैं जहानाबाद के उत्पाद अधीक्षक 

जहानाबाद उत्पाद के थानाध्यक्ष व अन्य कर्मियों के कृत्य पर अधीक्षक दिलीप कुमार पाठक ने कहा कि उनके पास यह मामला आया था. इसके बाद वे अम्पू कुमार के पिता को लेकर डीएम के पास गए थे. मामले में जांच कराई गई है, लेकिन जांच रिपोर्ट उन तक नहीं आई है. जांच रिपोर्ट के लिए 3-4 दिन पहले पत्राचार किया गया है. उत्पाद अधीक्षक से पूछा गया कि कार्रवाई के डर से आपके दारोगा और इंस्पेक्टर ने वसूली गई राशि 2.10 लाख रू वापस किया है, इसकी जानकारी आपको भी है, आपके समक्ष की राशि वापसी हुई है ? इस पर उन्होंने कहा कि पैसा की वापसी मेरे समक्ष नहीं हुआ है. हालांकि अधीक्षक का बयान ही बहुत कुछ इशारा कर रहा था.