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Success Story: छोटे से गांव का लड़का बना IAS अधिकारी, AI की मदद से पढ़ाई कर UPSC में लहराया परचम

Success Story: अगर मेहनत और लगन से परिश्रम किया जाए, तो सफलता तय होती है। यह बात उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले के छोटे से गांव 'उत्रावली' के रहने वाले विभोर भारद्वाज ने सच कर दिखाई है. जानें... सफलता की कहानी.

Success Story
सफलता की कहानी
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Viveka Nand
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Success Story: अगर मेहनत और लगन से परिश्रम किया जाए, तो सफलता तय होती है। यह बात उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले के छोटे से गांव 'उत्रावली' के रहने वाले विभोर भारद्वाज ने सच कर दिखाई है। देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक, यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन (UPSC) सिविल सर्विसेज एग्जाम को पास कर उन्होंने न केवल अपने गांव का नाम रोशन किया, बल्कि लाखों युवाओं को यह भी दिखा दिया कि बड़े सपने देखने की कोई सीमा नहीं होती।


विभोर ने 2022 में UPSC परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक (AIR) 743 हासिल की थी। हालांकि, उनका सपना सिर्फ परीक्षा पास करना नहीं था। उनकी नजर टॉप रैंक पर थी। 2023 में वह इंटरव्यू तक पहुंचे, लेकिन फाइनल लिस्ट में जगह नहीं बना सके। इस असफलता ने उन्हें तोड़ा नहीं, बल्कि और मजबूत बनाया। उन्होंने खुद की कमियों का विश्लेषण किया, रणनीति को निखारा, और अंततः 2024 में AIR 19 हासिल कर एक नया इतिहास रच दिया।


विभोर ने दिल्ली विश्वविद्यालय के हंसराज कॉलेज से फिजिक्स में MSc किया। जहां ज्यादातर लोग UPSC के लिए पारंपरिक विषयों को चुनते हैं, वहीं विभोर ने फिजिक्स को ही ऑप्शनल सब्जेक्ट के रूप में लिया। यह फैसला जोखिम भरा था, लेकिन उनके गहरे समझ और मेहनत ने इसे सही साबित किया।


उन्होंने केवल सात महीनों में UPSC मेन्स का पूरा सिलेबस कवर किया। इस दौरान वे ऑनलाइन कोचिंग, डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और खुद के बनाए नोट्स पर निर्भर रहे। उनके मुताबिक, स्मार्ट स्टडी और टाइम मैनेजमेंट ही सफलता की कुंजी हैं।


प्रीलिम्स की तैयारी को उन्होंने T-20 मैच की तरह लिया तेज, सटीक और केंद्रित। जनवरी से उन्होंने स्टैटिक पोर्शन, करंट अफेयर्स की मैग्जीन और डेली न्यूज़ समरी पर पूरा ध्यान केंद्रित किया। मॉक टेस्ट को क्रिकेट प्रैक्टिस की तरह शेड्यूल किया पहले सेक्शनल टेस्ट्स, फिर फुल लेंथ टेस्ट्स। पिछले साल के प्रश्नपत्र (PYQs) उनके अनुसार UPSC के माइंडसेट को समझने की खिड़की हैं।


UPSC इंटरव्यू किसी भी कैंडिडेट के लिए चुनौतीपूर्ण होता है। विभोर ने इस स्टेज के लिए AI टूल्स जैसे Google Gemini का इस्तेमाल किया। ये टूल्स उनके लिए एक सख्त टीचर की तरह थे। बार-बार सवाल पूछते और कमजोरियों को उजागर करते। इसके जरिए उन्होंने न केवल अपने जवाबों को निखारा, बल्कि कॉन्फिडेंस भी बढ़ाया।


2023 में फाइनल लिस्ट में नाम न आने के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी। विभोर ने अपनी तैयारी का पोस्टमॉर्टम किया। एसे राइटिंग, टाइम मैनेजमेंट, इंटरव्यू स्किल्स को और धार दी। उनका कहना है कि अगर आप हर असफलता को एक सीख के रूप में लें, तो अगली बार जीत आपकी होगी।


विभोर की कहानी सिर्फ एक रैंक की नहीं, बल्कि उस जिद और हौसले की है जो कहती है। 'सपने वो नहीं जो नींद में आएं, बल्कि वो जो सोने न दें।' गांव की कच्ची सड़कों से निकलकर देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षा में टॉप करना किसी आम इंसान के बस की बात नहीं लगती, लेकिन विभोर ने यह मुमकिन कर दिखाया। उनकी मेहनत, रणनीतिक सोच और तकनीक के सही इस्तेमाल से यह सीख मिलती है कि अगर इरादे मजबूत हों, तो कोई भी मंजिल दूर नहीं।

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रिपोर्टर / लेखक

Viveka Nand

FirstBihar न्यूज़ डेस्क

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