Bihar Board Matric Result 2026: बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) द्वारा जारी मैट्रिक परीक्षा 2026 के परिणाम में सुपौल जिले के दो छात्रों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए स्टेट टॉप-10 में जगह बनाकर जिले का मान बढ़ाया है। दोनों छात्रों की सफलता से पूरे जिले में खुशी और गर्व का माहौल है। इनमें से एक राजदीप के पिता पंक्चर बनाते हैं तो जबकि दूसरा छात्र अनुज के माता-पिता शिक्षक और शिक्षिका हैं।
सुपौल जिले के राघोपुर प्रखंड क्षेत्र के रामविशनपुर पंचायत के हुसेनाबाद वार्ड 10 निवासी राजदीप कुमार ने बिहार मैट्रिक परीक्षा में स्टेट टॉप टेन में छठा स्थान प्राप्त कर जिले का नाम रौशन किया है। राजदीप एक बेहद साधारण और गरीब परिवार से आते हैं। उनके पिता बिरेंद्र मंडल साइकिल पम्पचर की छोटी दुकान चलाते हैं और खेती-बाड़ी से भी जुड़े हैं, जबकि मां रेणु देवी गृहणी हैं। चार भाइयों में तीसरे स्थान पर रहने वाले राजदीप ने खूबलाल उत्क्रमित उच्च माध्यमिक विद्यालय, रामविशनपुर से पढ़ाई की है।
उन्होंने कुल 485 अंक (97%) हासिल किए हैं। गणित में 100 में 100 अंक, विज्ञान में 98, हिंदी व संस्कृत में 96-96 तथा सामाजिक विज्ञान में 95 अंक प्राप्त कर उन्होंने अपनी मेहनत का परचम लहराया। राजदीप ने बताया कि वे गांव में रहकर रोजाना करीब 10 घंटे पढ़ाई करते थे। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता और गुरुजनों को दिया है। आगे उनका लक्ष्य आईआईटी से इंजीनियरिंग करने का है। पिता बिरेंद्र मंडल ने कहा कि राजदीप बचपन से ही पढ़ाई में मेधावी और मेहनती रहा है। कई बार उसे लगातार पढ़ते देख चिंता भी होती थी। बेटे की इस उपलब्धि से परिवार के साथ-साथ पूरे गांव में खुशी का माहौल है। राजदीप की सफलता ने यह साबित कर दिया कि कठिन परिस्थितियों में भी मेहनत और लगन से बड़ी उपलब्धि हासिल की जा सकती है।
वहीं जिले के छातापुर प्रखंड के भीमपुर वार्ड 14 निवासी अनुज कुमार ने 481 अंक (96.2%) प्राप्त कर राज्य में दसवां स्थान हासिल किया है। अनुज ने उत्क्रमित उच्च माध्यमिक विद्यालय, भीमपुर से अपनी दसवीं की पढ़ाई पूरी की है। उन्होंने बिना किसी बड़े कोचिंग संस्थान के घर पर रहकर ही स्वअध्ययन के माध्यम से यह सफलता अर्जित की है। अनुज ने बताया कि वे रोजाना 7 से 8 घंटे पढ़ाई करते थे और नियमित अभ्यास को ही अपनी सफलता का मुख्य आधार मानते हैं। उन्होंने अपनी उपलब्धि का श्रेय माता-पिता और शिक्षकों को दिया है। अनुज के पिता हरिनारायण सिंह शिक्षक हैं तथा माता भी शिक्षिका हैं,जिनका मार्गदर्शन उन्हें लगातार मिलता रहा। अनुज का लक्ष्य डॉक्टर बनना है और वे आगे चलकर नीट (NEET) की तैयारी करना चाहते हैं। दोनों छात्रों की इस उपलब्धि ने यह साबित कर दिया है कि कठिन परिस्थितियों में भी मेहनत, अनुशासन और लगन से बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है।








