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बिहार का IAS पावर कपल: पहले खुद IAS बने, फिर पत्नी को बनाया अधिकारी, जानिए.. सूर्य प्रताप सिंह और कल्पना रावत की सफलता की कहानी

UPSC Success Story: बिहार के IAS पावर कपल सूर्य प्रताप सिंह और कल्पना रावत की UPSC सफलता की प्रेरक कहानी। पति-पत्नी ने मिलकर संघर्ष और मेहनत से सफलता हासिल की।

UPSC Success Story
UPSC सक्सेस स्टोरी
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Mukesh Srivastava
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UPSC Success Story: यूपीएससी की दुनिया में कई प्रेरक कहानियां हैं, लेकिन IAS सूर्य प्रताप सिंह और उनकी पत्नी कल्पना रावत की कहानी ‘साझा संघर्ष’ की मिसाल है। यह सिर्फ दो अधिकारियों की सफलता नहीं, बल्कि एक ऐसे हमसफर की कहानी है, जिसने अपनी पत्नी के सपनों को अपनी आँखों से देखा और उन्हें पूरा करने में सहयोग किया।


उत्तर प्रदेश के बरेली निवासी सूर्य प्रताप सिंह ने साल 2021 में 258वीं रैंक के साथ यूपीएससी में सफलता पाई। वर्तमान में वह बिहार के समस्तीपुर जिले में डिप्टी डेवलपमेंट कमिश्नर यानी DDC के पद पर तैनात हैं।सूर्य प्रताप सिंह की पत्नी कल्पना रावत हरियाणा के सोनीपत की रहने वाली हैं।


कल्पना के लिए आईएएस अफसर बनने का सफर किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं था। लगातार चार असफलताओं के बाद उन्होंने हार मानने का मन बना लिया था, तब उनके पति सूर्य प्रताप सिंह उनके ‘सारथी’ बने। सरकारी आवास में फाइलों के बीच सूर्य प्रताप ने कल्पना के लिए नोट्स तैयार किए और उन्हें हर वो तकनीक सिखाई, जो एक टॉपर के लिए जरूरी होती है।


कल्पना रावत का जन्म हरियाणा के सोनीपत जिले के जज्जल गांव में हुआ और परवरिश दिल्ली के नजफगढ़ में हुई। बचपन से ही बहुमुखी प्रतिभा की धनी कल्पना ने स्कूल में हाउस कैप्टन के रूप में नेतृत्व दिखाया और NSS की सदस्य रही। उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी के दौलत राम कॉलेज से पॉलिटिकल साइंस में स्नातक की डिग्री प्राप्त की।


सूर्य प्रताप सिंह ने यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा के साथ ही कंबाइंड डिफेंस सर्विस की फ्लाइंग ब्रांच में चयन पाया था। हैदराबाद में ट्रेनिंग के दौरान गंभीर चोट के कारण उन्हें साल 2017 में ट्रेनिंग छोड़नी पड़ी। कल्पना रावत ने अपने पांचवें प्रयास में 2023 में सफलता पाई और UPSC 2024 में 78वीं रैंक हासिल की। उनके परिणाम उनके पति की तुलना में बेहतर थे। ट्रेनिंग के बाद वह भी आईएएस अफसर बनेंगी।


सूर्य प्रताप सिंह अपनी सख्त कार्यशैली और विकास कार्यों के लिए जाने जाते हैं। समस्तीपुर से पहले वे सासाराम में एसडीएम रह चुके हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, अपनी व्यस्त ड्यूटी के बाद सूर्य प्रताप घर लौटकर कल्पना के लिए ‘पर्सनल कोच’ की भूमिका निभाते थे। उन्होंने कल्पना को उत्तर लेखन तकनीक सिखाई और कठिन विषयों पर घंटों चर्चा की। आज बिहार के प्रशासनिक गलियारों में यह जोड़ा रोल मॉडल बन चुका है। 

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रिपोर्टर / लेखक

Mukesh Srivastava

FirstBihar न्यूज़ डेस्क

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