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देश का पहला गाली मुक्त गांव: गालीबाज लोग गलती से भी यहां ना जाए, नहीं तो देना पड़ जाएगा इतना जुर्माना

गांव की महिलाओं ने इस फैसले का स्वागत किया है। उनका कहना है कि पहले बच्चों द्वारा अपशब्द सीखने और इसके इस्तेमाल से माहौल खराब हो जाता था, लेकिन अब इस नियम से स्थिति में सुधार हुआ है और गांव का माहौल पहले से बेहतर हो गया है।

1st Bihar Published by: First Bihar Updated Apr 11, 2026, 8:57:24 PM

मध्यप्रदेश न्यूज

अब गाली देने वालों की खैर नहीं! - फ़ोटो सोशल मीडिया

DESK: आजकल बातचीत के दौरान अक्सर लोग मां-बहन की गालियों का इस्तेमाल करने लगे हैं। यह प्रचलन काफी बढ़ गया है। इसे एक सामान्य व्यवहार का हिस्सा लोगों ने मान लिया है। कुछ लोग तो बात-बात में मां-बहन की गाली देते हैं। ऐसे गालीबाज लोगों का गुजारा इस गांव में नहीं है।


गालीबाज लोगों को पहले ही कह दिया जाता है कि इस गांव में जाने की कोशिश मत करना नहीं तो लेने के देने पड़ जाएंगे। यदि गलती से भी मुंह से मां-बहन की गाली निकल गयी तो भारी जुर्माना भरना पड़ जाएगा। जी हां हम बात कर रहे हैं मध्यप्रदेश के बुरहानपुर जिले के बोरसर गांव की जहां गाली बकने पर पूरी तरह रोक लगा दी गयी है। इसे प्रदेश का पहला गाली मुक्त गांव घोषित किया गया है। 


मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले के एक गांव ने समाज के लिए एक अनोखी और प्रेरणादायक पहल की है। यहां ग्राम पंचायत बोरसर ने गालियों और अपशब्दों के इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक लगा दी है, जिसके चलते इसे प्रदेश का पहला ‘गाली मुक्त गांव’ घोषित किया गया है। इस नियम के तहत गांव में किसी भी व्यक्ति द्वारा मां-बहन से जुड़े अपशब्द या गालियों का प्रयोग करने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। नियम तोड़ने पर 500 रुपये का जुर्माना या फिर एक घंटे तक गांव की सफाई करनी होगी।


ग्राम पंचायत द्वारा यह निर्णय सर्वसम्मति से लिया गया और इसके व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए पूरे गांव में पोस्टर भी लगाए गए हैं। इन पोस्टरों में गांव को “मध्य प्रदेश का पहला गाली मुक्त गांव” बताते हुए स्वच्छ और विकसित बोरसर बनाने का संदेश दिया गया है।


गांव के उप-सरपंच विनोद शिंदे ने बताया कि यह पहल बच्चों और बड़ों के बीच बढ़ते अपशब्दों के इस्तेमाल को रोकने के लिए शुरू की गई है। उन्होंने कहा कि अक्सर गालियों की वजह से छोटे-छोटे विवाद बड़े झगड़ों में बदल जाते हैं, इसलिए इस नियम का उद्देश्य सामाजिक व्यवहार को सुधारना और शांति बनाए रखना है।


उन्होंने यह भी कहा कि आजकल कई लोग गालियों को सामान्य बातचीत का हिस्सा मान लेते हैं, जिससे समाज पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इस नियम के लागू होने के बाद गांव में लोगों की भाषा को लेकर जागरूकता बढ़ी है और इसका सकारात्मक असर भी देखने को मिल रहा है।


गांव की महिलाओं ने इस फैसले का स्वागत किया है। उनका कहना है कि पहले बच्चों द्वारा अपशब्द सीखने और इसके इस्तेमाल से माहौल खराब हो जाता था, लेकिन अब इस नियम से स्थिति में सुधार हुआ है और गांव का माहौल पहले से बेहतर हो गया है।