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Bihar Mid Day Meal News : अब जाएगा लैब में जाएगा बिहार के सरकारी स्कूलों का मिड डे मील, 120 स्कूलों पर बड़ा एक्शन; जानिए क्या है वजह

बिहार सरकार ने सरकारी स्कूलों में बच्चों को मिलने वाले मिड डे मील की गुणवत्ता को लेकर बड़ा और सख्त कदम उठाया है। सीमांचल के चार जिलों—पूर्णिया, अररिया, कटिहार और किशनगंज—के 120 स्कूलों में भोजन के नमूनों की वैज्ञानिक जांच की जाएगी।

1st Bihar Published by: First Bihar Updated May 27, 2026, 2:10:59 PM

Bihar Mid Day Meal News : अब जाएगा लैब में जाएगा बिहार के सरकारी स्कूलों का मिड डे मील, 120 स्कूलों पर बड़ा एक्शन; जानिए क्या है वजह

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Bihar Mid Day Meal News : बिहार सरकार ने सरकारी स्कूलों में बच्चों को मिलने वाले मध्याह्न भोजन (मिड डे मील) की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए एक अहम और सख्त पहल शुरू की है। शिक्षा विभाग ने सीमांचल क्षेत्र के चार जिलों—पूर्णिया, अररिया, कटिहार और किशनगंज—में कुल 120 विद्यालयों में परोसे जा रहे भोजन की वैज्ञानिक जांच कराने का निर्णय लिया है। इस पूरी प्रक्रिया के लिए एक दिल्ली स्थित मान्यता प्राप्त एजेंसी को अधिकृत किया गया है, जो निर्धारित मानकों के अनुसार खाद्य नमूनों का परीक्षण करेगी।


शिक्षा विभाग का कहना है कि इस कदम का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बच्चों को सुरक्षित, पौष्टिक और गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध हो सके, जिससे उनके स्वास्थ्य और शारीरिक विकास पर सकारात्मक प्रभाव पड़े। मध्याह्न भोजन योजना निदेशालय की ओर से जारी निर्देशों के अनुसार, प्रत्येक जिले से 30-30 विद्यालयों का चयन किया गया है। यानी चारों जिलों में कुल 120 स्कूलों में यह विशेष जांच अभियान चलाया जाएगा। चयनित विद्यालयों में उस दिन बनने वाले भोजन का नमूना अनिवार्य रूप से लिया जाएगा और उसे प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजा जाएगा।


मध्याह्न भोजन योजना के निदेशक विनायक मिश्र द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि जिस दिन स्कूल में जो मेन्यू निर्धारित होगा, उसी दिन बनने वाले सभी खाद्य पदार्थों के नमूने लिए जाएंगे। उदाहरण के तौर पर यदि किसी दिन चावल, दाल और सब्जी मेन्यू में शामिल है, तो सभी व्यंजनों के अलग-अलग नमूने संग्रहित किए जाएंगे।


रिपोर्ट तैयार करते समय यह भी अनिवार्य किया गया है कि नमूना संग्रह की तारीख, विद्यालय का पूरा नाम, स्थान और उस दिन का मेन्यू स्पष्ट रूप से दर्ज किया जाए। विभाग ने यह भी निर्देश दिया है कि जांच रिपोर्ट पूरी तरह पारदर्शी, स्पष्ट और प्रमाणिक होनी चाहिए, ताकि किसी भी तरह की भ्रम की स्थिति उत्पन्न न हो।


शिक्षा विभाग ने इस प्रक्रिया को लेकर सख्त रुख अपनाया है। आदेश में कहा गया है कि यदि जांच रिपोर्ट अधूरी, अस्पष्ट या निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं पाई जाती है, तो उसे स्वीकार नहीं किया जाएगा। ऐसी स्थिति में संबंधित एजेंसी को भुगतान भी नहीं किया जाएगा। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि जांच प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर लापरवाही न हो।


एजेंसी को निर्देश दिया गया है कि नमूना संग्रह के बाद अधिकतम एक सप्ताह के भीतर पूरी जांच रिपोर्ट विभाग को सौंपनी होगी। इसके साथ ही यह भी कहा गया है कि नमूना लेने के दौरान सभी वैज्ञानिक मानकों और स्वीकृत प्रक्रियाओं का सख्ती से पालन किया जाए।


अधिकारियों का मानना है कि यह कदम मिड डे मील योजना को और अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाने में मदद करेगा। इससे न केवल भोजन की गुणवत्ता की नियमित निगरानी संभव होगी, बल्कि किसी भी तरह की अनियमितता या लापरवाही पर तुरंत कार्रवाई भी की जा सकेगी।


सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले लाखों बच्चों के लिए यह योजना बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसी भोजन पर कई बच्चे अपने पोषण का बड़ा हिस्सा निर्भर करते हैं। ऐसे में गुणवत्ता जांच की यह पहल न सिर्फ शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करेगी, बल्कि बच्चों के स्वास्थ्य सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी एक महत्वपूर्ण सुधार साबित होगी।