1st Bihar Published by: First Bihar Updated Jun 18, 2026, 12:43:56 PM
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Bihar School News : बिहार में स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और छात्रों को बेहतर शैक्षणिक माहौल उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार ने निजी और गैर-सरकारी स्कूलों के लिए संबद्धता नियमों को और सख्त कर दिया है। बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) द्वारा लागू की गई ‘बिहार विद्यालय परीक्षा समिति संबद्धता (संशोधन) नियमावली, 2026’ के तहत अब माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों को मान्यता प्राप्त करने के लिए भूमि, भवन, खेल मैदान, प्रयोगशाला, पुस्तकालय और सुरक्षा संबंधी कई अनिवार्य मानकों को पूरा करना होगा।
16 जून 2026 को जारी बिहार गजट अधिसूचना के अनुसार यह नियम राज्यभर के निजी और गैर-सरकारी विद्यालयों पर लागू होंगे। शिक्षा विभाग का मानना है कि नए प्रावधानों से उन स्कूलों पर अंकुश लगेगा जो पर्याप्त बुनियादी सुविधाओं के बिना संचालित हो रहे हैं और छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने में असफल साबित हो रहे हैं।
नई नियमावली के मुताबिक ग्रामीण क्षेत्रों में उच्च माध्यमिक विद्यालय चलाने के लिए कम से कम 6000 वर्ग मीटर भूमि होना अनिवार्य होगा। इसमें न्यूनतम 2000 वर्ग मीटर क्षेत्र खेल मैदान के लिए सुरक्षित रखना होगा। विद्यालय परिसर की चारदीवारी भी आवश्यक होगी ताकि छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
वहीं पटना नगर क्षेत्र में स्थित विद्यालयों के लिए न्यूनतम 3200 वर्ग मीटर भूमि निर्धारित की गई है, जबकि अन्य शहरी क्षेत्रों में यह सीमा 4000 वर्ग मीटर रखी गई है। यदि खेल मैदान विद्यालय परिसर से अलग स्थान पर स्थित है तो उसकी दूरी 200 मीटर से अधिक नहीं हो सकती। साथ ही छात्रों को मैदान तक पहुंचने के लिए किसी व्यस्त सड़क या राष्ट्रीय राजमार्ग को पार नहीं करना चाहिए। नियमों के अनुसार विद्यालय की भूमि संस्थान के नाम से पंजीकृत होनी चाहिए या कम से कम 30 वर्षों की वैध लीज पर उपलब्ध होनी चाहिए।
सिर्फ जमीन ही नहीं, बल्कि विद्यालय भवन और शैक्षणिक सुविधाओं के लिए भी स्पष्ट मानक निर्धारित किए गए हैं। माध्यमिक विद्यालयों के लिए न्यूनतम 870 वर्ग मीटर निर्मित क्षेत्र होना आवश्यक होगा। इसके अंतर्गत 35-35 वर्ग मीटर के छह क्लासरूम, भौतिकी, रसायन विज्ञान और जीव विज्ञान की अलग-अलग प्रयोगशालाएं, 50 वर्ग मीटर का कंप्यूटर कक्ष और 50 वर्ग मीटर की लाइब्रेरी अनिवार्य रूप से उपलब्ध करानी होगी। उच्च माध्यमिक विद्यालयों के लिए न्यूनतम 880 वर्ग मीटर तथा संयुक्त माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक विद्यालयों के लिए 1110 वर्ग मीटर निर्मित क्षेत्र निर्धारित किया गया है।
नए नियमों के तहत संबद्धता के लिए आवेदन करने वाले विद्यालयों को 15 हजार रुपये का निरीक्षण शुल्क ऑनलाइन जमा करना होगा। यह राशि किसी भी स्थिति में वापस नहीं की जाएगी। इसके अलावा पहली बार सभी मानकों को पूरा करने वाले विद्यालयों को केवल पांच वर्षों की अस्थायी संबद्धता प्रदान की जाएगी। इसके बाद विभागीय निरीक्षण और समीक्षा के आधार पर संबद्धता का नवीनीकरण किया जाएगा।
नियमावली में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि कोई विद्यालय वित्तीय अनियमितता, फर्जी नामांकन, गलत दस्तावेज प्रस्तुत करने, सामाजिक वैमनस्य फैलाने या अन्य निर्धारित नियमों का उल्लंघन करता पाया जाता है तो बिहार विद्यालय परीक्षा समिति उसके खिलाफ कार्रवाई कर सकती है। ऐसे मामलों में पहले कारण बताओ नोटिस जारी किया जाएगा। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर विद्यालय की मान्यता निलंबित या रद्द की जा सकती है।
शिक्षा विभाग के अधिकारियों का मानना है कि नई नियमावली से बिहार के निजी विद्यालयों में आधारभूत संरचना और शैक्षणिक सुविधाओं का स्तर बेहतर होगा। इससे छात्रों को सुरक्षित, आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षण वातावरण मिलेगा। साथ ही राज्यभर में संचालित ऐसे स्कूलों की पहचान भी आसान होगी जो निर्धारित मानकों का पालन नहीं कर रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार यह बदलाव बिहार की स्कूली शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और गुणवत्ता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है, जिसका लाभ आने वाले वर्षों में लाखों विद्यार्थियों को मिलेगा।