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Success Story : बिहार के छोटे गांव से अमेरिका की AI रिसर्च लैब तक, पढ़िए सत्यम कुमार की प्रेरणादायक कहानी

Success Story : बक्सर के बखोरापुर गांव से निकलकर अमेरिका की एआई रिसर्च लैब तक का सफर तय करने वाले सत्यम कुमार की कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है।

Success Story : बिहार के छोटे गांव से अमेरिका की AI रिसर्च लैब तक, पढ़िए सत्यम कुमार की प्रेरणादायक कहानी
Tejpratap
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Success Story : बक्सर जिले के बखोरापुर गांव के किसान परिवार से आने वाले सत्यम कुमार की कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है। आज जब पूरी दुनिया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के भविष्य को लेकर तेज़ी से आगे बढ़ रही है, तब सत्यम ने अमेरिका की प्रमुख AI रिसर्च लैब में अपनी पहचान बनाकर साबित कर दिया है कि प्रतिभा और मेहनत से इंसान किसी भी मुकाम को हासिल कर सकता है।


13 साल की उम्र में IITian बनने का गौरव

सत्यम कुमार ने 2012 में महज 13 साल की उम्र में JEE (आईआईटी प्रवेश परीक्षा) पास कर IIT कानपुर में बीटेक-एमटेक डुअल डिग्री कोर्स में प्रवेश लिया। उस समय वे IIT कानपुर के सबसे कम उम्र के छात्र थे। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने 2011 में भी JEE परीक्षा पास की थी, लेकिन रैंक अधिक होने के कारण उन्होंने 2012 में पुनः परीक्षा दी और 670वीं रैंक हासिल कर IIT में दाखिला लिया।


दबाव के बीच भी नहीं हारी हिम्मत

आईआईटी कानपुर में सबसे कम उम्र के छात्र होने के कारण सत्यम पर काफी दबाव था। लेकिन उन्होंने अपने लक्ष्य को कभी पीछे नहीं हटने दिया और पूरी लगन से पढ़ाई में ध्यान दिया। 2018 में उन्होंने बीटेक और एमटेक दोनों की पढ़ाई पूरी की और उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका की ओर रुख किया।


24 साल की उम्र में PhD पूरी कर विश्व रिकॉर्ड जैसा कारनामा

सत्यम ने University of Texas at Austin से इलेक्ट्रिकल और कंप्यूटर इंजीनियरिंग में PhD की। यह उपलब्धि खास इसलिए है क्योंकि 24 साल की उम्र में डॉक्टरेट की डिग्री हासिल करना अपने आप में बहुत बड़ी उपलब्धि है। उस उम्र में जहां कई लोग अपना करियर शुरू करने की सोचते हैं, सत्यम पहले ही अपनी रिसर्च और शिक्षा के क्षेत्र में आगे निकल चुके थे।


अब वे हैं अमेरिका में AI Researcher

आज सत्यम अमेरिका की एक प्रमुख टेक कंपनी में AI Researcher के रूप में कार्यरत हैं। उनका मुख्य काम मशीन लर्निंग और AI के जटिल एल्गोरिदम पर रिसर्च करना है। वे AI को ज्यादा सुरक्षित, भरोसेमंद और उपयोगी बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं। सत्यम का मानना है कि आने वाला समय पूरी तरह से AI का है। भारत को इस क्षेत्र में अग्रणी बनने के लिए युवाओं की प्रतिभा को सही दिशा में मार्गदर्शन देने की जरूरत है।


सफलता का राज: मेहनत और दृढ़ इच्छाशक्ति

सत्यम की सफलता का राज उनकी कड़ी मेहनत, अनुशासन और दृढ़ इच्छाशक्ति है। उनका मानना है कि उम्र सिर्फ एक संख्या है। अगर आपके पास सही मार्गदर्शन और मेहनत करने की लगन है, तो आप किसी भी क्षेत्र में अपना नाम बना सकते हैं।


बक्सर के एक छोटे से गांव से निकलकर अमेरिका की AI रिसर्च लैब तक पहुंचने वाले सत्यम कुमार की कहानी न सिर्फ बिहार बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणा है। उनकी यह सफलता यह संदेश देती है कि सही दिशा और मेहनत से कोई भी सपना सच किया जा सकता है।

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Tejpratap

FirstBihar न्यूज़ डेस्क

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