Hindi News / bihar / lakhisarai-news / Kiul River : उफनती नदी के बीच जारी पूजा-अर्चना, जान जोखिम में डालकर...

Kiul River : उफनती नदी के बीच जारी पूजा-अर्चना, जान जोखिम में डालकर यज्ञ मंडप पहुंच रहे भक्त; प्रशासन और श्रद्धालुओं के बीच बढ़ी टेंशन

जमुई डैम से पानी छोड़े जाने के बाद किऊल नदी उफान पर है। प्रशासन ने सूर्य नारायण घाट पर चल रहे यज्ञ पर रोक लगा दी है, लेकिन श्रद्धालु जान जोखिम में डालकर नदी पार कर पूजा-अर्चना के लिए पहुंच रहे हैं।

1st Bihar Published by: First Bihar Updated May 09, 2026, 10:35:31 AM

Kiul River : उफनती नदी के बीच जारी पूजा-अर्चना, जान जोखिम में डालकर यज्ञ मंडप पहुंच रहे भक्त;  प्रशासन और श्रद्धालुओं के बीच बढ़ी टेंशन

- फ़ोटो

Kiul River : किऊल नदी में अचानक बढ़े जलस्तर ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। जमुई स्थित डैम से पानी छोड़े जाने के बाद नदी उफान पर है और हालात इतने गंभीर हो गए हैं कि प्रशासन को सूर्य नारायण घाट पर चल रहे यज्ञ को तत्काल रोकना पड़ा। हालांकि प्रशासन की तमाम कोशिशों के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था थमती नजर नहीं आ रही है। लोग अपनी जान जोखिम में डालकर तेज बहाव वाली नदी को पार कर यज्ञ मंडप तक पहुंच रहे हैं।


दरअसल, वैशाख महीने में आमतौर पर सूखी रहने वाली किऊल नदी इस समय पूरी तरह उफान पर है। शुक्रवार की दोपहर और देर रात जमुई डैम से भारी मात्रा में पानी छोड़े जाने के कारण नदी का जलस्तर अचानक बढ़ गया। तेज धार और बढ़ते बहाव ने सूर्य नारायण घाट तक पहुंचने वाले रास्ते को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है। यज्ञ स्थल तक जाने वाला कच्चा रास्ता टूट चुका है और वहां तेज गति से पानी बह रहा है।


स्थिति की गंभीरता को देखते हुए एसडीओ प्रभाकर कुमार ने तत्काल कार्रवाई करते हुए यज्ञ कार्यक्रम पर रोक लगाने का आदेश दिया। इसके बाद अंचलाधिकारी अजय राठौर और स्थानीय थाना पुलिस मौके पर पहुंची और यज्ञ स्थल को बंद करा दिया। प्रशासन ने पूरे इलाके में बैरिकेडिंग भी कर दी है ताकि कोई व्यक्ति नदी पार कर यज्ञ स्थल तक न पहुंच सके।


लेकिन आस्था के आगे प्रशासनिक सख्ती कमजोर पड़ती दिखाई दे रही है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु बैरिकेडिंग पार कर उफनती नदी में उतर रहे हैं। कई लोग पानी के तेज बहाव के बीच पैदल ही नदी पार कर यज्ञ मंडप तक पहुंच रहे हैं। श्रद्धालुओं का कहना है कि यह भगवान सूर्य नारायण की परीक्षा है और वे अपनी श्रद्धा और विश्वास के बल पर इसे पार करेंगे।


कुछ श्रद्धालु इसे चमत्कार भी मान रहे हैं। उनका कहना है कि वैशाख की भीषण गर्मी में जहां नदी में धूल उड़ती थी, वहां आज लहरें उठ रही हैं। लोगों के बीच इस घटना को लेकर धार्मिक भावनाएं और भी प्रबल हो गई हैं। हालांकि प्रशासन लगातार लोगों को समझाने की कोशिश कर रहा है कि यह आस्था नहीं बल्कि जान जोखिम में डालने जैसा कदम है।


अनुमंडलाधिकारी प्रभाकर कुमार ने साफ कहा है कि लोगों की सुरक्षा प्रशासन की पहली प्राथमिकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए घाट और यज्ञ स्थल पर पुलिस बल की तैनाती कर दी गई है। थाना प्रभारी को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी हालत में लोगों को नदी पार नहीं करने दिया जाए। प्रशासन ने यह भी चेतावनी दी है कि डैम से और पानी छोड़ा जा सकता है, जिससे नदी का जलस्तर और बढ़ सकता है।


स्थानीय प्रशासन लगातार माइकिंग कर लोगों से अपील कर रहा है कि वे नदी के पास न जाएं और अपनी सुरक्षा का ध्यान रखें। बावजूद इसके श्रद्धालुओं की भीड़ कम होने का नाम नहीं ले रही है। ऐसे में प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती किसी भी अप्रिय घटना को रोकना बन गई है। फिलहाल पूरे इलाके में तनाव और चिंता का माहौल है। प्रशासन सतर्क है, सुरक्षा बल तैनात हैं, लेकिन आस्था और सुरक्षा के बीच संघर्ष लगातार जारी है।