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IAS Officer : कौन हैं IAS Alankrita Pandey? बंगाल कैडर छोड़ बनीं बिहार की DM, पति भी संभाल रहे पड़ोसी जिला

बिहार के प्रशासनिक फेरबदल में IAS अलंकृता पांडेय को भागलपुर का नया DM बनाया गया है, जबकि उनके पति IAS अंशुल अग्रवाल बांका के DM बने हैं। जानिए बंगाल कैडर से बिहार तक अलंकृता पांडेय के सफर और इस चर्चित IAS दंपत्ति की पूरी कहानी।

1st Bihar Published by: First Bihar Updated Jun 19, 2026, 8:15:35 AM

IAS Alankrita Pandey,

IAS Alankrita Pandey, - फ़ोटो file photo

IAS Officer : बिहार सरकार द्वारा किए गए हालिया प्रशासनिक फेरबदल के बाद कई अधिकारियों की नई जिम्मेदारियां चर्चा का विषय बनी हुई हैं। इनमें सबसे अधिक सुर्खियों में आईएएस अधिकारी अलंकृता पांडेय और उनके पति आईएएस अंशुल अग्रवाल हैं। राज्य सरकार ने अलंकृता पांडेय को भागलपुर का नया जिलाधिकारी नियुक्त किया है, जबकि उनके पति अंशुल अग्रवाल को बांका जिले का जिलाधिकारी बनाया गया है। दिलचस्प बात यह है कि भागलपुर और बांका दोनों एक-दूसरे से सटे हुए जिले हैं और एक ही प्रमंडल के अंतर्गत आते हैं।


इस नियुक्ति के बाद प्रशासनिक गलियारों में इस आईएएस दंपत्ति की खूब चर्चा हो रही है। लोग यह जानने को उत्सुक हैं कि आखिर मूल रूप से पश्चिम बंगाल कैडर की अधिकारी रही अलंकृता पांडेय बिहार में डीएम कैसे बनीं और उनका प्रशासनिक सफर कैसा रहा है।


पहले प्रयास में यूपीएससी पास कर बनीं आईएएस

अलंकृता पांडेय भारतीय प्रशासनिक सेवा की तेज-तर्रार और प्रतिभाशाली अधिकारियों में गिनी जाती हैं। उनका मूल निवास उत्तर प्रदेश के कानपुर शहर में है। उन्होंने अपनी शुरुआती शिक्षा पूरी करने के बाद मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एमएनआईटी), प्रयागराज से बीटेक की डिग्री हासिल की।


इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू की और अपने पहले ही प्रयास में संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा में सफलता हासिल की। वर्ष 2016 बैच की आईएएस अधिकारी अलंकृता पांडेय ने ऑल इंडिया रैंक 85 प्राप्त कर प्रशासनिक सेवा में प्रवेश किया था।


पश्चिम बंगाल कैडर से शुरू हुआ करियर

आईएएस बनने के बाद अलंकृता पांडेय को पश्चिम बंगाल कैडर आवंटित किया गया था। उन्होंने अपने शुरुआती प्रशासनिक कार्यकाल में पश्चिम बंगाल में विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर काम किया और अपनी कार्यशैली से पहचान बनाई। हालांकि बाद में उनका कैडर बदलकर बिहार हो गया, जिसके बाद उन्होंने बिहार प्रशासन में अपनी नई भूमिका निभानी शुरू की। बिहार में उन्होंने विभिन्न प्रशासनिक जिम्मेदारियों का निर्वहन किया और वर्तमान में जहानाबाद की जिलाधिकारी के रूप में कार्यरत थीं। अब राज्य सरकार ने उन्हें महत्वपूर्ण जिले भागलपुर की कमान सौंप दी है।


शादी के बाद बदला कैडर

अक्सर लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि किसी एक राज्य कैडर का अधिकारी दूसरे राज्य में कैसे सेवा दे सकता है। अलंकृता पांडेय का मामला इसी का एक उदाहरण है। दरअसल, उनके पति अंशुल अग्रवाल भी भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी हैं और बिहार कैडर से जुड़े हुए हैं। दोनों अधिकारियों के विवाह के बाद अलंकृता पांडेय ने अंतर-कैडर स्थानांतरण के लिए आवेदन किया। केंद्र सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) के नियमों के अनुसार यदि दो अखिल भारतीय सेवा अधिकारी अलग-अलग कैडर से संबंधित हों और उनका विवाह हो जाए, तो वे आपसी सहमति से किसी एक कैडर में स्थानांतरण का अनुरोध कर सकते हैं।

इस प्रक्रिया में संबंधित दोनों राज्य सरकारों और केंद्र सरकार की मंजूरी आवश्यक होती है। सभी आवश्यक औपचारिकताओं और अनुमतियों के बाद अलंकृता पांडेय का कैडर पश्चिम बंगाल से बदलकर बिहार कर दिया गया। यही वजह है कि आज वह बिहार कैडर की अधिकारी के रूप में कार्य कर रही हैं।


अंशुल अग्रवाल को मिली बांका की जिम्मेदारी

प्रशासनिक फेरबदल में आईएएस अंशुल अग्रवाल को बांका जिले का जिलाधिकारी नियुक्त किया गया है। अंशुल अग्रवाल भी बिहार प्रशासनिक तंत्र के प्रमुख अधिकारियों में माने जाते हैं और विभिन्न जिलों में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। उनकी कार्यशैली और प्रशासनिक अनुभव को देखते हुए सरकार ने उन्हें बांका जैसे महत्वपूर्ण जिले की जिम्मेदारी सौंपी है।


पड़ोसी जिलों की कमान संभालेगा आईएएस दंपत्ति

भागलपुर और बांका दोनों जिले भौगोलिक रूप से एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। यही कारण है कि एक ही आईएएस दंपत्ति का इन दोनों जिलों का नेतृत्व करना प्रशासनिक दृष्टि से एक अनूठी स्थिति माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों जिलों के बीच विकास योजनाओं, आधारभूत संरचना परियोजनाओं, कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक समन्वय को बेहतर बनाने में यह व्यवस्था मददगार साबित हो सकती है। साथ ही क्षेत्रीय स्तर पर सरकार की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में भी तेजी आने की संभावना जताई जा रही है।


बिहार की नौकरशाही में यह नियुक्ति सिर्फ एक प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि एक दिलचस्प उदाहरण भी है कि कैसे व्यक्तिगत और पेशेवर जीवन के बीच संतुलन बनाते हुए अधिकारी राज्य प्रशासन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। आने वाले दिनों में भागलपुर और बांका के विकास कार्यों पर इस आईएएस दंपत्ति की कार्यशैली का प्रभाव देखने को मिल सकता है।