1st Bihar Published by: First Bihar Updated Jul 09, 2026, 3:21:00 PM
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Bihar Mid Day Meal : बिहार में मानसून सक्रिय होने के साथ ही राज्य के कई जिलों में लगातार बारिश हो रही है। मौसम विभाग ने गुरुवार को भी 30 जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया है। इसी बीच बच्चों के स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए बिहार शिक्षा विभाग ने सरकारी स्कूलों में संचालित मध्याह्न भोजन (मिड-डे मील) योजना को लेकर नई गाइडलाइन जारी की है। विभाग ने बरसात के मौसम में कुछ विशेष सब्जियों के इस्तेमाल पर रोक लगाने का फैसला किया है, ताकि विद्यार्थियों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराया जा सके।
नई व्यवस्था के तहत अब सरकारी प्राथमिक और मध्य विद्यालयों में बनने वाले मिड-डे मील में बैंगन, भिंडी, पत्ता गोभी और सभी प्रकार के पत्तेदार साग का उपयोग नहीं किया जाएगा। इनकी जगह स्थानीय स्तर पर उपलब्ध ताजी, स्वच्छ और सुरक्षित मौसमी सब्जियों का इस्तेमाल करने का निर्देश दिया गया है।
शिक्षा विभाग की ओर से जारी आदेश सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों (डीईओ) और जिला कार्यक्रम पदाधिकारियों (डीपीओ) को भेजा गया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि बरसात के मौसम में भोजन की गुणवत्ता और स्वच्छता से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि स्कूलों में बनने वाला भोजन पूरी तरह सुरक्षित हो और खाद्य सुरक्षा के सभी मानकों का पालन किया जाए। इसके साथ ही रसोईघर की साफ-सफाई, खाद्य सामग्री के सुरक्षित भंडारण, ताजी सब्जियों के उपयोग और भोजन तैयार करने की पूरी प्रक्रिया पर विशेष निगरानी रखने का निर्देश भी दिया गया है।
शिक्षा विभाग का कहना है कि बारिश के मौसम में कुछ पत्तेदार सब्जियों और हरी सब्जियों में कीड़े, बैक्टीरिया और अन्य प्रकार के संक्रमण की संभावना अधिक रहती है। यदि इनकी ठीक तरह से सफाई नहीं की जाए तो बच्चों में फूड प्वाइजनिंग, पेट संबंधी संक्रमण और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। इसी जोखिम को देखते हुए विभाग ने एहतियाती कदम उठाते हुए इन सब्जियों को फिलहाल मिड-डे मील के मेन्यू से हटाने का निर्णय लिया है। विभाग का उद्देश्य बच्चों को पौष्टिक भोजन के साथ-साथ सुरक्षित भोजन उपलब्ध कराना है।
नई गाइडलाइन के अनुसार विद्यालयों में अब ऐसी मौसमी सब्जियों का उपयोग किया जाएगा जो स्थानीय स्तर पर आसानी से उपलब्ध हों, ताजी हों और जिनमें संक्रमण की संभावना कम हो। इससे न केवल भोजन की गुणवत्ता बेहतर होगी बल्कि बच्चों के स्वास्थ्य की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जा सकेगी। विभाग ने अधिकारियों से यह भी कहा है कि भोजन तैयार करने से पहले सब्जियों और अन्य खाद्य सामग्री की गुणवत्ता की जांच की जाए तथा स्वच्छ पेयजल का ही उपयोग किया जाए।
शिक्षा विभाग ने जिला और प्रखंड स्तर के अधिकारियों को विद्यालयों का नियमित निरीक्षण करने का निर्देश दिया है। निरीक्षण के दौरान यह देखा जाएगा कि मिड-डे मील निर्धारित गाइडलाइन के अनुसार तैयार किया जा रहा है या नहीं। यदि किसी विद्यालय में निर्देशों की अनदेखी पाई जाती है तो संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई भी की जा सकती है।
राज्य सरकार का कहना है कि मध्याह्न भोजन योजना का उद्देश्य केवल बच्चों को पोषण उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि उन्हें सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण भोजन देना भी है। मानसून के दौरान संक्रमण की बढ़ती आशंका को देखते हुए यह निर्णय एहतियात के तौर पर लिया गया है। विभाग को उम्मीद है कि नई गाइडलाइन लागू होने से खाद्य जनित बीमारियों का खतरा कम होगा और सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले लाखों बच्चों को सुरक्षित एवं पौष्टिक भोजन मिल सकेगा।