BHOJPUR: जनता दल यूनाइटेड (JDU) के दफ्तर के बाहर लगाये गये पीएम मोदी के पोस्टर को लेकर जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर ( PK) ने तंज कसते हुए कहा है कि नवंबर के बाद जदयू दफ्तर भी भाजपा का हो जाएगा, चुनाव बाद न तो नीतीश CM रहेंगे न जदयू नाम की कोई पार्टी ही बचेगी। उन्होंने कहा कि बिहार विधानसभा चुनाव में NDA और जन सुराज के बीच सीधी लड़ाई होने वाली है।
जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर अपनी 'बिहार बदलाव यात्रा' के तहत लगातार अलग-अलग जिलों और प्रखंडों में लोगों से संवाद कर रहे हैं और स्थानीय पत्रकारों से भी बात कर रहे हैं। इसी कड़ी में आज उन्होंने भोजपुर के अगिआँव और चरपोखरी प्रखंड में आयोजित बिहार बदलाव सभा को संबोधित किया। उनकी पहली सभा अगिआँव के नारायणपुर गांव और दूसरी सभा चरपोखरी के मलौर गांव में आयोजित हुई।
बिहार में डबल इंजन की सरकार होने के बावजूद बिहार के सैकड़ों बच्चों के शरीर पर सूती कपड़ा या पैरों में चप्पल नहीं है: प्रशांत किशोर
अपने संबोधन में प्रशांत किशोर ने कहा कि मैं पिछले 3 सालों से बिहार के गांव-गांव घूम रहा हूं लेकिन बच्चों के शरीर पर सूती कपड़ा या पैरों में चप्पल नहीं है। इसीलिए आपको अपने बच्चों की चिंता करनी है, कोई नेता आपके बच्चों की चिंता नहीं करेगा। उन्होंने उदाहरण देते हुए समझाया कि बिहार के लोगों को लालू जी से सीखना चाहिए कि बच्चों की चिंता क्या होती है। उन्होंने कहा कि लालू जी का बेटा 9वीं पास भी नहीं किया है, फिर भी वह चाहते हैं कि उनका बेटा राजा बने और दूसरी तरफ बिहार के लोग जिनके बच्चे मैट्रिक, बी.ए. (B.A), एम.ए. (M.A) कर चुके हैं, फिर भी उन्हें नौकरी नहीं मिल रही है।
जनसभा के बाद पत्रकारों से बात करते हुए प्रशांत किशोर ने जदयू कार्यालय में मोदी और नीतीश जी की एक साथ तस्वीर लगाए जाने पर बड़ा दावा करते हुए कहा कि नवंबर के बाद जदयू दफ्तर भी भाजपा का हो जाएगा। उन्होंने कहा कि नवंबर के बाद न तो नीतीश कुमार बिहार के मुख्यमंत्री रहेंगे और न ही जदयू कोई पार्टी बचेगी। जदयू और भाजपा दोनों ही NDA गठबंधन का हिस्सा हैं और जब जदयू कमजोर हो रही है तो भाजपा उस पर कब्जा जरूर करेगी। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि आने वाले चुनाव में NDA और जन सुराज के बीच सीधी लड़ाई होने वाली है। बिहार की जनता परेशान है। बिहार बदलाव चाहता है। अब जनता को न तो नीतीश कुमार का अफसर राज चाहिए और न ही लालू जी का जंगलराज, अब उन्हें अपने बच्चों के लिए शिक्षा और रोजगार चाहिए।




