KISHANGANJ: बिहार के किशनगंज ठाकुरगंज नगर पंचायत में भ्रष्टाचार का एक बड़ा मामला सामने आया है, जिसने सरकारी पारदर्शिता और स्थानीय प्रशासन की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वार्ड संख्या 09 में सड़क निर्माण के नाम पर ₹4,04,425 (चार लाख चार सौ पच्चीस रुपये) की अवैध निकासी का आरोप लगने के बाद पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है।
सूत्रों और जनप्रतिनिधि के पत्र के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2024-25 में पीसीसी सड़क निर्माण का काम कागजों पर पूरा दिखाकर राशि की निकासी कर ली गई, जबकि जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। मौके पर सड़क का कोई अस्तित्व नहीं है और न निर्माण के संकेत, न ही कार्य के कोई प्रमाण।
सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर इतनी बड़ी राशि की निकासी किसकी मिलीभगत से हुई? स्थानीय अधिकारियों और जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों की भूमिका अब संदेह के घेरे में है। क्या बिना अंदरूनी सेटिंग के सरकारी खजाने से इस तरह पैसा निकाला जा सकता है? सरकार जहां एक ओर पारदर्शिता और विकास के दावे करती है, वहीं इस तरह के मामले उन दावों को कटघरे में खड़ा कर रहे हैं। यह सिर्फ एक वार्ड का मामला नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल है।
नगर पंचायत के पूर्व अध्यक्ष प्रमोद कुमार चौधरी ने इस मामले को जनता के साथ सीधा धोखा बताया है। उनका कहना है कि जिस पैसे से विकास होना था, वही पैसा अगर इस तरह गायब हो जाए, तो यह बेहद गंभीर मामला है।
अब जनता पूछ रही है—
₹4,04,425 की इस राशि में आखिर किस-किस का हिस्सा है?
कौन हैं वो लोग जिन्होंने कागजों पर सड़क बनाकर पैसा निकाल लिया?
स्थानीय लोगों में आक्रोश है और वे इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग कर रहे हैं। साथ ही दोषियों पर कड़ी कार्रवाई और हर एक पैसे का हिसाब लेने की मांग तेज हो गई है।
बड़ा सवाल:
क्या ठाकुरगंज में विकास सिर्फ कागजों तक सीमित है?
क्या जनता के पैसे की लूट पर लगेगा ब्रेक?
या फिर फाइलों में ही दब जाएगा पूरा मामला?





