1st Bihar Published by: First Bihar Updated Jun 14, 2026, 11:44:21 AM
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BIHAR NEWS : बिहार में पुलों की सुरक्षा को लेकर की गई व्यापक जांच में कई चिंताजनक तथ्य सामने आए हैं। राज्यभर में 60 मीटर से अधिक लंबाई वाले पुलों की तकनीकी समीक्षा के दौरान 23 पुलों की स्थिति गंभीर पाई गई है, जबकि 50 पुलों में मरम्मत और सुदृढ़ीकरण की आवश्यकता बताई गई है। इसके बाद पथ निर्माण विभाग ने संबंधित एजेंसियों को त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
शनिवार को पथ निर्माण विभाग के सचिव पंकज कुमार पाल ने बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड के अधीन आने वाले पुलों की सुरक्षा और वर्तमान स्थिति को लेकर उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक में विभाग के वरिष्ठ अभियंताओं और निगम के अधिकारियों ने पुलों की जांच रिपोर्ट प्रस्तुत की।
समीक्षा के दौरान बताया गया कि राज्य के विभिन्न जिलों में स्थित 60 मीटर से अधिक लंबाई वाले कुल 638 पुलों का निरीक्षण कराया गया है। इन पुलों की संरचनात्मक मजबूती, यातायात भार वहन क्षमता और सुरक्षा मानकों की गहन जांच की गई। जांच में पश्चिम चंपारण, पटना, मुजफ्फरपुर, अररिया, पूर्णिया, किशनगंज, कटिहार, सुपौल, पूर्वी चंपारण, दरभंगा, गया, नवादा, जमुई और सहरसा समेत कई जिलों के पुल शामिल रहे।
रिपोर्ट के अनुसार 23 पुल ऐसे पाए गए हैं जिनकी स्थिति चिंताजनक है और तत्काल हस्तक्षेप की आवश्यकता है। इनमें से 10 पुलों पर मरम्मत और सुदृढ़ीकरण का कार्य पहले ही शुरू कर दिया गया है। वहीं पांच ऐसे स्थान चिह्नित किए गए हैं जहां मौजूदा पुलों की स्थिति को देखते हुए नए पुलों का निर्माण कराया जाएगा।
यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए चार पुलों पर भारी वाहनों के आवागमन पर अस्थायी रोक लगा दी गई है। इन पुलों पर फिलहाल केवल हल्के और छोटे वाहनों को ही गुजरने की अनुमति दी गई है। इसके अलावा एक अन्य संवेदनशील स्थल पर यातायात को सुचारू बनाए रखने के लिए वैकल्पिक डायवर्जन तैयार किया जा रहा है, जिसका निर्माण कार्य जारी है। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि आठ अन्य पुलों के रखरखाव और मरम्मत कार्य के लिए टेंडर प्रक्रिया अंतिम चरण में है। टेंडर आवंटन के बाद इन पुलों पर भी जल्द काम शुरू कर दिया जाएगा।
जांच के दौरान 50 पुल ऐसे भी पाए गए हैं जिनमें सामान्य मरम्मत और मजबूतीकरण की जरूरत है। इन पुलों पर विभागीय अभियंताओं की निगरानी में चरणबद्ध तरीके से काम कराया जा रहा है। अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि जिन पुलों में किसी भी प्रकार की तकनीकी कमी या क्षति मिली है, वहां बिना देरी किए युद्धस्तर पर मरम्मत कार्य शुरू किया जाए।
बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि राज्य के अत्यंत महत्वपूर्ण और लाइफलाइन माने जाने वाले 250 मीटर से अधिक लंबाई वाले 47 प्रमुख पुलों का तकनीकी आकलन आईआईटी पटना द्वारा किया गया है। संस्थान की प्रारंभिक रिपोर्ट विभाग को सौंप दी गई है और उसके आधार पर आवश्यक कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
सचिव पंकज कुमार पाल ने अधिकारियों को पुलों की नियमित निगरानी और समय-समय पर निरीक्षण सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि सुरक्षा मानकों से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। साथ ही चेतावनी दी कि जिन प्रमंडलों में मरम्मत कार्य की गति धीमी पाई जाएगी या गुणवत्ता में लापरवाही सामने आएगी, वहां संबंधित अभियंताओं के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। राज्य सरकार का कहना है कि पुलों की सुरक्षा और यात्रियों की सुविधा सर्वोच्च प्राथमिकता है तथा सभी आवश्यक कार्य निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरा कराने का प्रयास किया जा रहा है।