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भोजपुर में बालू भंडारण पर बड़ा सवाल ! कैपिंग से अधिक स्टॉक की शिकायत, खनन विभाग के प्रधान सचिव से उच्चस्तरीय जांच की मांग

भोजपुर के बालू घाटों के सेकेंडरी स्टॉकयार्ड में निर्धारित सीमा से अधिक बालू भंडारण और बिना सत्यापन बिक्री की अनुमति देने का आरोप लगा है। ट्रक ऑनर एसोसिएशन ने खनन विभाग के प्रधान सचिव से उच्चस्तरीय जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।

1st Bihar Published by: Viveka Nand Updated Jul 04, 2026, 12:38:14 PM

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Bihar News: बिहार सरकार के लाख कोशिश के बाद भी बालू का अवैध कारोबार पर लगाम नहीं लग सका. बालू का अवैध तरीके से खनन,परिवहन के खेल में बड़े माफिया शामिल होते हैं. अधिकारियों का अपरोक्ष तौर पर समर्थन होता है. भोजपुर में भी बालू भंडारण में बड़े स्तर पर गड़बड़ी करने की शिकायत मिल रही है. इसके बाद खनन विभाग से लिखित शिकायत की गई है. 

ट्रक ऑनर एसोसिएशन, भोजपुर के जिलाध्यक्ष अजय कुमार ने इस संबंध में खनन विभाग के प्रधान सचिव से शिकायत की है. कहा गया है कि भोजपुर जिले में संचालित विभिन्न बालू घाटों के संचालकों द्वारा खनन कार्य बंद रहने की अवधि में सेकेंडरी स्टॉकयार्ड (सेकेंडरी प्वाइंट) पर बड़े पैमाने पर बालू का भंडारण किया गया है। इस संबंध में व्यापक स्तर पर यह आशंका व्यक्त की जा रही है कि कई स्थानों पर निर्धारित कैपिंग (अनुमेय भंडारण सीमा) से अधिक मात्रा में बालू का भंडारण किया गया है।

जानकारी के अनुसार, संबंधित बालू भंडारों से बिक्री की अनुमति प्रदान कर दी गई है। किंतु यह स्पष्ट नहीं है कि बिक्री की अनुमति देने से पूर्व प्रत्येक सेकेंडरी स्टॉकयार्ड पर भंडारित बालू की वास्तविक मात्रा का भौतिक सत्यापन एवं कैपिंग के अनुरूप विधिवत परीक्षण कराया गया अथवा नहीं। ऐसी स्थिति में नियमों के उल्लंघन की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

यह भी जानकारी प्राप्त हुई है कि भंडारण की जांच 10 जून को कराई गई थी, जबकि 15 जून तक विभिन्न सेकेंडरी स्टॉकयार्डों में लगातार बालू का भंडारण होता रहा। यदि यह तथ्य सही है, तो 10 जून की जांच रिपोर्ट के आधार पर बाद में भंडारित अतिरिक्त बालू को शामिल किए बिना बिक्री की अनुमति देना नियमों की पारदर्शिता एवं वैधानिक प्रक्रिया पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। निष्पक्ष जांच से वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

ऐसे में भोजपुर जिले के सभी बालू घाटों के सेकेंडरी स्टॉकयार्ड में भंडारित बालू की मात्रा की किसी स्वतंत्र एवं उच्चस्तरीय समिति अथवा सक्षम तकनीकी टीम से पुनः भौतिक जांच कराई जाए। साथ ही यदि जांच में निर्धारित सीमा से अधिक भंडारण, नियमों का उल्लंघन अथवा किसी प्रकार की प्रशासनिक अनियमितता पाई जाती है, तो संबंधित बालू घाट संचालकों एवं दोषी अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। जनहित, राजस्व हित एवं खनन नियमों की पारदर्शिता बनाए रखने के उद्देश्य से इस प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाए.