Success Story: सिविल सेवा परीक्षा (UPSC) पास करना कोई आसान काम नहीं है। हर साल लाखों युवा इस परीक्षा के माध्यम से देश की सर्वोच्च प्रशासनिक सेवाओं में जगह बनाने का सपना देखते हैं। इन्हीं सपनों की भीड़ में एक नाम जो वास्तव में प्रेरणादायक बनकर उभरा है, वह है राजस्थान के भरतपुर की रहने वाली दीपेश कुमारी का। उन्होंने कठिन परिस्थितियों के बावजूद जो संघर्ष और सफलता हासिल की है, वह हर संघर्षशील छात्र के लिए मिसाल है।
दीपेश के पिता गोविंद पंडित सड़क किनारे चाट बेचते थे, और आर्थिक स्थिति बेहद साधारण थी। पांच भाई-बहनों में सबसे बड़ी दीपेश बचपन से ही पढ़ाई में अव्वल रही हैं। उन्होंने शिशु आदर्श विद्या मंदिर से स्कूली शिक्षा पूरी की। 10वीं कक्षा में उन्होंने 98% अंक, जबकि 12वीं में 89% अंक हासिल किए। इसके बाद उन्होंने सिविल इंजीनियरिंग में रुचि के चलते जोधपुर के एक कॉलेज में दाखिला लिया और फिर कड़ी मेहनत कर IIT बॉम्बे से M.Tech की डिग्री प्राप्त की।
दीपेश ने 2019 में UPSC की तैयारी शुरू की। शुरुआत में एक कोचिंग सेंटर जॉइन किया, लेकिन कोरोना महामारी के कारण उन्हें घर लौटना पड़ा। वहां उन्होंने स्वअध्ययन (self-study) से अपनी तैयारी जारी रखी। बिना सुविधाओं के, सीमित संसाधनों के बीच उन्होंने जो संघर्ष किया, वो उनकी मजबूत इच्छाशक्ति को दर्शाता है। अंततः 2021 की UPSC परीक्षा में उन्होंने शानदार प्रदर्शन कर All India Rank 93 हासिल की और अपने परिवार व क्षेत्र का नाम रोशन किया।
आज दीपेश न केवल एक IAS अधिकारी हैं, बल्कि उन्होंने यह सिद्ध कर दिया है कि मेहनत, धैर्य और समर्पण के साथ किसी भी परिस्थिति में सफलता पाई जा सकती है। उनकी कहानी उन सभी युवाओं को प्रेरणा देती है जो सामाजिक या आर्थिक चुनौतियों से गुजर रहे हैं, लेकिन बड़े सपने देखना और उन्हें साकार करना नहीं छोड़ते।





