1st Bihar Published by: First Bihar Updated Jul 03, 2026, 10:49:08 AM
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Bihar Police : बिहार के आरा में चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले के बाद अब भोजपुर के लापता दलित युवक सनोज कुमार का मामला भी गंभीर सवालों के घेरे में है। पटना हाईकोर्ट की सख्ती के बाद इस केस में बड़ी कार्रवाई करते हुए उत्पाद विभाग के दो एएसआई, तीन होमगार्ड जवान और एक निजी चालक को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। मामले की जांच अब हाईकोर्ट की निगरानी में आगे बढ़ेगी, जबकि पीड़ित परिवार को सुरक्षा भी उपलब्ध करा दी गई है।
दरअसल, बिहिया थाना क्षेत्र के गंज गांव निवासी सनोज कुमार को 13 अगस्त 2025 को उत्पाद विभाग की टीम ने हिरासत में लिया था। इसके बाद से वह रहस्यमय तरीके से लापता है। उत्पाद पुलिस का दावा है कि रास्ते में जाम लगने के दौरान वह वाहन से फरार हो गया था, लेकिन जांच के दौरान सामने आए तथ्यों ने इस दावे पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
छह पुलिसकर्मी और चालक गिरफ्तार
इस मामले में गिरफ्तार किए गए लोगों में एएसआई धीरज कुमार सिंह, एएसआई राज कुमार, होमगार्ड जवान राजू सिंह, उमेश यादव, धर्मेंद्र पासवान तथा उत्पाद विभाग का निजी चालक विकास सिंह शामिल हैं। सभी उस समय जगदीशपुर उत्पाद थाने में तैनात थे। कोर्ट में पेशी के बाद सभी को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। पुलिस एक अन्य संदिग्ध कर्मी से भी पूछताछ कर रही है। भोजपुर के पुलिस अधीक्षक राज ने गिरफ्तारी की पुष्टि करते हुए बताया कि तकनीकी और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर जांच जारी है तथा सनोज कुमार की तलाश के लिए लगातार कार्रवाई की जा रही है।
पुलिस की कहानी पर उठे सवाल
उत्पाद विभाग का कहना है कि गिरफ्तार किए गए युवकों को वाहन से ले जाया जा रहा था। इसी दौरान बिहिया चौराहे पर जाम लगा और पीछे बैठा एक युवक दरवाजा खोलकर अंधेरे का फायदा उठाते हुए फरार हो गया। हालांकि इस दावे पर कई सवाल उठ रहे हैं। यदि युवक पुलिस हिरासत से भागा था तो तत्काल स्थानीय थाने में एफआईआर या सनहा क्यों दर्ज नहीं कराया गया? इसके अलावा सनोज का मोबाइल फोन पुलिस के कब्जे से कैसे बरामद हुआ, जबकि युवक कथित रूप से फरार बताया गया था। यही वजह है कि जांच एजेंसियां अब पूरे घटनाक्रम को संदेह की नजर से देख रही हैं।
भाई ने सुनाई आखिरी बातचीत
सनोज कुमार के भाई निरंजन कुमार ने बताया कि गिरफ्तारी के बाद उनके भाई ने फोन कर कहा था कि आबकारी पुलिस ने उसे पकड़ लिया है। कुछ देर बाद दोबारा बात हुई तो वह रो रहा था और उसने कहा कि बार-बार फोन मत करो, पुलिस बहुत मार रही है। इसके बाद उसका मोबाइल बंद हो गया और फिर उससे कोई संपर्क नहीं हो सका। परिजनों का कहना है कि काफी तलाश के बाद भी जब सनोज का कोई सुराग नहीं मिला तो उन्होंने पुलिस अधिकारियों से गुहार लगाई, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद परिवार ने पटना हाईकोर्ट का रुख किया।
हाईकोर्ट ने दिए सख्त निर्देश
मामले की सुनवाई के दौरान पटना हाईकोर्ट की खंडपीठ ने भोजपुर के डीएम, एसपी और अन्य अधिकारियों से जवाब तलब किया। अदालत ने पीड़ित परिवार को तत्काल सुरक्षा देने का निर्देश दिया और स्पष्ट किया कि इस मामले में सबसे बड़ी प्राथमिकता सनोज कुमार की बरामदगी और उसके गायब होने की सच्चाई सामने लाना है।
सुनवाई के दौरान एसपी ने अदालत को बताया कि संदेह के घेरे में आए सात लोगों में से छह को गिरफ्तार कर लिया गया है। वहीं कोर्ट ने सीसीटीवी फुटेज का हवाला देते हुए पुलिस की उस थ्योरी पर भी सवाल उठाए, जिसमें दावा किया गया था कि युवक बंद बोलेरो वाहन का पिछला दरवाजा खोलकर भाग गया था। अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया यह दावा संदेहास्पद प्रतीत होता है।
अब इस पूरे मामले की मॉनिटरिंग खुद पटना हाईकोर्ट करेगा, जबकि जांच की निगरानी भोजपुर के एसपी को सौंपी गई है। पुलिस तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर सनोज कुमार की तलाश में जुटी है। इस मामले ने एक बार फिर पुलिस हिरासत और जवाबदेही को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी है।