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Banking and Digital Payment Rule: कहीं आपके अकाउंट से भी न कट जाए पैसा! 1 जनवरी से बदल जाएगा यह नियम; जान लें पूरी डिटेल

Banking and Digital Payment Rule: देश के बैंकिंग और डिजिटल पेमेंट सेक्टर में आने वाले समय में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। बैंक और डिजिटल वॉलेट कंपनियां अब अपनी मुफ्त सेवाओं को सीमित कर रही हैं और कई जरूरी...?

Banking and Digital Payment Rule
बैंकिंग और डिजिटल पेमेंट
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PRIYA DWIVEDI
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Banking and Digital Payment Rule: देश के बैंकिंग और डिजिटल पेमेंट सेक्टर में आने वाले समय में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। बैंक और डिजिटल वॉलेट कंपनियां अब अपनी मुफ्त सेवाओं को सीमित कर रही हैं और कई जरूरी सुविधाओं पर अतिरिक्त शुल्क लगाने की तैयारी में हैं। एटीएम से नकदी निकासी, क्रेडिट कार्ड के इस्तेमाल और डिजिटल वॉलेट में पैसे रखने तक पर ग्राहकों की जेब पर सीधा असर पड़ने वाला है। आने वाले वर्ष में ICICI बैंक और एयरटेल पेमेंट बैंक जैसे बड़े वित्तीय संस्थान नए सर्विस चार्ज लागू करने जा रहे हैं।


ICICI बैंक के क्रेडिट कार्ड और वॉलेट ट्रांजैक्शन होंगे महंगे

निजी क्षेत्र के प्रमुख बैंक ICICI ने अपनी नई चार्ज लिस्ट जारी की है, जो 15 जनवरी 2026 से प्रभावी होगी। नए नियमों के तहत यदि ग्राहक क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल गेमिंग ऐप्स पर करते हैं, तो ट्रांजैक्शन वैल्यू का 2 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क देना होगा। इसके अलावा, पेटीएम और मोबिक्विक जैसे थर्ड-पार्टी वॉलेट में 5,000 रुपये से अधिक की राशि लोड करने पर 1 प्रतिशत का सर्विस चार्ज लगाया जाएगा। वहीं, बैंक शाखा में जाकर नकद बिल भुगतान करने की फीस भी 100 रुपये से बढ़ाकर 150 रुपये कर दी गई है।


मनोरंजन और रिवॉर्ड पॉइंट्स पर भी कड़ी शर्तें

मनोरंजन से जुड़े ऑफर्स का लाभ लेने वाले ग्राहकों के लिए भी नियम सख्त किए गए हैं। 1 फरवरी 2026 से BookMyShow के जरिए मिलने वाले फ्री मूवी टिकट ऑफर सीमित कर दिए जाएंगे। अब यह सुविधा केवल उन्हीं ग्राहकों को मिलेगी, जिन्होंने पिछली तिमाही में कम से कम 25,000 रुपये का खर्च किया हो। इसके अलावा, रूबिक्स और सैफिरो जैसे प्रीमियम क्रेडिट कार्ड पर रिवॉर्ड पॉइंट्स अर्जित करने के लिए हर महीने न्यूनतम 20,000 रुपये की खरीदारी अनिवार्य कर दी गई है।


एयरटेल पेमेंट बैंक वॉलेट पर लगेगा सालाना मेंटेनेंस चार्ज

डिजिटल वॉलेट का इस्तेमाल अब पूरी तरह मुफ्त नहीं रहा। एयरटेल पेमेंट बैंक ने 1 जनवरी 2026 से अपने वॉलेट यूजर्स पर 75 रुपये (प्लस जीएसटी) का वार्षिक मेंटेनेंस चार्ज लगाने का फैसला किया है। यदि किसी ग्राहक के वॉलेट में पर्याप्त बैलेंस नहीं होगा, तो उपलब्ध राशि काट ली जाएगी और शेष रकम भविष्य में बैलेंस जुड़ते ही स्वतः डेबिट हो जाएगी। विशेषज्ञों के अनुसार यह कदम डिजिटल पेमेंट कंपनियों के बढ़ते ऑपरेशनल खर्च को कवर करने के लिए उठाया गया है।


डिजिटल वॉलेट का बदलता स्वरूप, मुफ्त सेवाओं का दौर खत्म

भारत में डिजिटल वॉलेट की शुरुआत वर्ष 2004 में ऑक्सीजन वॉलेट से हुई थी, जिसे 2010 के बाद PAYTM ने लोकप्रिय बना दिया। शुरुआती दौर में ये सेवाएं पूरी तरह मुफ्त थीं, लेकिन समय के साथ बिजनेस मॉडल बदलता गया। 2021 से मोबिक्विक ने इनएक्टिव वॉलेट पर शुल्क लगाना शुरू किया, जिसके बाद अन्य कंपनियों ने भी KYC, कार्ड से पैसे लोड करने और ट्रांजैक्शन पर 1.5 प्रतिशत तक सर्विस चार्ज वसूलना शुरू कर दिया। इससे साफ संकेत मिलता है कि अब डिजिटल ट्रांजैक्शन की लागत का बोझ सीधे उपभोक्ताओं पर डाला जा रहा है।


ग्रामीण बैंकों का कायाकल्प: ‘एक राष्ट्र, एक पहचान’ की दिशा में कदम

ग्रामीण बैंकिंग को मजबूत करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने एक अहम पहल की है। देश के सभी 28 क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (RRBs) को अब एक समान पहचान दी जाएगी। वित्त मंत्रालय और नाबार्ड द्वारा इन बैंकों के लिए एक नया ‘एकीकृत लोगो’ जारी किया गया है। इस लोगो में तीन स्तरों वाली ऊपर उठती लौ विकास, ज्ञान और ग्रामीण सशक्तीकरण का प्रतीक है, जबकि हाथ का चिन्ह ग्राहकों के संरक्षण और भरोसे को दर्शाता है। सरकार का मानना है कि इस कदम से ग्रामीण बैंकिंग व्यवस्था में विश्वास बढ़ेगा और सेवाओं में एकरूपता आएगी।

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रिपोर्टर / लेखक

PRIYA DWIVEDI

FirstBihar न्यूज़ डेस्क

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