Matuknath Choudhary: एक समय था जब पटना विश्वविद्यालय के प्रोफेसर मटुकनाथ चौधरी का नाम देशभर की सुर्खियों में बना रहता था। साल 2006 में अपनी छात्रा जूली के साथ चल रहे प्रेम-प्रसंग ने उन्हें ‘लव गुरु’ का तमगा दिलाया था। भारी विरोध, विवाद और बर्खास्तगी के बीच उनकी प्रेम कहानी ने इलेक्ट्रोनिक और प्रिंट मीडिया में खूब चर्चा बटोरी थी। जूली की तबीयत बिगड़ने के बाद मटुकनाथ ने अचानक मीडिया से दूरी बना ली थी लेकिन अब मटूकनाथ सोशल मीडिया पर एक्टिव हो गये हैं। वो लगातार सोशल मीडिया प्लेटफार्म फेसबुक पर पोस्ट लिख रहे हैं और लोगों का ध्यान आकृष्ट कर रहे हैं।
पिछले दिनों उन्होंने जो पोस्ट साझा किया था, उसने फिर से उन्हें चर्चा के केंद्र में ला दिया था। इस बार भी उन्होंने जो पोस्ट फेसबुक पर किया उसकी चर्चा होने लगी है। उन्होंने फेसबुक पर लव-सेक्स और क्राइम के बारे में लिखा है। कहा कि सेक्स सहज है, प्राकृतिक है, सर्वसुलभ है और सुंदर है. लेकिन इसी का गलत ढंग से इस्तेमाल हो तो क्राइम बन जाता है. गलत ढंग से इस्तेमाल तब होता है जब इसके सही इस्तेमाल पर प्रतिबंध लग जाता है.
एक लड़का और एक लड़की सेक्स संबंधी बातें करना चाहते हैं. वे सेक्स करना चाहते हैं. यहाँ पर परिवार, शिक्षालय और समाज का इतना ही कर्तव्य है कि इसके संबंध में पर्याप्त जानकारियां और सावधानियाँ उन दोनों तक पहुँचाकर उन्हें स्वतंत्र छोड दे. लेकिन ऐसा नहीं होता है. इसे गलत, खतरनाक और अनैतिक बताकर उन्हें इस दिशा में बढने से रोक दिया जाता है. लेकिन वे इस रोक के पीछे का कारण नहीं जानते. रोकना कितना गलत, अनैतिक और अप्राकृतिक है, यह नहीं जानते हैं. वे तो इतना ही जानते हैं कि समाज इसे गलत कहता है. क्यों कहता है समाज गलत, यह किसी को नहीं मालूम. इस अंध प्रतिबंध से चोरी -चोरी बतियाने और मिलने -जुलने का अवसर वे ढूँढते हैं. इस दबाव के वातावरण में मिलने की बेचैनी सामान्य से असामान्य हो जाती है. ऐसे में उपयुक्त पात्र के चुनाव का अवसर नहीं मिलता और गलत जगह संबंध स्थापित हो जाता है.
अच्छे और बुरे मनुष्य का मिलना सामान्य अवस्था में संभव नहीं होता, लेकिन गलत नैतिकता के दबाव में हो जाता है. इसी गलत संबंध का अगला चरण ब्लैकमेल है. कोई किसी का ब्लैकमेल क्यों करता है? इसलिए कि दूसरा नहीं चाहता है कि उसके यौन -संबंध को कोई अन्य जाने. जानेगा तो जीने नहीं देगा. अपमानित करेगा. तरह -तरह की यंत्रणाएँ देगा. यह क्राइम है. किसी के यौन संबंध को लेकर उसे बेइज्जत करना अपराध है. उसी तरह जैसे ब्लैकमेल करना अपराध है. बल्कि ब्लैकमेल से भी बडा अपराध है. क्योंकि ब्लैकमेल पैदा ही होता है सेक्स विरोध की मनोवृत्ति से. अगर सेक्स के बारे में बुरी धारणा न हो तो कोई किसी का किस आधार पर ब्लैकमेल करेगा? समझ रहे हैं न? जिस यौन नैतिकता को आप अच्छी चीज समझ रहे हैं, ब्लैकमेल जैसे अपराध की जडें वहीं गडी हुई हैं.
कुछ यौन अपराध ऐसे हैं जिसका निदान सेक्स की सहजता को स्वीकार कर किया जा सकता है. लेकिन कुछ अपराध ऐसे रह ही जायेंगे, जिन्हें दंड से ही नियंत्रित किया जा सकता है. जैसे कुछ लोग ऐसे जन्मजात हो सकते हैं जो युवा स्त्री सुलभ होने पर भी छोटी बच्ची के साथ बलात्कार करे. कुछ ऐसे जघन्य अपराधी भी हो सकते हैं जो बच्ची की हत्या कर दे. इनके लिए कठोर दंड -विधान ही निदान है. अगर सेक्स के सुख को बढाना है तो इसे प्रेम में बदलने का वातावरण बनाइए. अगर और आगे का आनंद चाहते हैं तो प्रेम को भक्ति में बदलने की परिस्थिति बनने दीजिए. काम राम तक की यात्रा बन सकता है. लेकिन इसका उल्टा ही हो रहा है. काम दुष्काम बन रहा है. नीचता की पराकाष्ठा को छू रहा है. कारण सिर्फ एक है काम के प्रति अज्ञान.



