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Success Story: चार बार फेल होने के बाद भी नहीं टूटे हौसले, कठिन परिश्रम कर 5वीं बार में बनीं UPSC टॉपर!

Success Story: अक्सर छात्र JEE एडवांस्ड और UPSC CSE जैसी प्रतिष्ठित परीक्षाओं को पास करने का सपना देखते हैं, उनके लिए अनुश्री सचान की कहानी एक प्रेरणा है. जानें...

Success Story
सफलता की कहानी
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Viveka Nand
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Success Story: अक्सर छात्र JEE एडवांस्ड और UPSC CSE जैसी प्रतिष्ठित परीक्षाओं को पास करने का सपना देखते हैं, उनके लिए अनुश्री सचान की कहानी एक प्रेरणा है। कठिन चुनौतियों और कई प्रयासों के बावजूद अनुश्री ने न केवल IIT जैसी तकनीकी संस्था में प्रवेश पाया, बल्कि देश की सबसे कठिन परीक्षा UPSC सिविल सेवा परीक्षा (CSE) में भी शानदार सफलता अर्जित की।


26 वर्षीय अनुश्री सचान मूल रूप से लखनऊ की रहने वाली हैं। उन्होंने कक्षा 10 तक की पढ़ाई सिटी मोंटेसरी स्कूल, कानपुर रोड से की और कक्षा 12वीं की तैयारी के लिए कोटा चली गईं, जहाँ उन्होंने जय पब्लिक स्कूल से परीक्षा उत्तीर्ण की। अनुश्री का परिवार हमेशा से उनकी पढ़ाई में सहयोगी रहा। उनके पिता BSNL में डिविजनल इंजीनियर हैं और मां एक गृहिणी हैं। उनका छोटा भाई भी वर्तमान में IIT गुवाहाटी से बीटेक कर रहा है। जब अनुश्री कोटा में पढ़ रही थीं, तो उनका पूरा परिवार उनके साथ रहने के लिए वहीं शिफ्ट हो गया—पहले मां और भाई, फिर पिता भी।


जानकारी के मुताबिक, 2017 में अनुश्री ने JEE एडवांस्ड पास कर IIT बॉम्बे में दाखिला लिया और वहाँ से केमिस्ट्री में BS डिग्री प्राप्त की। इसके बाद उन्हें जर्मनी की टेक्निकल यूनिवर्सिटी, म्यूनिख से रिसर्च के लिए ऑफर मिला, लेकिन COVID-19 के चलते वह इसे आगे नहीं बढ़ा सकीं। IIT से ग्रेजुएशन के बाद उन्हें एक प्राइवेट बैंक से जॉब ऑफर भी मिला, जिसे उन्होंने ठुकरा दिया क्योंकि उनका लक्ष्य हमेशा से सिविल सेवा में योगदान देना था।


अनुश्री ने चार बार UPSC CSE में प्रयास किया। पहले दो प्रयासों (2021 और 2023) में वह प्रीलिम्स परीक्षा पास नहीं कर सकीं। तीसरे प्रयास में (2022) उन्होंने AIR 633 हासिल की। हालांकि यह भी एक बड़ी उपलब्धि थी, लेकिन अनुश्री इससे संतुष्ट नहीं थीं। अपने चौथे प्रयास (2024) में अनुश्री ने न केवल सफलता प्राप्त की, बल्कि ऑल इंडिया रैंक 220 हासिल कर यह सिद्ध कर दिया कि धैर्य, अनुशासन और समर्पण के साथ कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं।


अनुश्री ने साझा किया कि असफल प्रयासों से उन्होंने सीखा कि सिर्फ पढ़ना ही काफी नहीं, बल्कि उत्तर लेखन (Answer Writing) की निरंतर प्रैक्टिस, मॉक टेस्ट सीरीज, और पिछले सालों के प्रश्न पत्र हल करना अत्यंत आवश्यक है। उनका डेली रूटीन काफी अनुशासित था—वह हर दिन 10 घंटे पढ़ाई करती थीं, और प्रेरणा की कमी होने पर भी उन्होंने अपने रूटीन को नहीं छोड़ा। उन्होंने कहा, “डिसिप्लिन, पेशेंस और कंसिस्टेंसी ही मेरी सफलता के तीन स्तंभ रहे।”


जब उनसे पूछा गया कि कठिन समय में उन्होंने फोकस कैसे बनाए रखा, तो अनुश्री ने बताया कि उन्हें बैडमिंटन खेलना बहुत पसंद है, जिससे उन्हें तनाव से राहत मिलती थी और ध्यान केंद्रित रहता था। अब जब अनुश्री ने UPSC CSE में सफलता प्राप्त कर ली है, उनका उद्देश्य एक जिम्मेदार और संवेदनशील सिविल सेवक बनना है। वह शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण विकास जैसे क्षेत्रों में योगदान देना चाहती हैं।

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Viveka Nand

FirstBihar न्यूज़ डेस्क

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