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बिहार में तेज रफ्तार का कहर: वाहन की चपेट में आने से बाइक सवार की दर्दनाक मौत, दो गंभीर रूप से घायल

Bihar Road Accident: बिहार के नवादा जिले में हुए दर्दनाक सड़क हादसे ने एक परिवार की खुशियां छीन लीं। हिसुआ थाना क्षेत्र में तेज रफ्तार वाहन की टक्कर में एक युवक की मौत हो गई, जबकि दो लोग गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। घटना के बाद एंबुलेंस सेवा...

1st Bihar Published by: First Bihar Updated May 28, 2026, 10:39:35 AM

बिहार में तेज रफ्तार का कहर: वाहन की चपेट में आने से बाइक सवार की दर्दनाक मौत, दो गंभीर रूप से घायल

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Bihar Road Accident: नवादा जिले के हिसुआ थाना क्षेत्र में हुए दर्दनाक सड़क हादसे ने एक परिवार की खुशियां पलभर में छीन लीं। हाई स्कूल के पास तेज रफ्तार वाहन की चपेट में आने से बाइक सवार 30 वर्षीय शिवम कुमार की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई, जबकि उनके मौसेरे भाई रोशन कुमार और जीजा मंटू कुमार गंभीर रूप से घायल हो गए। दोनों घायलों की हालत नाजुक देखते हुए डॉक्टरों ने प्राथमिक इलाज के बाद उन्हें बेहतर उपचार के लिए नवादा सदर अस्पताल से रेफर कर दिया।


मृतक शिवम कुमार महादेव बीघा मोड़ निवासी शंभू पंडित के पुत्र थे और एक निजी बैंक में कार्यरत थे। बताया जा रहा है कि वह अपने मौसेरे भाई की शादी में शामिल होने के लिए छुट्टी लेकर घर आए थे। परिवार के मुताबिक गुरुवार को उन्हें वापस दिल्ली लौटना था, लेकिन उससे पहले ही सड़क हादसे ने उनकी जिंदगी छीन ली। शिवम अपने पीछे पत्नी और छोटे बच्चों को छोड़ गए हैं। घटना के बाद परिवार में कोहराम मचा हुआ है और पूरे इलाके में मातम पसरा है।


प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार हादसा इतना भीषण था कि बाइक सवार सड़क पर दूर जा गिरे। आसपास मौजूद लोगों ने तुरंत घायलों को संभाला और अस्पताल पहुंचाने की कोशिश शुरू की। लेकिन इसी दौरान सरकारी एंबुलेंस सेवा की सुस्त व्यवस्था ने लोगों का गुस्सा और बढ़ा दिया।


परिजनों ने आरोप लगाया कि इमरजेंसी में मदद मांगने के बावजूद 102 एंबुलेंस सेवा की प्रक्रिया इतनी लंबी और जटिल रही कि बहुमूल्य समय बर्बाद हो गया। परिवार का कहना है कि कॉल सेंटर से लगातार नाम, जिला, अस्पताल, रेफर नंबर, डॉक्टर का नाम, घटना का विवरण और रिश्तेदारी जैसी कई जानकारियां मांगी जाती रहीं, जबकि मरीज की हालत लगातार बिगड़ती जा रही थी।


परिजनों के मुताबिक घायल को इमरजेंसी वार्ड के बाहर ही ऑक्सीजन की जरूरत थी, लेकिन एंबुलेंस की मंजूरी प्रक्रिया पूरी होने तक इंतजार करना पड़ा। इस देरी ने लोगों में भारी नाराजगी पैदा कर दी। स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले सरकारी एंबुलेंस सेवा अपेक्षाकृत बेहतर थी, लेकिन जब से यह व्यवस्था निजी कंपनी को सौंपी गई है, तब से हालात बदतर हो गए हैं।