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मुंगेर के ढोल पहाड़ी को इको टूरिज्म के रूप में किया जाएगा विकसित, 12.49 करोड़ रुपये की मिली मंजूरी

बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मुंगेर की ढोल पहाड़ी को इको टूरिज्म हब बनाने के लिए 12.49 करोड़ रुपये की मंजूरी दी। परियोजना से पर्यटन, रोजगार और स्थानीय व्यापार को बढ़ावा मिलेगा।

बिहार न्यूज
इको टूरिज्म हब बनाने की तैयारी
© सोशल मीडिया
Jitendra Vidyarthi
4 मिनट

MUNGER: मुंगेर के तारापुर अनुमंडल के असरगंज की ढोल पहाड़ी को इको टूरिज्म के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके लिए 12.49 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गयी है। यहां बैंक्वेट हॉल, हाट बाजार, क्राफ्ट शॉप्स और पिकनिक स्पॉट विकसित होंगे। सोलर लाइटिंग, रेन वाटर हार्वेस्टिंग और आधुनिक सुविधाओं पर जोर दिया गया है। इस परियोजना से पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी और स्थानीय रोजगार और व्यापार को बढ़ावा मिलेगा। बिहार के डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने कहा कि मुंगेर को विश्व पर्यटन मानचित्र पर लाने के लिए यह बड़ी पहल है। 


बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बताया कि मुंगेर जिले के असरगंज स्थित ढोल पहाड़ी को इको टूरिज्म के रूप में विकसित करने के लिए 1249.45 लाख रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई है। ढोल पहाड़ी को एक समग्र पर्यटन, धार्मिक और सामाजिक गतिविधियों के केंद्र के रूप में स्थापित किया जाएगा।


सम्राट चौधरी ने बताया कि ढोल पहाड़ी का ऐतिहासिक महत्व है। यह स्थान स्वतंत्रता संग्राम के दौरान क्रांतिकारियों का गुप्त अड्डा रहा है, जहां वे अंग्रेजों के खिलाफ रणनीति बनाते थे। अंग्रेजों के आने की सूचना क्रांतिकारी दूसरे क्रांतिकारियों को ढोल बजा कर देते थे। यहां स्थित बाबा मौनीनाथ मंदिर और प्राचीन गुफाएं इसकी धार्मिक और ऐतिहासिक पहचान है।


उपमुख्यमंत्री ने बताया कि इस परियोजना के तहत कई महत्वपूर्ण निर्माण कार्य किए जाएंगे। यहां सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए बैंक्वेट हॉल बनाया जाएगा। इसके अलावा पब्लिक टॉयलेट, हाट बाजार, क्राफ्ट शॉप्स और वेंडिंग जोन विकसित किए जाएंगे, जिससे स्थानीय व्यापार को बढ़ावा मिलेगा। पर्यटकों की सुविधा के लिए पार्किंग एरिया, पक्के रास्ते (पाथवे/ट्रेल) और बाहरी सौंदर्यीकरण का कार्य भी किया जाएगा।


परियोजना में मेला ग्राउंड और पिकनिक स्पॉट का विकास किया जाएगा, साथ ही ग्रीन बेल्ट और लैंडस्केपिंग के जरिए प्राकृतिक सुंदरता को और निखारा जाएगा। यहां सैंडस्टोन बेंच, आकर्षक प्रवेश द्वार, स्पोर्ट्स कोर्ट और बच्चों के लिए प्ले एरिया भी बनाए जाएंगे। धार्मिक आस्था को ध्यान में रखते हुए शिव प्रतिमा को स्थापित किया जाएगा और पर्यटकों के लिए ऑब्जर्वेशन डेक भी बनाया जाएगा।


विशेष सुविधाओं के तहत सोलर लाइटिंग, सोलर रूफटॉप, रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम, फायर फाइटिंग और आधुनिक विद्युत व्यवस्था विकसित की जाएगी। साथ ही पेयजल और सीवरेज सिस्टम को भी बेहतर बनाया जाएगा। इस पूरी परियोजना में प्राकृतिक संरचना को सुरक्षित रखते हुए सौंदर्यीकरण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।


सम्राट चौधरी ने कहा कि ढोल पहाड़ी पहले से ही धार्मिक और सामाजिक आयोजनों का केंद्र रहा है, लेकिन सुविधाओं की कमी के कारण इसका पूरा उपयोग नहीं हो पा रहा था। इस परियोजना के पूरा होने के बाद यहां नियमित हाट और कार्यक्रम आयोजित हो सकेंगे, जिससे पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।


उपमुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार सरकार पर्यटन, विशेषकर धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए लगातार काम कर रही है। गया में विष्णुपद मंदिर कॉरिडोर, बेगूसराय के सिमरिया घाट, वैशाली में बुद्ध सम्यक दर्शन संग्रहालय और अन्य प्रमुख स्थलों का विकास इसी दिशा में किया जा रहा है। 


सम्राट चौधरी ने कहा कि मुंगेर में स्थित बिहार योग विद्यालय जिसे दुनिया का पहला योग विश्वविद्यालय होने का गौरव प्राप्त है-वहां पूरी दुनिया से लोग आते हैं। मुंगेर में भीमबांध वन्यजीव अभयारण्य और हवेली खड़गपुर झील जैसे विश्वस्तरीय पर्यटन स्थल हैं और अब ढोल पहाड़ी को पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। जिससे योग विद्यालय आने वाले पर्यटकों को एक नया अनुभव मिलेगा। इसके साथ ही स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और व्यापार के अवसर भी बढ़ेंगे।

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रिपोर्टर / लेखक

Jitendra Vidyarthi

FirstBihar न्यूज़ डेस्क

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