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बिहार पंचायत चुनाव 2026: आरक्षण रोस्टर में बड़े बदलाव की संभावना, अंतिम सूची पर टिकी उम्मीदवारों की नजर

Bihar Panchayat Election 2026: बिहार पंचायत चुनाव 2026 से पहले आरक्षण रोस्टर को लेकर हलचल तेज है। कई पंचायतों में 10 साल बाद आरक्षण श्रेणियों में बदलाव की संभावना है, जिससे चुनावी समीकरण प्रभावित होंगे।

1st Bihar Published by: FIRST BIHAR Updated Jul 04, 2026, 1:19:12 PM

Bihar Panchayat Election 2026

बिहार पंचायत चुनाव 2026 - फ़ोटो Google

Bihar Panchayat Election 2026: बिहार पंचायत चुनाव 2026 की तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच रही हैं। हालांकि चुनाव की तारीखों का अभी ऐलान नहीं हुआ है, लेकिन गांवों में चुनावी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। इस बार सबसे ज्यादा चर्चा पंचायतों के आरक्षण रोस्टर को लेकर है। माना जा रहा है कि करीब 10 साल बाद कई पंचायतों में आरक्षण की श्रेणियां बदल सकती हैं, जिससे चुनावी समीकरण पूरी तरह बदलने की संभावना है।


आरक्षण रोस्टर का सीधा असर मुखिया, सरपंच, पंचायत समिति सदस्य, जिला परिषद सदस्य, वार्ड सदस्य और पंच जैसे प्रमुख पदों के चुनाव पर पड़ेगा। इसी कारण मौजूदा जनप्रतिनिधियों से लेकर नए दावेदारों तक सभी की नजर अंतिम आरक्षण सूची पर टिकी हुई है।


पंचायत राज नियमों के अनुसार पंचायतों में आरक्षण स्थायी नहीं होता, बल्कि रोटेशन सिस्टम के तहत तय किया जाता है। पिछली बार वर्ष 2016 में आरक्षण रोस्टर लागू किया गया था। अब 2026 में नया चक्र पूरा होने के कारण कई पंचायतों में आरक्षण बदलने की संभावना है। ऐसे में कई सामान्य सीटें आरक्षित हो सकती हैं, जबकि कुछ आरक्षित सीटें सामान्य वर्ग के लिए खुल सकती हैं।


पंचायत चुनाव में निम्नलिखित पदों के लिए मतदान कराया जाएगा, जिनका आरक्षण पंचायतवार तय होगा—

मुखिया

सरपंच

पंचायत समिति सदस्य

जिला परिषद सदस्य

वार्ड सदस्य

पंच


सूत्रों के अनुसार इस बार भी पंचायतों का आरक्षण वर्ष 2011 की जनगणना के आंकड़ों के आधार पर तैयार किया जा रहा है। नई जनगणना के आंकड़े उपलब्ध नहीं होने के कारण फिलहाल पुराने आंकड़ों का ही उपयोग किया जाएगा। जिला स्तर पर पंचायतवार डेटा पोर्टल पर अपलोड किया जा रहा है, जिसके बाद नियमानुसार आरक्षण रोस्टर तैयार कर अंतिम सूची जारी की जाएगी।


अंतिम आरक्षण सूची जारी होने से पहले ही बिहार के लगभग सभी जिलों में संभावित उम्मीदवार सक्रिय हो गए हैं। गांव-गांव जाकर लोगों से मुलाकात की जा रही है, सामाजिक कार्यक्रमों में भागीदारी बढ़ गई है और पंचायत स्तर की बैठकों में संभावित उम्मीदवार लगातार नजर आ रहे हैं। हालांकि अधिकांश दावेदार अभी चुनाव लड़ने की औपचारिक घोषणा नहीं कर रहे हैं। उनका कहना है कि अंतिम आरक्षण सूची आने के बाद ही चुनाव लड़ने का फैसला किया जाएगा।


आरक्षण में संभावित बदलाव ने वर्तमान मुखिया, सरपंच, पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद सदस्यों की चिंता भी बढ़ा दी है। कई जनप्रतिनिधियों को आशंका है कि उनकी सीट किसी दूसरे वर्ग के लिए आरक्षित हो सकती है। ऐसी स्थिति में उन्हें नई चुनावी रणनीति बनानी पड़ सकती है या फिर किसी दूसरे क्षेत्र से चुनाव लड़ने पर विचार करना होगा।


राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि इस बार बड़े स्तर पर आरक्षण में बदलाव होता है तो कई पंचायतों में नए चेहरे उभरकर सामने आएंगे, जबकि कई पुराने नेताओं के लिए चुनाव पहले की तुलना में अधिक चुनौतीपूर्ण हो जाएगा। अंतिम आरक्षण सूची जारी होने के बाद गांवों में जनसभाएं, बैठकों और चुनावी प्रचार में तेजी आने की संभावना है। फिलहाल सभी की नजर राज्य निर्वाचन आयोग और पंचायत राज विभाग द्वारा जारी की जाने वाली अंतिम आरक्षण सूची पर टिकी है। इसी सूची के बाद बिहार पंचायत चुनाव 2026 की तस्वीर काफी हद तक स्पष्ट हो जाएगी।