Bihar News: राजधानी पटना गांधी मैदान में इलाके बड़े कारोबारी गोपाल खेमका की हत्य़ा से खलबली मच गई है. सुशासन की सरकार कटघरे में है. पुलिस के इकबाल पर सवाल खड़े होने लगे हैं. आमलोगों में भय व्याप्त हो गया है.पटना में बड़े कारोबारी की हत्या के बाद नीतीश सरकार को घेरने का विपक्षी दलों को एक और मौका मिल गया है. कांग्रेस ने कहा है कि एक समय था जब पूरा बिहार शांति, सद्भाव, ज्ञान और तप की स्थली के रूप में जाना जाता था, लेकिन यहां आज गुंडों की गोलियां आग उगल रही हैं।
बिहार कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष व राज्यसभा सांसद अखिलेश प्रसाद सिंह ने सूबे की कानून व्यवस्था पर प्रेस कांफ्रेंस कर नीतीश सरकार को घेरा है. उन्होंने कहा कि एक तरफ- ADG लॉ एंड ऑर्डर कहते हैं कि पुलिस पर बढ़ते हमले चिंता का विषय हैं। दूसरी तरफ पटना में तेजस्वी यादव के आवास के पास अपराधी गोलियां चलाते हैं, जो आजतक पकड़ से बाहर हैं। आज नाबालिग बच्चियों के साथ लगातार बलात्कार हो रहा है, पुलिस वालों को मौत के घाट उतार दिया जा रहा है। अकेले पटना में इस साल में 116 हत्या, 41 बलात्कार की घटनाएं हुईं हैं।
उन्होंने कहा कि बीते साल पुलिस मुख्यालय की ओर से जारी आंकड़े में कहा गया कि 151 दिनों में पुलिस पर 1,297 बार हमले हुए हैं।NCRB के अनुसार- जहां 2005 में बिहार में कुल अपराध की संख्या 1,60,664 थी, वहीं 2022 में यह संख्या बढ़कर 3,47,835 हो गई। यानी इस संख्या में 323% की वृद्धि हुई है। हत्याओं के मामले में उत्तर प्रदेश के बाद बिहार का नंबर आता है। NDA के शासन में 17 साल में 53,000 हजार से ज्यादा हत्या के मामले दर्ज किये गए, हत्या के प्रयास के मामले में भी बिहार देश में दूसरे नंबर पर है और कुल 98,169 घटनाएं दर्ज हुईं, जो 262% की वृद्धि है।
बिहार में जघन्य अपराध (हत्या, रेप, अपहरण, फिरौती, डकैती) के मामलों में भी 226% की वृद्धि हुई है। 17 साल में 5,59,413 मामले दर्ज हुए हैं।बिहार में 2,21,729 महिलाएं अपराध का शिकार बनीं और महिला अपराध के मामलों में 336% की वृद्धि हुई है। महिलाओं के अपहरण मामलों में 1097% और बच्चों के खिलाफ अपराध में 7062% की भयावह वृद्धि हुई है।दलित अपराध के मामले में बिहार, उत्तर प्रदेश के बाद दूसरे नंबर पर हैं।


