1st Bihar Published by: First Bihar Updated Jun 01, 2026, 12:09:22 PM
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Bihar Education News : बिहार सरकार राज्य की स्कूली शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा देने की तैयारी में जुट गई है। शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने घोषणा की है कि बिहार के प्रत्येक प्रखंड में एक मॉडल स्कूल स्थापित किया जाएगा, जिसका नाम ‘सरस्वती विद्या निकेतन’ रखा जाएगा। इस महत्वाकांक्षी योजना की शुरुआत जुलाई माह से होने जा रही है। सरकार का उद्देश्य इन विद्यालयों को आधुनिक सुविधाओं और उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा से लैस करना है ताकि हर छात्र का सपना इन स्कूलों में पढ़ने का हो।
शिक्षा मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने बताया कि मॉडल स्कूलों में विशेष रूप से चयनित शिक्षकों की तैनाती की जाएगी। ये शिक्षक सरकारी विद्यालयों से ही चुने जाएंगे, लेकिन उनका चयन उनकी कार्यक्षमता, शिक्षण गुणवत्ता और प्रदर्शन के आधार पर किया जाएगा।
मंत्री ने कहा कि सरकार केवल प्रखंड स्तर पर ही नहीं, बल्कि जिला स्तर पर भी कुछ चुनिंदा विद्यालयों को मॉडल स्कूल के रूप में विकसित करने की योजना पर काम कर रही है। इन स्कूलों में बेहतर शैक्षणिक माहौल, आधुनिक संसाधन और छात्रों के सर्वांगीण विकास पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
शिक्षा मंत्री ने कहा कि बिहार की शिक्षा व्यवस्था में पिछले दो दशकों के दौरान व्यापक बदलाव हुए हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2005 से पहले राज्य की शिक्षा व्यवस्था काफी पिछड़ी हुई थी, लेकिन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में शिक्षा क्षेत्र में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है। इस दौरान राज्य में कई नए आईआईटी, इंजीनियरिंग कॉलेज, पॉलिटेक्निक संस्थान और आईआईएम जैसे प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान स्थापित किए गए, जिससे उच्च शिक्षा के क्षेत्र में नई संभावनाएं खुली हैं।
मिथिलेश तिवारी ने कहा कि अब सरकार शिक्षा को कौशल विकास से जोड़ने पर विशेष बल दे रही है। उनका कहना था कि छात्रों को केवल किताबों तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि उन्हें रोजगारपरक और व्यावहारिक शिक्षा भी दी जाएगी। इसी उद्देश्य से नई शिक्षा नीति को प्रभावी ढंग से लागू करने की दिशा में काम शुरू कर दिया गया है, ताकि छात्र पढ़ाई पूरी करने के बाद रोजगार के बेहतर अवसर प्राप्त कर सकें।
निजी विद्यालयों की कार्यप्रणाली को लेकर भी शिक्षा मंत्री ने चिंता जताई। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर निजी स्कूलों की गतिविधियों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि अभिभावकों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ न पड़े और छात्रों की पढ़ाई किसी भी प्रकार से प्रभावित न हो। उन्होंने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
मंत्री ने बताया कि बिहार में वर्तमान समय में लगभग 95 हजार विद्यालय संचालित हैं। इनमें करीब 20 हजार निजी विद्यालय हैं, जबकि शेष सरकारी विद्यालय हैं। राज्य के लगभग 80 प्रतिशत छात्र सरकारी स्कूलों में पढ़ाई करते हैं। सरकार का लक्ष्य सरकारी विद्यालयों को आधारभूत संरचना और शिक्षा की गुणवत्ता के मामले में निजी स्कूलों से बेहतर बनाना है।
उन्होंने कहा कि पीएम श्री योजना, समग्र शिक्षा अभियान और अन्य सरकारी योजनाओं के माध्यम से विद्यालयों का तेजी से विकास किया जा रहा है। हालांकि उन्होंने स्वीकार किया कि संसाधनों और समय की आवश्यकता के कारण बदलाव धीरे-धीरे दिखाई देगा, लेकिन आने वाले वर्षों में बिहार की शिक्षा व्यवस्था में व्यापक परिवर्तन देखने को मिलेगा।
इस दौरान शिक्षा मंत्री ने वाल्मीकिनगर टाइगर रिजर्व की प्राकृतिक सुंदरता और पर्यटन संभावनाओं की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार जम्मू-कश्मीर अपनी खूबसूरत वादियों के लिए प्रसिद्ध है, उसी तरह वाल्मीकिनगर बिहार का पर्यटन मुकुट बन सकता है। उन्होंने लोगों से अधिक से अधिक संख्या में यहां आने और प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद लेने की अपील की।