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मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की जाति को करारा झटका: पटना हाईकोर्ट ने कोइरी जाति को लेकर दिया अहम फैसला

पटना हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला देते हुए साफ किया कि कुशवाहा (कोइरी) और दांगी जाति अलग-अलग हैं। कोर्ट के मुताबिक कुशवाहा OBC में आते हैं, जबकि दांगी EBC में शामिल हैं, इसलिए कुशवाहा जाति के लोग अति पिछड़ा वर्ग के आरक्षण का लाभ नहीं ले सकते।

1st Bihar Published by: FIRST BIHAR Updated Apr 23, 2026, 8:52:55 AM

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- फ़ोटो AI

PATNA: पटना हाईकोर्ट ने कुशवाहा (कोइरी)  जाति को लेकर एक अहम फैसला दिया है. कोर्ट ने कहा है कि कुशवाहा जाति के लोग अति पिछड़ी जाति का आरक्षण नहीं ले सकते. हाई कोर्ट ने कहा है कि कुशवाहा और दांगी जाति अलग है और कुशवाहा जाति के लोग दांगी को मिले आरक्षण का लाभ नहीं ले सकते.


बता दें कि दांगी जाति को कुशवाहा जाति की ही उप जाति माना जाता है. लेकिन सरकारी दस्तावेजों में दोनों को अलग समूह में रखा गया है. दांगी को अति पिछड़ी जाति का दर्जा मिला हुआ है तो कुशवाहा OBC यानि अन्य पिछड़ी जाति में आते हैं.


पटना हाईकोर्ट ने एक अहम निर्णय में स्पष्ट किया है कि कुशवाहा और दांगी दो अलग-अलग जातियां हैं और दोनों का वर्गीकरण भी अलग है। अदालत ने कहा कि कुशवाहा समुदाय अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) में आता है, जबकि दांगी समुदाय अत्यंत पिछड़ा वर्ग (EBC) में शामिल है। इस आधार पर EBC के लिए आरक्षित सीट पर OBC कुशवाहा जाति का व्यक्ति चुनाव नहीं लड़ सकता।


क्या है पूरा मामला

यह मामला पश्चिम चंपारण जिले के बेतिया प्रखंड स्थित वजहा वसमहापुर पंचायत से जुड़ा है। यहां वर्ष 2021 में हुए पंचायत चुनाव में मुखिया पद के लिए मनोज प्रसाद का चुनाव हुआ था। उनके निर्वाचन को चुनौती देते हुए संतोष कुमार ने आरोप लगाया कि मनोज प्रसाद ने जाति प्रमाणपत्र में गड़बड़ी कर आरक्षित सीट का लाभ उठाया।


याचिकाकर्ता का आरोप

याचिकाकर्ता संतोष कुमार का कहना था कि जीत हासिल करने वाले उम्मीदवार मनोज प्रसाद वास्तव में दांगी जाति से नहीं, बल्कि कुशवाहा (कोइरी) जाति से हैं, जो कि OBC श्रेणी में आती है। आरोप था कि उन्होंने दांगी जाति के गलत जाति प्रमाणपत्र के आधार पर EBC आरक्षित सीट से चुनाव जीता, जो नियमों के खिलाफ है।


निर्वाचन आयोग ने की जांच

इस शिकायत के बाद मामला राज्य निर्वाचन आयोग के पास पहुंचा। आयोग ने इसकी जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की। जांच रिपोर्ट में कहा गया कि उम्मीदवार कुशवाहा जाति से संबंधित हैं, न कि दांगी जाति से। लिहाजा उनका चुनाव गलत है. आयोग ने मुखिया मनोज प्रसार का चुनाव रद्द कर दिया.


हाईकोर्ट का फैसला

पद से हटाए गए मुखिया मनोज प्रसाद ने निर्वाचन आयोग के फैसले को पटना हाईकोर्ट में चुनौती दी थी. मामला जब हाईकोर्ट पहुंचा तो अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद महत्वपूर्ण टिप्पणी की. इस मामले की सुनवाई हाईकोर्ट में जस्टिस सुधीर सिंह और जस्टिस शैलेन्द्र सिंह की डबल बैंच में हुई.


कुशवाहा और डांगी अलग-अलग जातियां हैं

हाईकोर्ट की बेंच ने सभी पक्षों को सुनने के बाद कहा कि कुशवाहा और दांगी जातियों का  सामाजिक वर्गीकरण अलग है—एक OBC यानि पिछड़ी जाति में है तो दूसरा EBC यानि अति पिछड़ी जाति में शामिल है. EBC के लिए आरक्षित सीट पर केवल उसी वर्ग का उम्मीदवार चुनाव लड़ सकता है


अदालत ने यह भी कहा कि प्रस्तुत साक्ष्यों और तथ्यों के आधार पर याचिकाकर्ता मनोज प्रसाद अपने आरोप को  साबित नहीं कर सके। वे नहीं साबित कर पाए कि अति पिछड़ों के लिए आरक्षित सीट पर वे कैसे चुनाव लड़ सकते हैं. इस कारण कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी।