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Gita Oath in Court: गवाहों को गीता की कसम क्यों दिलाई जाती है, रामायण की क्यों नहीं? जानिए चौंकाने वाली वजह

Gita Oath in Court: हम सभी ने अक्सर फिल्मों और टीवी धारावाहिकों में देखा है कि कोर्ट रूम में जज किसी गवाह का बयान लेने से पहले उसे गीता की शपथ दिलाते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर गवाहों को गीता की ही कसम क्यों खिलाई जाती है, रामायण की...

Gita Oath in Court
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PRIYA DWIVEDI
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Gita Oath in Court: हम सभी ने अक्सर फिल्मों और टीवी धारावाहिकों में देखा है कि कोर्ट रूम में जज किसी गवाह का बयान लेने से पहले उसे गीता की शपथ दिलाते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर गवाहों को गीता की ही कसम क्यों खिलाई जाती है, रामायण की क्यों नहीं? इसके पीछे ऐतिहासिक और धार्मिक कारण हैं। 


दरअसल, भारत में जब मुगल शासकों का शासन था, तब उन्होंने अपने नागरिकों की बातों पर विश्वास बनाए रखने के लिए एक प्रथा शुरू की थी, जिसमें गवाहों को उनके धर्मग्रंथ पर हाथ रखकर शपथ दिलाई जाती थी। उस समय हिंदू धर्म के अनुयायी गीता, मुस्लिम धर्म के लोग कुरान, और ईसाई धर्म के लोग बाइबल पर शपथ खाते थे। मुगल शासनकाल में यह दरबारी प्रथा थी, लेकिन अंग्रेजों ने इसे कानूनी रूप दिया और इसे इंडियन ओथ्स एक्ट, 1873 में शामिल कर सभी अदालतों में लागू किया।


इस एक्ट के तहत शपथ लेने की परंपरा धार्मिक ग्रंथों के आधार पर तय की गई थी। स्वतंत्र भारत में यह प्रथा धीरे-धीरे बदलती रही और 1969 में ओथ्स एक्ट, 1969 लागू किया गया, जिससे देश में एक समान शपथ कानून लागू हुआ। अब किसी भी व्यक्ति को उसके धर्म के अनुसार या अपने विश्वास के अनुसार शपथ लेने का अधिकार है।


तो फिर गीता पर ही क्यों शपथ दिलाई जाती है? इसका मुख्य कारण यह है कि गीता केवल युद्ध या महाभारत का वर्णन नहीं करती, बल्कि जीवन में सत्य, धर्म और नैतिक आचरण का मार्गदर्शन भी देती है। रामायण में भगवान श्रीराम के आदर्श जीवन का विवरण है और यह धार्मिक एवं नैतिक शिक्षा देती है, लेकिन गीता में व्यक्ति को हर परिस्थिति में सच्चाई, न्याय और धर्म के मार्ग पर चलने की सीख मिलती है। यही कारण है कि अदालत में गवाहों को गीता की शपथ दिलाई जाती है, ताकि वे अपने बयान में सत्य का पालन करें और न्याय प्रक्रिया में ईमानदारी बरतें।


साथ ही, गीता का संदेश सार्वभौमिक है और यह केवल हिंदू धर्म तक सीमित नहीं, बल्कि किसी भी व्यक्ति के लिए नैतिक दिशा निर्देश प्रदान करती है। इसलिए गवाहों की शपथ के लिए गीता का चयन इस दृष्टि से भी उपयुक्त माना गया है कि यह सत्य, न्याय और कर्तव्यपरायणता का प्रतीक है। यही कारण है कि कोर्ट रूम में आज भी गीता पर हाथ रखकर शपथ लेने की प्रथा को अपनाया जाता है, ताकि न्यायिक प्रक्रिया में पारदर्शिता और नैतिकता बनी रहे।

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PRIYA DWIVEDI

FirstBihar न्यूज़ डेस्क

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