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Success Story: IAS प्रतीक्षा सिंह बिहार से क्यों चली गईं...? आईएएस बनने तक की संघर्ष भरी कहानी जानिए...

Success Story: IAS प्रतीक्षा सिंह की कहानी से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे बच्चों को सीख लेने की जरूरत है. एक साधारण परिवार से आने वाली प्रतीक्षा ने UPSC के सफर में कई चुनौतियों का सामना किया, दो बार असफल भी रही,लेकिन हार नहीं मानीं.

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IAS प्रतीक्षा सिंह की फाईल फोटो
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Viveka Nand
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Success Story: बिहार कैडर की एक आईएएस अधिकारी अब उत्तर प्रदेश कैडर की अधिकारी हो गई हैं. उन्होंने अपना कैडर चेंड करा लिया. इस वजह से 2024 लास्ट में सुर्खियों में रहीं. IAS प्रतीक्षा सिंह ने UPSC परीक्षा में 52वीं रैंक हासिल कर साबित कर दिया था कि असफलताओं से सीखकर आगे बढ़ने वाले ही असली विजेता होते हैं.

आईएस प्रतीक्षा सिंह के कैरियर सफर प्रयागराज, उत्तर प्रदेश से शुरू हुआ. इनका परिवार गाजियाबाद के साहिबाबाद में रहता है. उनके पिता शिक्षक हैं, मां गृहिणी और भाई सॉफ्टवेयर इंजीनियर. एक साधारण परिवार में जन्मी प्रतीक्षा के सपने साधारण नहीं थे. वह प्रशासनिक सेवा में जाना चाहती थीं. 2019 में अपनी मास्टर डिग्री पूरी करने के बाद, उन्होंने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की तैयारी शुरू की. उनका पहला प्रयास 2020 में था, जिसमें उन्होंने प्रीलिम्स और मेंस पास कर लिया, लेकिन इंटरव्यू में सफल नहीं हो पाईं. 2021 में, वह प्रीलिम्स भी क्लियर नहीं कर पाई थीं. लेकिन इसी साल उन्होंने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) की PCS परीक्षा पास कर ली और 7वीं रैंक के साथ डिप्टी कलेक्टर बनीं. इसके बाद इके हौसले में चार चांद लग गया. ये रूकी नहीं, लगातार आगे बढ़ते गईं. इनके ऊपर IAS बनने का भूत सवार था. एसडीएम की जिम्मेदारियों के साथ, उन्होंने अपनी UPSC की तैयारी जारी रखी. 2022 में, उनके प्रयासों ने रंग दिखाया और उन्होंने 52वीं रैंक के साथ UPSC परीक्षा पास कर ली.

15 अप्रैल 2024 को उनकी पहली नियुक्ति बिहार के बक्सर जिले में प्रोबेशनरी ऑफिसर  के रूप में हई. लेकिन उन्होंने बाद में उत्तर प्रदेश कैडर में स्थानांतरण की मांग की, जो स्वीकार कर ली गई. बिहार सरकार ने 2024 के लास्ट में इन्हें उप्र कैडर के लिए विरमित कर दिया. इसके पीछे एक बड़ी वजह यह रही कि इनके पति उत्तर प्रदेश कैडर में IPS हैं.

IAS प्रतीक्षा सिंह की यह सफलता हर उस युवा के लिए प्रेरणा है, जो असफलताओं से घबराकर अपने सपनों को छोड़ने की सोचते हैं. उनकी कहानी हमें सिखाती है कि मेहनत और लगन से कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है.  

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Viveka Nand

FirstBihar न्यूज़ डेस्क

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