1st Bihar Published by: First Bihar Updated Jul 06, 2026, 1:18:42 PM
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Bihar News : बिहार में बिना पंजीकरण संचालित हो रहे नर्सिंग होम, मैटरनिटी क्लीनिक और छोटे निजी अस्पतालों पर अब सरकार ने शिकंजा कसने की तैयारी कर ली है। राज्य सरकार की ओर से लागू की गई बिहार लघु एवं मध्यम स्वास्थ्य प्रतिष्ठान (स्थापना एवं पंजीकरण) नियमावली, 2026 के तहत ऐसे सभी स्वास्थ्य संस्थानों के लिए पंजीकरण अनिवार्य कर दिया गया है। नई व्यवस्था का उद्देश्य राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं को व्यवस्थित करना, मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और अवैध रूप से संचालित निजी स्वास्थ्य संस्थानों पर प्रभावी रोक लगाना है।
इस नियमावली को लेकर पटना हाईकोर्ट ने भी महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि यदि सरकार इस नियमावली को पूरी गंभीरता और प्रभावी तरीके से लागू करती है तो राज्यभर में बिना पंजीकरण संचालित हो रहे नर्सिंग होम, मैटरनिटी क्लीनिक और छोटे निजी अस्पतालों पर अंकुश लगाया जा सकता है। इससे स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी और मरीजों को मानक सुविधाएं उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
नई नियमावली के तहत प्रत्येक जिले में जिला पंजीकरण प्राधिकरण का गठन किया जाएगा। इसकी अध्यक्षता संबंधित जिले के सिविल सर्जन-सह-मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी (CMO) करेंगे। यही प्राधिकरण निजी स्वास्थ्य प्रतिष्ठानों के पंजीकरण, निरीक्षण, नवीनीकरण और नियमों के अनुपालन की निगरानी करेगा। साथ ही शिकायत मिलने पर जांच करने और आवश्यक कार्रवाई करने का अधिकार भी इसी प्राधिकरण के पास होगा।
सरकार ने नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए सख्त दंडात्मक प्रावधान किए हैं। यदि कोई स्वास्थ्य प्रतिष्ठान सामान्य प्रावधानों का उल्लंघन करता है तो पहली बार 10 हजार रुपये, दूसरी बार 25 हजार रुपये और इसके बाद प्रत्येक उल्लंघन पर 50 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा।
वहीं, यदि कोई नर्सिंग होम, क्लीनिक या अस्पताल बिना पंजीकरण के संचालित पाया जाता है तो उस पर भी जुर्माना लगाया जाएगा। पहली बार पकड़े जाने पर 10 हजार रुपये और दोबारा उल्लंघन होने पर 25 हजार रुपये का आर्थिक दंड देना होगा।
यदि कोई स्वास्थ्य प्रतिष्ठान बार-बार नियमों की अनदेखी करता है या बिना पंजीकरण संचालन जारी रखता है, तो संबंधित जिला प्रशासन को ऐसे प्रतिष्ठान को सील करने का अधिकार होगा। इसके अलावा संबंधित संचालकों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) के प्रावधानों के तहत कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी। सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से अवैध रूप से चल रहे अस्पतालों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सकेगा।
नई नियमावली में निरीक्षण प्रक्रिया को भी सख्त बनाया गया है। यदि किसी जांच के दौरान अस्पताल या क्लीनिक का संचालक गलत जानकारी देता है, आवश्यक दस्तावेज छिपाता है या निरीक्षण में बाधा पहुंचाता है, तो उसके खिलाफ पांच लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। इस प्रावधान का उद्देश्य निरीक्षण प्रक्रिया को पारदर्शी और प्रभावी बनाना है।
स्वास्थ्य विभाग ने पंजीकरण प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए इसे पूरी तरह ऑनलाइन करने का निर्णय लिया है। कोई भी पात्र स्वास्थ्य प्रतिष्ठान 500 रुपये के निर्धारित शुल्क के साथ ऑनलाइन आवेदन कर सकेगा। आवेदन प्राप्त होने के बाद विभाग 15 दिनों के भीतर एक वर्ष के लिए अस्थायी पंजीकरण प्रमाणपत्र जारी करेगा। यह अस्थायी पंजीकरण अधिकतम दो बार नवीनीकृत कराया जा सकेगा। इस अवधि के दौरान संबंधित संस्थान को सरकार द्वारा निर्धारित सभी मानकों और आवश्यक सुविधाओं को पूरा कर स्थायी पंजीकरण प्राप्त करना होगा।
स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि नई नियमावली का मुख्य उद्देश्य निजी स्वास्थ्य संस्थानों में गुणवत्ता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है। कई स्थानों पर बिना आवश्यक संसाधनों, प्रशिक्षित चिकित्सकों और बुनियादी सुविधाओं के अस्पताल संचालित होने की शिकायतें मिलती रही हैं। ऐसे संस्थानों के कारण मरीजों की जान जोखिम में पड़ने की आशंका बनी रहती है।
नई व्यवस्था लागू होने के बाद केवल वही नर्सिंग होम, क्लीनिक और छोटे अस्पताल संचालित हो सकेंगे जो सरकार द्वारा तय किए गए मानकों का पालन करेंगे। इससे स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होने के साथ-साथ मरीजों को सुरक्षित और बेहतर इलाज मिलने की उम्मीद है। राज्य सरकार का मानना है कि अनिवार्य पंजीकरण व्यवस्था लागू होने के बाद स्वास्थ्य क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ेगी, अवैध अस्पतालों पर रोक लगेगी और निजी स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी पहले की तुलना में अधिक प्रभावी हो सकेगी।