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BIHAR NEWS : 'सबकी अपनी-अपनी तानाशाही और हनक ...', खुलासा करने वाले पत्रकार के घर छापेमारी पर घिरी सरकार, राजद ने उठाए गंभीर सवाल, कहा - सवाल पूछने वालों को प्रताड़ित किया जा रहा

हाजीपुर में पत्रकार के घर शराबबंदी कानून के तहत हुई छापेमारी अब राजनीतिक मुद्दा बन गई है। राजद ने आरोप लगाया है कि भ्रष्टाचार की खबर उजागर करने वाले पत्रकार को निशाना बनाया गया। आखिर क्या है पूरा मामला? पढ़िए पूरी रिपोर्ट।

1st Bihar Published by: First Bihar Updated Jun 18, 2026, 1:53:05 PM

BIHAR NEWS : 'सबकी अपनी-अपनी तानाशाही और हनक ...', खुलासा करने वाले पत्रकार के घर छापेमारी पर घिरी सरकार, राजद ने उठाए गंभीर सवाल, कहा - सवाल पूछने वालों को प्रताड़ित किया जा रहा

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पटना/हाजीपुर: वैशाली जिले के हाजीपुर में एक पत्रकार के घर शराबबंदी कानून के तहत हुई छापेमारी को लेकर बिहार की राजनीति गरमा गई है। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने इस मामले को लेकर राज्य सरकार और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्टी ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट जारी कर दावा किया कि भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों को उजागर करने वाले पत्रकारों को दबाने की कोशिश की जा रही है।


राजद ने पोस्ट करते हुए लिखा है कि - " CM तो CM! DM साहब भी कम नहीं! सबकी अपनी अपनी तानाशाही! अपना अपना हनक! बिहार में अफसरशाही की यह पराकाष्ठा है कि वैशाली DM कार्यालय के रसोइया बहाली में भ्रष्टाचार की खबर उजागर करने वाले पत्रकार के घर अचानक पहुंची मद्यनिषेध पुलिस बल!शराब सेवन का आरोप लगाकर करना चाहती थी गिरफ्तार!लेकिन पत्रकार शराब नही पीता था! 


आप आम नागरिक हैं, आपका काम केवल वोट देना है और अपने छोटे-मोटे योगदान से बिहार के अफसर और BJP JDU के सत्तारूढ़ नेताओं को अपने-अपने भ्रष्टाचार के द्वारा अमीर बनाना है, उनका भ्रष्टाचार और अहंकार सहते जाना है!सवाल करोगे तो आपको दबाया जाएगा, बेवजह परेशान किया जाएगा!






दरअसल, यह मामला हाजीपुर के राजेंद्र चौक स्थित एक किराए के मकान का है, जहां मंगलवार देर रात उत्पाद विभाग और नगर थाना पुलिस की संयुक्त टीम ने छापेमारी की। जानकारी के अनुसार करीब 10 बजे पांच वाहनों में पहुंचे अधिकारियों ने पत्रकार मनीष कुमार सिंह के घर की तलाशी ली। हालांकि जांच के दौरान पत्रकार का ब्रेथ एनालाइजर टेस्ट किया गया, जिसमें अल्कोहल की मात्रा शून्य पाई गई। इसके बावजूद पूरी कार्रवाई को लेकर अब कई सवाल उठ रहे हैं।


पत्रकार मनीष कुमार सिंह का कहना है कियह कार्रवाई प्रशासन के भ्रष्टाचार को लगातार उजागर करने के प्रतिशोध में की गई है। जबकि उनके परिवार में किसी भी सदस्य द्वारा नशा नहीं किया जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि देर रात उनके घर पहुंचकर पुलिस और उत्पाद विभाग की टीम ने परिवार के सदस्यों के सामने पूरे घर की तलाशी ली। उस समय उनकी पत्नी और बच्चे घर में मौजूद थे और परिवार के अधिकांश सदस्य सो रहे थे। पत्रकार का कहना है कि जांच में कुछ भी आपत्तिजनक नहीं मिलने के बावजूद उन्हें और उनके परिवार को मानसिक रूप से परेशान किया गया।


राजद नेताओं का कहना है कि यदि कोई पत्रकार प्रशासनिक गड़बड़ियों को उजागर करता है तो उसके खिलाफ इस तरह की कार्रवाई गंभीर चिंता का विषय है। पार्टी ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि यदि छापेमारी गलत सूचना के आधार पर की गई थी तो जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होनी चाहिए।


वहीं, अब घटना को आधार बनाकर राजद ने सरकार और प्रशासन पर हमला बोला है। पार्टी ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि- बिहार में अफसरशाही अपनी चरम सीमा पर पहुंच गई है। राजद का आरोप है कि वैशाली डीएम कार्यालय में रसोइया बहाली से जुड़े कथित भ्रष्टाचार की खबर उजागर करने वाले पत्रकार को निशाना बनाया गया। पार्टी ने दावा किया कि शराब सेवन का आरोप लगाकर पत्रकार को गिरफ्तार करने की कोशिश की गई, लेकिन जांच में आरोप गलत साबित हो गया।


राजद ने अपने पोस्ट में तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि बिहार में आम नागरिकों की भूमिका केवल वोट देने तक सीमित कर दी गई है। पार्टी का आरोप है कि जो लोग भ्रष्टाचार या प्रशासनिक अनियमितताओं पर सवाल उठाते हैं, उन्हें विभिन्न तरीकों से दबाने और परेशान करने का प्रयास किया जाता है। राजद ने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों और प्रेस की स्वतंत्रता पर हमला बताया है।


वहीं दूसरी ओर प्रशासन की ओर से अभी तक इस मामले में विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि यह स्पष्ट है कि शराबबंदी कानून के तहत की जाने वाली कार्रवाई और उसके दायरे को लेकर एक बार फिर बहस शुरू हो गई है। विपक्ष इस घटना को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और पत्रकारों की सुरक्षा से जोड़कर देख रहा है, जबकि प्रशासनिक पक्ष का इंतजार किया जा रहा है। फिलहाल हाजीपुर में हुई यह छापेमारी सिर्फ एक कानूनी कार्रवाई नहीं बल्कि राजनीतिक और प्रशासनिक जवाबदेही का बड़ा मुद्दा बन चुकी है। आने वाले दिनों में सरकार और प्रशासन की प्रतिक्रिया इस पूरे विवाद की दिशा तय कर सकती है।