1st Bihar Published by: First Bihar Updated Jul 12, 2026, 11:31:12 AM
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Bihar News: रोहतास जिले में नाबालिग बच्ची से दुष्कर्म के बाद हत्या के बहुचर्चित मामले में अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है. अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश-7 की अदालत ने मामले के एकमात्र दोषी बलिराम सिंह को फांसी की सजा सुनाई है. अदालत ने इस जघन्य अपराध को ‘दुर्लभतम श्रेणी’ (Rarest of Rare) का मामला मानते हुए कहा कि ऐसे अपराध समाज की अंतरात्मा को झकझोर देते हैं और इनके लिए कठोरतम दंड आवश्यक है. साथ ही न्यायालय ने पीड़िता की मां को 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने का भी आदेश दिया है.
अभियोजन पक्ष के अनुसार, यह घटना 15 नवंबर 2020 की है. आरोप है कि बलिराम सिंह ने गांव की करीब 10 वर्षीय बच्ची को खिलौना देने का झांसा देकर अपने घर बुलाया. वहां उसने बच्ची के साथ दुष्कर्म किया और पहचान उजागर होने के डर से उसकी हत्या कर दी. वारदात के बाद आरोपी ने शव को घर में रखे एक काठ के बक्से में छिपा दिया और खुद गांव के दूसरे स्थान पर जाकर छिप गया.
बच्ची के लापता होने के बाद परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की. इसी दौरान गांव के एक व्यक्ति ने पुलिस को बताया कि उसने घटना वाले दिन बच्ची को आरोपी के साथ जाते हुए देखा था. इस सूचना के आधार पर पुलिस ने आरोपी के घर की तलाशी ली, जहां काठ के बक्से से बच्ची का शव बरामद हुआ. इसके बाद आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किया गया.
मामले की सुनवाई के दौरान विशेष लोक अभियोजक हीरा प्रताप सिंह की ओर से अदालत में कुल 11 गवाहों के बयान दर्ज कराए गए. इसके अलावा पुलिस द्वारा जुटाए गए वैज्ञानिक और परिस्थितिजन्य साक्ष्य भी पेश किए गए. अदालत ने सभी साक्ष्यों, गवाहों के बयान और मामले की परिस्थितियों का गहन परीक्षण करने के बाद बलिराम सिंह को दोषी करार दिया.
सजा सुनाते हुए न्यायालय ने कहा कि पीड़िता की कम उम्र, अपराध की क्रूरता और आरोपी के अमानवीय व्यवहार को देखते हुए यह मामला दुर्लभतम श्रेणी में आता है. इसलिए दोषी को मृत्युदंड दिया जाना न्याय और समाज दोनों के हित में आवश्यक है.