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Bihar News : बिहार सरकार का बड़ा फैसला! अब दूसरे राज्यों में भी बिकेगा बिहार का बालू, K-लाइसेंसधारियों को मिली अनुमति

मॉनसून में बालू खनन बंदी के बीच बिहार सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। अब K-लाइसेंसधारियों के माध्यम से बिहार का बालू दूसरे राज्यों में भी भेजा जा सकेगा। सरकार ने ई-चालान व्यवस्था लागू करते हुए राजस्व बढ़ाने और आपूर्ति बनाए रखने की योजना बनाई है।

1st Bihar Published by: First Bihar Updated Jul 09, 2026, 2:16:22 PM

Bihar News : बिहार सरकार का बड़ा फैसला! अब दूसरे राज्यों में भी बिकेगा बिहार का बालू, K-लाइसेंसधारियों को मिली अनुमति

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Bihar News : बिहार सरकार ने बालू कारोबार को लेकर बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। अब राज्य के K-लाइसेंसधारियों के माध्यम से बिहार का बालू दूसरे राज्यों में भी भेजा जा सकेगा। इसके लिए बाहर जाने वाले प्रत्येक वाहन को ई-चालान जारी किया जाएगा। सरकार का कहना है कि इस व्यवस्था का उद्देश्य बालू कारोबार को पारदर्शी बनाना, राजस्व बढ़ाना और मॉनसून के दौरान भी बाजार में संतुलित आपूर्ति बनाए रखना है।

यह निर्णय ऐसे समय में लिया गया है जब मॉनसून के कारण बिहार में बालू खनन पर अस्थायी रोक लागू है। खनन बंद होने के बावजूद निर्माण कार्य पूरी तरह नहीं रुकते, इसलिए सरकार ने पहले से पर्याप्त स्टॉक तैयार कर रखा है। इसी के आधार पर सीमित अवधि के लिए दूसरे राज्यों में भी बालू की आपूर्ति की अनुमति दी गई है।

पहले बिहार की जरूरत, फिर दूसरे राज्यों में होगी आपूर्ति

खान एवं भूतत्व विभाग ने स्पष्ट किया है कि सरकार की पहली प्राथमिकता बिहार के भीतर निर्माण कार्यों के लिए पर्याप्त बालू उपलब्ध कराना है। राज्य के विभिन्न जिलों में पहले से बड़ी मात्रा में बालू का भंडारण किया गया है ताकि मॉनसून के दौरान किसी तरह की कमी न हो।

विभाग का कहना है कि जब यह सुनिश्चित हो गया कि राज्य की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त स्टॉक मौजूद है, तभी दूसरे राज्यों में बिक्री की अनुमति देने का निर्णय लिया गया। इससे बिहार में निर्माण परियोजनाओं पर भी कोई असर नहीं पड़ेगा और अतिरिक्त स्टॉक का बेहतर उपयोग हो सकेगा।

चार महीने के लिए लागू रहेगी विशेष व्यवस्था

सरकार ने यह व्यवस्था फिलहाल मॉनसून अवधि के लिए लागू की है। खनन बंदी के दौरान K-लाइसेंसधारी निर्धारित नियमों के तहत दूसरे राज्यों में बालू भेज सकेंगे। प्रत्येक वाहन की आवाजाही ई-चालान प्रणाली से होगी, जिससे परिवहन की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन दर्ज रहेगी और अवैध ढुलाई पर भी रोक लगाने में मदद मिलेगी।

विभाग के अधिकारियों के अनुसार यह एक अस्थायी व्यवस्था है और इसकी नियमित समीक्षा की जाएगी। यदि किसी भी समय बिहार में बालू की उपलब्धता प्रभावित होती है या बाजार में कमी की स्थिति बनती है, तो सरकार इस अनुमति को तत्काल वापस भी ले सकती है।

15 अक्टूबर के बाद होगा अगला फैसला

मॉनसून समाप्त होने के बाद जब 15 अक्टूबर के आसपास बालू खनन दोबारा शुरू होगा, तब सरकार इस नीति की दोबारा समीक्षा करेगी। इसके बाद यह तय किया जाएगा कि दूसरे राज्यों में बालू बिक्री की व्यवस्था जारी रखनी है या उसमें बदलाव करना है। यानी फिलहाल यह फैसला स्थायी नहीं माना जा रहा है।

जिलों में तैयार किया गया लाखों CFT का बफर स्टॉक

सरकार ने मॉनसून शुरू होने से पहले ही व्यापक तैयारी की थी। राज्य के विभिन्न जिलों में करीब 30 से 35 लाख क्यूबिक फीट (CFT) बालू का बफर स्टॉक सुरक्षित रखा गया है। इसी स्टॉक के जरिए सरकारी और निजी निर्माण कार्यों के लिए आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी।

सरकार का मानना है कि पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध रहने से बाजार में कृत्रिम कमी नहीं होगी और बालू की कीमतों में अचानक होने वाली बढ़ोतरी पर भी नियंत्रण रखा जा सकेगा। इससे आम लोगों और निर्माण एजेंसियों दोनों को राहत मिलने की उम्मीद है।

अवैध खनन और ढुलाई पर रहेगी कड़ी निगरानी

मॉनसून के दौरान अवैध बालू खनन और बिना अनुमति ढुलाई रोकना सरकार की प्राथमिकता में शामिल है। खान एवं भूतत्व विभाग ने सभी जिलाधिकारियों, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों (SSP), पुलिस अधीक्षकों (SP) और स्थानीय प्रशासन को निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।

सभी थाना क्षेत्रों में नियमित गश्त, विशेष अभियान और अवैध परिवहन पर कार्रवाई के निर्देश जारी किए गए हैं। ई-चालान व्यवस्था लागू होने से वैध और अवैध परिवहन के बीच अंतर करना भी आसान होगा।

राजस्व बढ़ाने के साथ बाजार संतुलित रखने पर सरकार का फोकस

बिहार के बालू की मांग झारखंड, उत्तर प्रदेश और अन्य पड़ोसी राज्यों में लंबे समय से बनी हुई है। सरकार को उम्मीद है कि नियंत्रित तरीके से दूसरे राज्यों में बालू भेजने से राज्य के राजस्व में वृद्धि होगी। हालांकि सरकार ने साफ किया है कि किसी भी स्थिति में बिहार के भीतर बालू की उपलब्धता प्रभावित नहीं होने दी जाएगी। यदि जरूरत पड़ी तो बाहरी राज्यों में आपूर्ति पर तुरंत रोक भी लगाई जा सकती है। सरकार का उद्देश्य राजस्व बढ़ाने के साथ-साथ राज्य के निर्माण कार्यों और आम उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करना भी है।