BIHAR NEWS : नालंदा जिले के शीतला माता मंदिर में हुए दर्दनाक भगदड़ कांड ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। मंगलवार को हुए इस हादसे में 9 श्रद्धालुओं की मौत हो गई, जबकि कई लोग घायल बताए जा रहे हैं। घटना के बाद प्रशासन और पुलिस की कार्रवाई तेज हो गई है और मामले की गंभीरता को देखते हुए उच्च स्तरीय जांच शुरू कर दी गई है।
हादसे के बाद सामने आए नए सीसीटीवी फुटेज ने मामले को और गंभीर बना दिया है। फुटेज में साफ देखा जा सकता है कि भीड़ को नियंत्रित करने के बजाय कुछ लोगों द्वारा श्रद्धालुओं के साथ कथित तौर पर मारपीट की जा रही थी। इस व्यवहार के बाद स्थिति और अधिक बिगड़ गई और भीड़ बेकाबू हो गई।
4 पुजारी गिरफ्तार, 5 पुलिसकर्मी सस्पेंड
पुलिस ने कार्रवाई करते हुए अब तक 4 पुजारियों को गिरफ्तार किया है। इसके साथ ही ड्यूटी में लापरवाही बरतने के आरोप में 5 पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है। इस मामले में कुल 20 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है, जिनमें मंदिर समिति के पदाधिकारी और अन्य लोग शामिल हैं। जांच की जिम्मेदारी बिमलेश कुमार को सौंपी गई है, जो पूरे घटनाक्रम की बारीकी से जांच कर रहे हैं।
मंदिर प्रबंधन पर गंभीर आरोप
Shitala Mata Temple में हुई इस घटना को लेकर मंदिर प्रबंधन समिति पर गंभीर आरोप लगे हैं। दीपनगर थाना की पुलिस अधिकारी मौसमी कुमारी के लिखित आवेदन के आधार पर मंदिर समिति के अध्यक्ष, सचिव और कोषाध्यक्ष समेत कई लोगों पर प्राथमिकी दर्ज की गई है।
आरोप है कि मंदिर समिति द्वारा न तो किसी बड़े आयोजन या भीड़ की सूचना पुलिस को दी गई थी और न ही पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। साथ ही यह भी दावा किया गया है कि गर्भगृह के पास अवरोध खड़ा कर अवैध वसूली की जा रही थी।
कैसे हुआ पूरा हादसा
जानकारी के अनुसार, चैत्र महीने के अंतिम दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर में पूजा-अर्चना के लिए पहुंचे थे। भीड़ अधिक होने के कारण मंदिर के बाहर लंबी कतारें लग गईं और लोग अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे। इसी दौरान कथित तौर पर कुछ पुजारियों द्वारा पैसे लेकर पीछे के दरवाजे से लोगों को दर्शन कराने का मामला भी सामने आया। भीड़ नियंत्रण के लिए मंदिर परिसर में बांस और रस्सी की बैरिकेडिंग की गई थी, लेकिन जैसे-जैसे भीड़ बढ़ती गई, दबाव के कारण यह व्यवस्था कमजोर पड़ गई। अचानक रस्सी टूटने से लोग एक साथ गर्भगृह की ओर बढ़ने लगे।
स्थिति उस समय और बिगड़ गई जब प्रवेश द्वार पर धक्का-मुक्की शुरू हो गई। सीसीटीवी फुटेज के अनुसार, कुछ लोगों द्वारा भीड़ को नियंत्रित करने के बजाय लाठी-डंडों का इस्तेमाल किया गया, जिससे अफरा-तफरी फैल गई। इसके बाद लोग इधर-उधर भागने लगे और भगदड़ मच गई।
प्रशासन की कार्रवाई और जांच
घटना के तुरंत बाद प्रशासन ने इलाके को सील कर दिया और राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। पुलिस का कहना है कि प्राथमिक जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि यह हादसा पूरी तरह से कुप्रबंधन, लापरवाही और भीड़ नियंत्रण की विफलता का परिणाम है। अधिकारियों ने यह भी कहा है कि मंदिर में आयोजित भीड़ को लेकर पहले से कोई अनुमति या सूचना नहीं दी गई थी, जिससे सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह से कमजोर रही।
स्थानीय लोगों में आक्रोश
घटना के बाद स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। लोग मंदिर प्रबंधन और प्रशासन दोनों पर लापरवाही का आरोप लगा रहे हैं। मृतकों के परिजनों ने मुआवजे और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है और पुलिस ने आश्वासन दिया है कि दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। यह हादसा प्रशासनिक व्यवस्था और धार्मिक स्थलों पर भीड़ प्रबंधन को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है।






