Bihar Politics: चुनावी रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर बिहार में अपनी सियासी जमीन तलाश रहे हैं। एक साल तक बिहार के पंचायतों की धूल फांकने के बाद बीते उपचुनावों में जन सुराज ने कोशिश तो की लेकर नाकामी ही हाथ लगी। अब बिहार में विधानसभा के चुनाव होने से ऐसे में प्रशांत किशोर सभी 243 सीटों पर उम्मीदवार उतारने की तैयारी कर रहे हैं। इसी बीच उन्होंने एक पुरानी भूल की चर्चा कर दी, जिसके लिए वह आज भी उन्हें बहुत पछतावा होता है।
दरअसल, प्रशांत किशोर ने कहा है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की बेदाग छवि को देखकर उनके साथ जुड़े थे। उनकी इसी छवि को देखकर उन्हें मुख्यमंत्री बनाए रखने के लिए आरजेडी से गठबंधन करने की सलाह दी थी लेकिन वह मेरी अबतक की सबसे बड़ी भूल थी। इस दौरान वे सीएम नीतीश कुमार और तेजस्वी पर खूब बरसे।
प्रशांत किशोर ने कहा कि साल 2014 में नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार प्रगति कर रहा था लेकिन मुख्यमंत्री बने रहने के लिए उन्होंने साल 2015 में प्रदेश की राजनीति में नई परंपरा की शुरुआथ कर दी थी। वह सत्ता में बने रहने के लिए हर तरह के हथकंडे अपनाने लगा। नीतीश कुमार ने सभा राजनीतिक मर्यादा को ताक पर रख दिया। जिसके कारण उनसे दूरी बना ली।
पीके ने कहा कि अब तो हालात और भी खराब हो गए हैं। सिर्फ नीतीश कुमार ही पलटू राम नहीं हैं बल्कि सत्ता में बने रहने के लिए तेजस्वी यादव और बीजेपी के लोग भी किसी हद तक समझौता करने के लिए तैयार रहते हैं। अब ये सभी लोग पलटू राम बन गए हैं। बिहार को इनसे मुक्ति दिलाने के लिए आने वाले विधानसभा चुनाव में सभी 243 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ेंगे और जन सुराज पार्टी का किसी भी दल के साथ गठबंधन नहीं होगा।


