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मोतिहारी शराब कांड में बड़ा खुलासा… 10 मौतों का ‘मास्टरमाइंड’ लखनऊ से दबोचा, गाजियाबाद से चलता था जहर का सिंडिकेट

Bihar News: बिहार के मोतिहारी में जहरीली शराब कांड के बाद हुए बड़े खुलासे में मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी के साथ उस खतरनाक और संगठित नेटवर्क की परतें खुलने लगी हैं, जिसने लालच में कई जिंदगियां तबाह कर दीं...

1st Bihar Published by: First Bihar Updated Apr 13, 2026, 11:08:45 AM

मोतिहारी शराब कांड में बड़ा खुलासा… 10 मौतों का ‘मास्टरमाइंड’ लखनऊ से दबोचा, गाजियाबाद से चलता था जहर का सिंडिकेट

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Bihar News: बिहार के मोतिहारी जिले में हुए दर्दनाक शराब कांड को लेकर अब एक बड़ा खुलासा सामने आया है। इस मामले में पुलिस ने जहरीली स्प्रिट सप्लाई करने वाले मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। इस गिरफ्तारी के साथ ही उस खतरनाक नेटवर्क की परतें भी खुलने लगी हैं, जिसने कुछ पैसों के लालच में कई जिंदगियां तबाह कर दीं।


जानकारी के मुताबिक, इस पूरे कांड के मास्टरमाइंड सतीश चंद्र चौधरी को लखनऊ से गिरफ्तार किया गया है। वह उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले का रहने वाला है और गाजियाबाद में फर्जी तरीके से स्प्रिट बनाने और सप्लाई करने का अवैध धंधा चला रहा था। पुलिस की जांच में सामने आया है कि उसी ने 31 मार्च को 85 बाल्टी जहरीली स्प्रिट बिहार भेजी थी, जो बाद में शराब के रूप में लोगों तक पहुंची।


यह जहरीली शराब मोतिहारी के तुरकौलिया और रघुनाथपुर थाना क्षेत्र में पहुंची, जहां इसके सेवन से देखते ही देखते हालात बेकाबू हो गए। इस जहरीले जाल में अब तक 10 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि दो दर्जन से अधिक लोग गंभीर रूप से बीमार हो गए। कई पीड़ितों की हालत इतनी खराब हुई कि उनकी आंखों की रोशनी तक चली गई, जिससे यह हादसा और भी भयावह बन गया।


पुलिस के अनुसार, गाजियाबाद में बैठकर सतीश चंद्र चौधरी “एसएस” नाम से एक फर्जी कंपनी के जरिए इस पूरे सिंडिकेट को चला रहा था। पूछताछ में उसने कबूल किया कि उसने कोटवा थाना क्षेत्र के सोवईया गांव निवासी लवकुश यादव को जहरीली स्प्रिट की खेप सौंपी थी। इसके बाद यह जहर कई हाथों से गुजरते हुए अलग-अलग शराब धंधेबाजों तक पहुंचा।


जांच में यह भी सामने आया है कि लवकुश यादव ने इस स्प्रिट को खलीफा यादव और कन्हैया यादव को बेचा। फिर इन लोगों ने इसे आगे नागा यादव, संजीत यादव, रुपेश यादव और जिम्बू बैंठा समेत अन्य लोगों में बांट दिया। इस तरह पूरा नेटवर्क संगठित तरीके से काम कर रहा था, जिसमें हर कड़ी एक-दूसरे से जुड़ी हुई थी।


इस कांड में जिन लोगों की मौत हुई है, उनके नाम सामने आने के बाद इलाके में शोक और आक्रोश का माहौल है। मृतकों में चंदू कुमार, प्रमोद यादव, सम्पत साह, लड्डू साह, परीक्षण मांझी, योद्धा मांझी, आलियास मियां, हरिलाल भगत, लालकिशोर राय और विनोद साह शामिल हैं। वहीं कई अन्य लोग अभी भी अस्पतालों में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं।


इस पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने विशेष जांच टीम का गठन किया था। एसपी स्वर्ण प्रभात के नेतृत्व में चल रही जांच में कई अहम सुराग मिले हैं, खासकर वित्तीय लेनदेन को लेकर। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन शामिल हैं और कितने समय से यह कारोबार चल रहा था।


गिरफ्तार आरोपी को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। वहीं, एसआईटी की टीम उत्तर प्रदेश के अलग-अलग इलाकों में लगातार छापेमारी कर रही है ताकि इस जहरीले कारोबार से जुड़े बाकी आरोपियों को भी जल्द से जल्द पकड़ा जा सके।