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महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने की पहल: बिहार की जीविका दीदियां चलाएंगी सुधा का बूथ, पंचायत स्तर पर खुलेंगे 8053 बिक्री केंद्र

Bihar News: बिहार सरकार मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत जीविका दीदियों को पंचायतों में सुधा बूथ खोलने का अवसर देगी। 8053 पंचायतों में खुलने वाले इन केंद्रों के लिए महिलाओं को 60 हजार रुपये की सहायता मिलेगी।

1st Bihar Published by: FIRST BIHAR Updated Jul 12, 2026, 3:35:57 PM

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प्रतिकात्मक तस्वीर - फ़ोटो AI

Bihar News: बिहार सरकार ने मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना से जुड़ी जीविका दीदियों के लिए रोजगार का नया प्लान तैयार किया है। अब राज्य की सभी 8053 पंचायतों में जीविका स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं को सुधा बूथ चलाने का मौका मिलेगा। इसके लिए बिहार स्टेट मिल्क को-ऑपरेटिव फेडरेशन (कॉम्फेड) और जीविका के बीच समझौता किया जाएगा।



इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ना और पंचायत स्तर पर सुधा के उत्पादों की पहुंच बढ़ाना है। सरकार प्रत्येक लाभुक महिला को सुधा बूथ संचालन के लिए 60 हजार रुपये की वित्तीय सहायता देगी। वहीं, लाभार्थी महिला को अपने स्तर से 15 हजार रुपये का अंशदान पूंजी के रूप में लगाना होगा।



बिहार में वर्तमान समय में करीब 13 लाख से अधिक जीविका स्वयं सहायता समूह संचालित हैं, जिनसे एक करोड़ 81 लाख से ज्यादा महिलाएं जुड़ी हुई हैं। राज्य सरकार ने इन महिलाओं को मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना का लाभ दिया है और अब उन्हें स्थायी रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में नए प्रयास किए जा रहे हैं।



इसी कड़ी में पंचायतों में जीविका-सुधा बिक्री केंद्र स्थापित करने की तैयारी की जा रही है। ग्रामीण विकास विभाग का मानना है कि इससे ग्रामीण उपभोक्ताओं को आसानी से दूध और उससे जुड़े उत्पाद मिल सकेंगे, वहीं महिलाओं के लिए आय का नया साधन भी तैयार होगा।



जीविका सुधा केंद्र के लिए प्रत्येक चयनित महिला को 60 हजार रुपये की सहायता राशि दी जाएगी। महिला को 15 हजार रुपये अपने अंशदान के रूप में लगाने होंगे। इस राशि का उपयोग डीप फ्रीजर, वीसी कूलर, परिवहन सुविधा, डेयरी उत्पादों की खरीद और अन्य जरूरी पूंजीगत खर्चों में किया जाएगा। इससे बिक्री केंद्र का संचालन बेहतर तरीके से किया जा सकेगा और महिलाओं को नियमित आय का अवसर मिलेगा।



योजना का लाभ लेने के लिए महिला का जीविका स्वयं सहायता समूह की सदस्य होना जरूरी है। इसके साथ ही वह मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना की लाभार्थी भी होनी चाहिए। आवेदक महिला की जानकारी लोकोस एप्लीकेशन पर उपलब्ध होनी चाहिए और उसके समूह से लिए गए ऋण का कोई बकाया नहीं होना चाहिए। इसके अलावा महिला के पंचायत क्षेत्र में अपनी या किराए की दुकान होना अनिवार्य है। दुकान का क्षेत्रफल कम से कम 70 वर्ग फीट होना चाहिए। दुकान में बिजली की सुविधा और सड़क संपर्क भी उपलब्ध होना जरूरी होगा।



प्रत्येक पंचायत में इच्छुक जीविका दीदियों से आवेदन लिए जाएंगे। प्राप्त आवेदनों की जांच संबंधित जीविका महिला संकुल स्तरीय संघ (सीएलएफ) द्वारा निर्धारित मानकों के आधार पर की जाएगी। योग्य महिलाओं के सत्यापन के बाद प्रखंड स्तर पर रैंडमाइज्ड लॉटरी के माध्यम से चयन किया जाएगा।



ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि जीविका दीदियों को हर हाल में रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ने की दिशा में काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पंचायत स्तर पर सुधा उत्पादों की उपलब्धता बढ़ने से जहां महिलाओं को आर्थिक मजबूती मिलेगी, वहीं डेयरी उत्पादन से जुड़े किसानों को भी इसका लाभ मिलेगा। सरकार को उम्मीद है कि इस पहल से ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और बिहार में डेयरी क्षेत्र को नई गति मिलेगी।