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Bankipur Assembly Seat : ठगी के आरोप में अरेस्ट हुई तेजप्रताप यादव की कैंडिडेट, बांकीपुर सीट से नामांकन पर्चा भरने के बाद पुलिस ने किया गिरफ्तार

पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट से JJD उम्मीदवार वीणा मानवी को नामांकन के बाद पुलिस ने गिरफ्तार किया। पुलिस ने बताया कि 2009 के 420 धोखाधड़ी मामले में कोर्ट के आदेश पर कार्रवाई की गई, जबकि वीणा मानवी ने इसे राजनीतिक साजिश बताया।

1st Bihar Published by: First Bihar Updated Jul 13, 2026, 1:52:44 PM

Bankipur Assembly Seat : ठगी के आरोप में अरेस्ट हुई तेजप्रताप यादव की कैंडिडेट, बांकीपुर सीट से नामांकन पर्चा भरने के बाद पुलिस ने किया गिरफ्तार

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Bankipur Assembly Seat :  बिहार विधानसभा चुनाव के बीच राजधानी पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ रहीं तेजप्रताप यादव की पार्टी जन जनवादी पार्टी (JJD) की प्रत्याशी वीणा मानवी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। नामांकन दाखिल करने के कुछ समय बाद हुई इस कार्रवाई से राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। गिरफ्तारी के बाद वीणा मानवी ने इसे राजनीतिक साजिश बताते हुए सीधे भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) पर निशाना साधा, जबकि पुलिस का कहना है कि गिरफ्तारी न्यायालय के आदेश पर की गई है और इसका संबंध वर्ष 2009 में दर्ज एक पुराने धोखाधड़ी के मामले से है।


जानकारी के अनुसार, वीणा मानवी ने बांकीपुर विधानसभा सीट से उपचुनाव के लिए अपना नामांकन दाखिल किया था। नामांकन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया और आवश्यक कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी। घटना की जानकारी मिलते ही राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया।


गिरफ्तारी के बाद मीडिया से बातचीत में वीणा मानवी ने खुद पर लगे आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि उन्होंने कोई अपराध नहीं किया है और यह कार्रवाई पूरी तरह राजनीतिक दबाव में की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव में हार की आशंका को देखते हुए उनके खिलाफ यह कदम उठाया गया है। वीणा मानवी ने कहा, "यह सब बीजेपी करवा रही है। मैंने कोई क्राइम नहीं किया है। चुनाव में हार के डर से मुझे फंसाया जा रहा है। जनता सब देख रही है और इसका जवाब चुनाव में देगी।"


दूसरी ओर, पुलिस ने इस मामले को पूरी तरह कानूनी कार्रवाई बताया है। संबंधित पुलिस अधिकारी के अनुसार, वीणा मानवी के खिलाफ वर्ष 2009 में धोखाधड़ी का मामला दर्ज हुआ था। इस मामले की एफआईआर संख्या 830/2009 है, जिसमें भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी) के तहत आरोप लगाए गए थे।


पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अदालत की ओर से जारी आदेश के अनुपालन में ही यह गिरफ्तारी की गई है। अधिकारी ने स्पष्ट किया कि इस कार्रवाई का चुनाव या किसी राजनीतिक गतिविधि से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने कहा कि जब किसी मामले में न्यायालय गिरफ्तारी का आदेश देता है, तब पुलिस का दायित्व उस आदेश का पालन करना होता है।


इस घटना के बाद राजनीतिक माहौल और गरमा गया है। विपक्षी दल इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित करने वाला कदम बता सकते हैं, जबकि प्रशासन का दावा है कि कानून सभी के लिए समान है और न्यायालय के आदेश का पालन करना पुलिस की संवैधानिक जिम्मेदारी है।


फिलहाल यह भी चर्चा का विषय बना हुआ है कि गिरफ्तारी के बाद वीणा मानवी की चुनावी प्रक्रिया पर क्या प्रभाव पड़ेगा। यदि उन्हें न्यायालय से राहत मिलती है तो वे चुनावी अभियान जारी रख सकती हैं, लेकिन यदि कानूनी प्रक्रिया लंबी चली तो इसका असर उनके चुनाव प्रचार पर पड़ सकता है।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव के दौरान किसी उम्मीदवार की गिरफ्तारी स्वाभाविक रूप से राजनीतिक बहस को जन्म देती है। हालांकि अंतिम फैसला न्यायालय की प्रक्रिया और उपलब्ध कानूनी तथ्यों के आधार पर ही होगा।


फिलहाल पुलिस ने वीणा मानवी को न्यायालय के समक्ष पेश करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। वहीं, उनकी पार्टी की ओर से इस कार्रवाई के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ने की बात कही जा रही है। अब सभी की नजर इस मामले में न्यायालय की अगली सुनवाई और चुनाव आयोग की आगे की प्रक्रिया पर टिकी हुई है।