ब्रेकिंग
पटना में महिला के साथ ऑटो में सामूहिक दुष्कर्म, खाना बनाने के बहाने बुलाकर की हैनानियतबिहार में भी हाईवे पर एयरक्राफ्ट उतरने की तैयारी, इन तीन सड़कों पर ELF की सुविधा होगी बहालदेशभर में 1 अप्रैल से नए नियम लागू: ATM, टैक्स, LPG और रेलवे टिकट समेत 8 बड़े बदलाव, जानिए.. क्या होगा असर?बिहार सरकार के अधिकारियों ने सार्वजनिक की संपत्ति: मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत से अमीर उनकी पत्नी, DGP विनय कुमार कितने धनवान?बिहार में मौसम का बड़ा बदलाव: आंधी-बारिश के बाद अब बढ़ेगी गर्मी, पारा 40 डिग्री पार जाने का अलर्टपटना में महिला के साथ ऑटो में सामूहिक दुष्कर्म, खाना बनाने के बहाने बुलाकर की हैनानियतबिहार में भी हाईवे पर एयरक्राफ्ट उतरने की तैयारी, इन तीन सड़कों पर ELF की सुविधा होगी बहालदेशभर में 1 अप्रैल से नए नियम लागू: ATM, टैक्स, LPG और रेलवे टिकट समेत 8 बड़े बदलाव, जानिए.. क्या होगा असर?बिहार सरकार के अधिकारियों ने सार्वजनिक की संपत्ति: मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत से अमीर उनकी पत्नी, DGP विनय कुमार कितने धनवान?बिहार में मौसम का बड़ा बदलाव: आंधी-बारिश के बाद अब बढ़ेगी गर्मी, पारा 40 डिग्री पार जाने का अलर्ट

ये कैसी सरस्वती पूजा ? भटके विद्यार्थियों को शिक्षित होने की जरूरत : शैलेश कुमार राय

PATNA : एक समय था जब छात्रों का एक हिस्सा सरस्वती पूजा का आयोजन करता था, लेकिन समय के साथ पूजा-पाठ का प्रारूप भी बदल गया. अब हरेक चौक-चौराहों पर पूजा होती है. बड़े-बड़े पंडालों

ये कैसी सरस्वती पूजा ? भटके विद्यार्थियों को शिक्षित होने की जरूरत : शैलेश कुमार राय
First Bihar
|
|AMP
विज्ञापन — Rectangle

PATNA : एक समय था जब छात्रों का एक हिस्सा सरस्वती पूजा का आयोजन करता था, लेकिन समय के साथ पूजा-पाठ का प्रारूप भी बदल गया. अब हरेक चौक-चौराहों पर पूजा होती है. बड़े-बड़े पंडालों में बड़ी-बड़ी मूर्तियां, साथ मे 200 फीट वाला डीजे बाजा, जैसे लगता है कि पूजा पंडाल के आयोजकों पर भगवान का विशेष ध्यान हो गया हो.


आज से 20 वर्ष पहले जब हम जाते है तो पिता जी कहते कि सरस्वती पूजा हमलोग अपने स्कूल में मनाते थे. स्कूल के प्रधानाचार्य और शिक्षक मिलकर पूजा करते थे और उस पूजा में स्कूली बच्चें उनका साथ देते थे. पहले पूजा धार्मिक अनुष्ठान के रूप में विधिवत किया जाता था. लेकिन समय के प्रारूप के साथ पूजा का प्रारूप भी बदलता जा रहा है. 


16 फरवरी को सरस्वती पूजा है. आज् से ही मूर्तियां लोग ले जा रहे है.  लेकिन आश्चर्यजनक बात तो ये है कि ठेले पर रखी माँ सरस्वती की मूर्ति के समक्ष ही एक बड़ा सा साउंड बॉक्स भी रखा हुआ है. बैटरी के साथ और उस साउंड बॉक्स से जो आवाज निकल रही है. उसके बारे में तो पूछिये मत ? विद्या की देवी माँ सरस्वती भी घुटन महसूस कर रही होंगी. सरस्वती मां का पूजन हमलोग विद्या प्राप्त करने के लिए करते है लेकिन ठेलों के सहारे माँ की प्रतिमाएं ले जाने वालों की बुद्धि भ्रष्ट हो गई है, उन्हें नही मालूम कि माता सरस्वती की पूजन हम क्यो करते है ? 


सवाल ये खड़ा होता है कि क्या ये लोग जो सरस्वती माता के पूजन में अश्लीलता फैला रहे है. इन्हें समाज क्यो परवरिस दे रहा है. मुंह में गुटखा खाये ठेले पर रखी प्रतिमाओं के साथ फूहड़ता से परिपूर्ण गीत. हमारी आस्थाओं पर एक गहरा घात है आखिर कौन निकलेगा हमे इस दलदल से ? और कैसे निकलेंगे हम ? भारतीय संस्कृति और सभ्यता को तार-तार करने वाले ऐसे लोगो के बारे में हम क्या कहेंगे ? सवाल ये है कि पूजा के नाम पर हम समाज मे अश्लीलता को परोसने वालो को तवज्जो क्यो दे रहे. ये पूजा है या फिर पूजा के नाम पर अश्लील गीतों का मेला ?


समाज मे ऐसे लोगो को प्रतिकार जरूरी है जो सामाजिक ढांचों और प्रारूपों को तार-तार कर अपने उत्सवों को मनावे, हमारे भारतीय संस्कृति में ऐसे पूजा का कोई महत्व नही. 

इस खबर के बारे में

रिपोर्टर / लेखक

First Bihar

FirstBihar न्यूज़ डेस्क

विज्ञापन

संबंधित खबरें