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बिहार में जल संकट दूर करने की तैयारी, वाटर अथॉरिटी का होगा गठन; सम्राट सरकार का मेगा प्लान

Bihar News: बिहार सरकार नदियों के जल प्रबंधन के लिए नई ‘स्टेट वाटर रिसोर्स रिफॉर्म फ्रेमवर्क’ नीति तैयार कर रही है। इसके तहत डिजिटल मॉनिटरिंग, नया वाटर अथॉरिटी और भूजल सुधार पर काम होगा, जिससे किसानों और शहरों को लाभ मिलेगा।

1st Bihar Published by: FIRST BIHAR Updated Jun 27, 2026, 3:46:52 PM

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- फ़ोटो File

Bihar News: बिहार सरकार नदियों के पानी के बेहतर उपयोग और जल संसाधनों के प्रभावी प्रबंधन के लिए एक नई और आधुनिक नीति तैयार करने जा रही है। इसके तहत आम लोगों की भागीदारी बढ़ाने के साथ-साथ जल प्रबंधन प्रणाली को पूरी तरह डिजिटल और तकनीक आधारित बनाया जाएगा।


रिपोर्ट के अनुसार, राज्य सरकार मौजूदा नदियों से जुड़ी संस्थाओं की समीक्षा कर एक नया वाटर अथॉरिटी और अन्य आवश्यक संस्थान स्थापित करने पर भी विचार कर रही है। इसके लिए जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण विभाग द्वारा जल शक्ति मंत्रालय के सहयोग से ‘स्टेट वाटर रिसोर्स रिफॉर्म फ्रेमवर्क’ विकसित किया जा रहा है।


इस नीति का मुख्य उद्देश्य नदियों के जलस्तर की निगरानी और रिपोर्टिंग प्रणाली को आधुनिक बनाना है, ताकि बाढ़ और सूखे जैसी परिस्थितियों की समय पर सटीक जानकारी मिल सके और जान-माल के नुकसान को कम किया जा सके।


इस पूरी रूपरेखा को तैयार करने के लिए जल संसाधन विभाग के मुख्य अभियंता की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति गठित की गई है। इस समिति में योजना एवं मॉनीटरिंग अंचल-4 के अधीक्षण अभियंता को सदस्य सचिव बनाया गया है, जबकि लघु जल संसाधन, कृषि, पर्यावरण, नगर विकास, पीएचईडी और ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारियों को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है।


नई नीति में गिरते भूजल स्तर में सुधार और नदी जल डेटा को अधिक सटीक व उपयोगी बनाने पर विशेष जोर दिया जाएगा। साथ ही साक्ष्य आधारित नीति निर्माण को बढ़ावा देते हुए जल परियोजनाओं की डिजिटल मॉनिटरिंग की जाएगी, जिससे पुराने जल कानूनों को भी समयानुकूल बनाया जा सके।


इस योजना का सबसे बड़ा लाभ किसानों और शहरी क्षेत्रों को मिलने की उम्मीद है। नहरों के माध्यम से सिंचाई के लिए पानी का उचित वितरण सुनिश्चित किया जाएगा, ताकि किसानों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।


इसके अलावा औद्योगिक इकाइयों और शहरों को भी जल आपूर्ति का संतुलित प्रबंधन किया जाएगा। डैम में सेंसर आधारित मीटर लगाए जाएंगे और नहरों में लीकेज को रोकने के लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग किया जाएगा। सरकार का मानना है कि इस फ्रेमवर्क के लागू होने के बाद बिहार जल संसाधन प्रबंधन के क्षेत्र में अधिक आत्मनिर्भर और सुरक्षित राज्य के रूप में उभरेगा।