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कौन हैं IPS तृप्ति भट्ट? पुलिस ऑफिसर बनने के लिए छोड़ी 16 सरकारी नौकरियां; जानिए.. कैसे बनीं सफलता और प्रेरणा की मिसाल

Success Story: आईपीएस अधिकारी तृप्ति भट्ट की कहानी प्रेरणा का स्रोत है। इंजीनियरिंग की पढ़ाई और सरकारी नौकरियों के बावजूद उन्होंने यूपीएससी की कठिन राह चुनी और आज जेल प्रशासन सहित उत्तराखंड में अपर सचिव गृह व कारगार की जिम्मेदारी संभाल रही हैं।

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Mukesh Srivastava
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Success Story: आईपीएस अधिकारी तृप्ति भट्ट की कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो बड़े लक्ष्य रखते हैं लेकिन रास्ते में मिलने वाली सुरक्षित सुविधाओं के कारण कदम पीछे खींच लेते हैं। तृप्ति ने साबित कर दिया कि अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और इरादा मजबूत हो, तो कोई भी फैसला गलत नहीं होता।


प्रारंभिक जीवन और प्रेरणा

तृप्ति भट्ट का जन्म एक शिक्षकों के परिवार में हुआ, जहां पढ़ाई और अनुशासन को सबसे अधिक महत्व दिया जाता था। नौवीं कक्षा में ही उन्हें पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम से मिलने का अवसर मिला। इस मुलाकात में डॉ. कलाम ने उन्हें एक हस्तलिखित पत्र दिया, जिसमें देशसेवा और मेहनत का संदेश था। यह पत्र उनके जीवन की दिशा बदलने वाला साबित हुआ।


सुरक्षित करियर के बावजूद बड़े सपनों का पीछा

इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद तृप्ति को एनटीपीसी में सहायक प्रबंधक की नौकरी मिली। इसके अलावा उन्हें आईएसआरओ समेत करीब 16 सरकारी संस्थानों से नौकरी के प्रस्ताव आए। यह एक सुरक्षित और सम्मानजनक करियर था, लेकिन तृप्ति का सपना इससे बड़ा था। उन्होंने तय किया कि वे देश के लिए सीधे काम करना चाहती हैं। इसी सोच के साथ उन्होंने सभी नौकरियों को छोड़कर यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी।


यूपीएससी में सफलता और IPS बनने की यात्रा

2013 में, तृप्ति ने अपने पहले प्रयास में यूपीएससी परीक्षा पास की और 165वीं रैंक हासिल की। इस रैंक के साथ वे आईएएस भी बन सकती थीं, लेकिन उन्होंने भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) को चुना। उनका मानना था कि पुलिस सेवा के जरिए वे समाज पर तुरंत और सीधे प्रभाव डाल सकती हैं।


IPS अधिकारी के रूप में उपलब्धियां

आज तृप्ति भट्ट एक सफल आईपीएस अधिकारी हैं और जेल प्रशासन, आपदा प्रबंधन और सुरक्षा की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाल रही हैं। उनके संवेदनशील और प्रभावशाली कार्य की प्रशासनिक और सामाजिक स्तर पर काफी सराहना होती है। उत्तराखंड सरकार ने उन्हें हाल ही में अपर सचिव गृह व कारगार की जिम्मेदारी भी सौंपी है।


खेल और शारीरिक सक्रियता में दक्षता

प्रशासनिक कार्यों के साथ-साथ तृप्ति भट्ट खेलों में भी सक्रिय रही हैं। वे मैराथन में गोल्ड मेडल जीत चुकी हैं, राज्य स्तर की बैडमिंटन खिलाड़ी रह चुकी हैं और ताइक्वांडो व कराटे में भी प्रशिक्षित हैं। तृप्ति भट्ट की कहानी यह संदेश देती है कि अगर हौसला और लक्ष्य स्पष्ट हों, तो कोई भी रास्ता मुश्किल नहीं।

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Mukesh Srivastava

FirstBihar न्यूज़ डेस्क

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