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बिहार की उच्च शिक्षा में बड़ा बदलाव, अब विश्वविद्यालयों में पढ़ाया जाएगा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस; जानिए.. कब से शुरू होंगे कोर्स?

Bihar News: बिहार के विश्वविद्यालयों में जुलाई से AI और स्किल-बेस्ड कोर्स शुरू होंगे. इससे छात्रों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा और रोजगार के नए अवसर मिलेंगे. ये कोर्स जुलाई सत्र से शुरू किए जाएंगे.

1st Bihar Published by: FIRST BIHAR Updated Apr 26, 2026, 8:28:22 AM

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प्रतिकात्मक तस्वीर - फ़ोटो Google

Bihar News: बिहार की उच्च शिक्षा व्यवस्था में एक नए युग की शुरुआत होने जा रही है। राज्य सरकार ने विश्वविद्यालयों में पारंपरिक पढ़ाई के साथ-साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और अन्य स्किल-बेस्ड कोर्स शुरू करने की तैयारी पूरी कर ली है। ये कोर्स जुलाई सत्र से शुरू किए जाएंगे।


आधुनिक तकनीकी शिक्षा की ओर कदम

उच्च शिक्षा विभाग का यह कदम राज्य के युवाओं को भविष्य की तकनीकों से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे छात्रों को न केवल आधुनिक शिक्षा मिलेगी, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी खुलेंगे। इस योजना को लागू करने के लिए विभाग ने पहले ही राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (NIELIT) के साथ समझौता (MoU) किया था। इसके तहत NIELIT के विशेषज्ञ विश्वविद्यालयों में जाकर छात्रों को प्रशिक्षण देंगे।


CBCS के तहत मिलेगा विकल्प

चॉइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम (CBCS) के तहत स्नातक के छात्र अपनी सामान्य पढ़ाई के साथ तकनीकी कोर्स भी चुन सकेंगे। यानी अब छात्र इतिहास, भूगोल जैसे विषयों के साथ AI और साइबर सुरक्षा जैसे आधुनिक विषय भी पढ़ सकेंगे। नामांकन की प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन होगी और विश्वविद्यालय पोर्टल के माध्यम से छात्र अपने पसंदीदा कोर्स में दाखिला ले सकेंगे।


90 से 540 घंटे के होंगे कोर्स

NIELIT द्वारा तैयार किए गए ये कोर्स उद्योग की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाए गए हैं। इनकी अवधि 90 घंटे से लेकर 540 घंटे तक होगी। प्रमुख कोर्स में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), साइबर सुरक्षा (Cyber Security), 3D प्रिंटिंग और डेटा एनालिटिक्स शामिल हैं। कोर्स पूरा करने के बाद छात्रों को प्रमाणपत्र के साथ-साथ प्लेसमेंट के अवसर भी मिलेंगे। इससे बिहार के युवाओं को अन्य राज्यों में पलायन करने की जरूरत कम होगी।


विश्वविद्यालयों में तैयारी तेज

उच्च शिक्षा विभाग ने सभी विश्वविद्यालयों को निर्देश दिया है कि वे कंप्यूटर लैब, हाई-स्पीड इंटरनेट और अन्य जरूरी संसाधनों की व्यवस्था जल्द पूरी करें। हर विश्वविद्यालय में एक नोडल अधिकारी भी नियुक्त किया जाएगा, जो NIELIT और छात्रों के बीच समन्वय का कार्य करेगा।


‘गेम चेंजर’ साबित हो सकती है योजना

विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल बिहार की उच्च शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव ला सकती है। जुलाई से शुरू होने वाले ये कोर्स राज्य के युवाओं को वैश्विक तकनीकी प्रतिस्पर्धा में मजबूत स्थिति में ला सकते हैं और उन्हें बेहतर करियर अवसर प्रदान कर सकते हैं।